सटीक समाचार, वाशिंगटन/नई दिल्ली। Donald Trump Action: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चार भारतीय कंपनियों सहित आठ कंपनियों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। ट्रंंप ने इन कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम यानि प्रोग्राम इलेक्ट्रॉनिक रिव्यू मैंनेजमेंट (PERM) से सस्पेंड कर दिया है।
इस तरह इन कंपनियों को एक तरह से ग्रीन कार्ड (Green Card) प्रोग्राम से अलग कर दिया है। इन कंपनियों में भारत की चार कंपनियां व्रिपो, टाटा टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल शामिल हैं। माइक्रोसाफ्ट, काग्जिनेंट , एडोबी और कैपजैमिनी जैसी कंपनियों पर भी यह रोक लगाई गई है।
भारतीयों पर सीधा होगा असर
ट्रंप की इस कार्रवाई से भारतीयों पर सीधी असर होगा। इससे विदेशियों खासकर भारतीयों के लिए ग्रीन कार्ड लेना बेहद कठिन हो जाएगा। माना जा रहा है कि यह कदम भारतीयों को निशाने पर रखकर उठाया गया है। अब ये कंपनियों अपने विदेशी कर्मचारियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोगाम (PERM) का आवेदन नहीं कर सकेंगी। बता दें कि इसी प्रक्रिया के जरिये कंपनियाें द्वारा एच-1B पर काम रहे अपने विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में स्थायी रूपे से रहने बसाने के लिए आवेदन किया जाता है।
ट्रंप सरकार ने कहा- अमेरिकियों की नौकरी छीनकर विदेशियों को नहीं दिया जा सकता
अमेरिकी श्रम विभाग ने इस संबंध में 8 अक्टूबर को इस संबध में आदेश जारी किया है। ट्रप सरकार का कहना है कि स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरी छीन कर विदेशयों को नहीं दी सकती है। इस तरह ये कंपनियों अब अपने कर्मचारियों के लिए परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम (PERM) के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगी। पहले दिए गए आवेदनों पर भी प्रक्रिया रोक दी जाएगी।
इससे अमेरिका में इन कंपनियों में काम कर रहे भारतीयों और विदेशियों के लिए ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करना मुश्किल हो जाएगी। जिन विदेशियों के ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन PERM के स्तर पर है उनकी यह प्रक्रिया रोक दी जााएगी।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा-ये कंपनियां अमेरिकी युवाओं की नौकरियां छीन रहीं
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम सचिव कीथ साइन्डरिंग ने कहा कि ये कंपनियां एच-1बी और ग्रीन कार्ड के जरिये अमेरिकी युवाओं की नौकरियां छीन रही हैं। कंपनियों को अमेरिकी लोगों को नौकरियां देनी होगी। कंपनियां अमेरिकी युवा की नौकरी नहीं छीन सकेंगी । वेंस ने हावर्ड, स्टेनफोर्ड और येल सहित नौ यूनिवर्सिटी की भी जांच कराने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि आरोप है कि ये शिक्षण संस्थान अमेरकी वेतन को कम करने के लिए विदेशी विद्यार्थियों को अपने यहां ला रहे हैं।
माइक्रोसाफ्ट पर विशेष रूप से निशाना साधा
डी वेंस ने इन कंंपनियों पर अमरिकियों की नौकरी छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट पर विशेष रूप निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इस कंपनी ने पिछले कररीब एक साल में 6000 अमेरिकियों की छंटनी की है। दूसरी ओर, 6300 एच-1बी वीजा धारकों और 3000 ग्रीन कार्ड धारकों को कार्य पर रखा गया है।
यह समाचार भी पढ़िये: JIO की अब अंतरिक्ष पर नजर, 1600 सैटेलाइट व 23 ग्राउंड स्टेशन की योजना
अमेरिकी सरकार के इस कदम का सबसे अधिक और सीधा असर भारतीयों पर होगा। ऐसे में भारत और अमेरिकी के रिश्ते में खटास आ सकती है। हालांकि देर रात तक भारत सरकार की ओर से इस मामले में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
जानें क्या है PERM कार्यक्रम
- अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों को स्थायी रूप से रखने के लिए कंपनियों को सरकारी मंजूरी है।
- यह किसी अमेरिकी कंपनी को किसी विदेशी कर्मचारी को ग्रीन कार्ड दिलाने से पहले की प्रक्रिया होती है। यह अप्रुवल ग्रीन कार्ड के लिए आवश्यक होता है।
- इसके तहत आवेदन में कंपनी को यह विश्वास दिलाना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए कोई योग्य अमेरिकी कर्मचारी नहीं मिला।
- इसके साथ ही कंपनी को यह भी भरोसा दिलाना होता है कि उक्त विदेशी कर्मचारी को जॉब पर रखने से स्थानीय अमेरिकी लोगों की नौकरियों को नहीं छीनी जा रही है और न ही उनकी सैलरी पर कोई असर पड़ रहा है।

