सटीक समाचार, चंडीगढ़/पानीपत। हरियाणा में पीपीपी यानि परिवार पहचान पत्र (PPP In Haryana ) लेकर नया ‘खेल’ चल रहा है। विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोग अपने परिवार से ‘अलग’ हो रहे हैं। राज्य में काफी संख्या में लोगों ने संयुक्त परिवार में रहते हुए अपनी सिंगल मेंबर पीपीपी आईडी (Single Member PPP ID) बनवाई है और अब भी बनवा रहे हैं।
काफी संख्या में लोगों ने संयुक्त परिवार में रह कर सिंगल पीपीपी आईडी कार्ड बनवाया
ऐसे में अब इसकी जांच करवाई जा रही है। काफी संख्या में मामले मिले हैं कि व्यक्ति संंयुक्त या पूरे परिवार के साथ रह रहा है, लेकिन सिंगल मेंबर पीपीपी आईडी कार्ड बनवाई है। दरअसल, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए पारिवारिक आय सबसे बड़ा मानक है। पीपीपी से पूरे परिवार के सदस्यों की आय जुड़ने पर आयसीमा पार कर जाने से योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ता है। ऐसे में लोग खुद को परिवार से अलगे दिखाकर परिवार से अलग अपना सिंगल पीपीपी बनवा लेते हैं।
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क्रीड को सौंपी गई जांच
जानकारी के अनुसार, सरकार ने इसकी जांच अब क्रीड (CRID) को सौंपी गई है। बताया जाता है कि अभी तक की जांच में सिंगल पीपीपी आईडी के मामले में 90 प्रतिशत धारक संयुक्त परिवार में रहते पाए गए हैं। इसको लेकर पूछताछ में लोग तरह-तरह की मजबूरी और बहाने बना रहे हैं। अब ऐसे सिंगल पीपीपी आईडी को संयुक्त परिवार पहचान पत्र में जोड़े रहे हैं। ऐसे में संभावना है कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की सूची से काफी संख्या में नाम कटेंगे और उचित पात्र लोगों को इसका लाभ मिलेगा।
हरियाणा में साढ़े 77 लाख पीपीपी पंजीकृत
बता दें कि हरियाणा में अब तक 77 लाख 50 हजार (77.50 लाख) परिवार पहचान पत्र पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 3.88 लाख सिंगल मेंबर पीपीपी आईडी हैं। पानीपत जिले की बात करें तो यहां 3.78 लाख से अधिक परिवार पहचान पत्र बने हुए हैं। इनमें करीब 15800 सिंगल मेंबर पीपीपी आईडी हैं। अब राज्यभर में क्रीड (CRID) की टीमाें ने जांच शुरू कर दी है।
क्रीड मुख्यालय से आ रही सिंगल पीपीपी
क्रीड की टीमों को मुख्यालय से सिंगल पीपीपी आईडी धारकों की सूची भेजी जा रही है और इसके आधार पर टीम के सदस्य दिए गए पतों पर जाकर जांच कर रहे हैं। घर-घर जांच में यह भी पाया गया कि एक ही परिवार के सदस्यों ने अपनी अलग-अलग सिंगल पीपीपी आईडी बनवा रखी है।
पानीपत में कई मामले उजागर हुए
जांच में सामने आया कि विधवा महिलाएं अपने परिवार और बेटे के साथ रहती हैं, लेकिन उसकी पीपीपी अलग बनी हुई है। पूरे परिवार के साथ पीपीपी में उनका नाम जुड़ने से पारविारिक आय योजना के लिए तय आयसीमा से अधिक हो जाती। अब ऐसी महिलाओं का नाम बेटे की पीपीपी आईडी के साथ ही जुड़ेगा। ऐसा ही अन्य योजना के लाभ के लिए भी किया जा रहा है।
इसी तरह पानीपत की एक कॉलोनी में एक मामला उजागर हुआ। वहां एक व्यक्ति परिवार के छह सदस्यों के साथ रह रहा है और खुद भी एक फैक्टरी में काम करता है। उसकी सिंगल पीपीपी बनी हुई थी। उसका नाम बीपीएल सूची में था और इससे उसे 35 किलो गेहुं मिलता था। परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर भी गेहूं मिलता था और इस तरह परिवार का गुजारा चल जाता था। अब परिवार के सभी सदस्यों का नाम एक ही पीपीपी में शामिल कराया गया है।
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क्रीड के पानीपत जिला प्रबंधक ने कहा कि यहां हेडक्वार्टर से अब तक 2000 सिंगल मेंबर वाले पीपीपी आईडी धारकों की सूची आई है। क्रीड की टीमें इसमूं दिए गए पतों पर घर-घर जाकर जांच कर रही है। अभी तक की जांच में करीब 90 प्रतिशत मामलों में सिंंगल मेंबर पीपीपी आईडी धारक संयुक्त परिवार में रहते पाए गए हैं।


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