सटीक समाचार, चंडीगढ़। हरियाणा के कांग्रेस सांसदों (Haryana Congress MPs Protest) ने संसद परिसर में कॉमनवेल्थ खेल 2030 (CWG 2030) की मेजबानी को लेकर प्रदर्शन किया। उन्होंंने CWG 2030 में हरियाणा को मेजबान या सह-मेजबान राज्य बनाने की मांग की। उन्होंने कहा किे खेलों में पदक हरियाणा दिलाता है तो फिर राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) में सिर्फ गुजरात को मेजबानी क्यों मिली है।
कहा- CWG 2030 में गुजरात के संग हरियाणा को सह मेजबान बनाया जाए
हरियाणा के कांग्रेस सांसदों दीपेन्द्र सिंह हुड्डा, जयप्रकाश जेपी, वरुण मुलाना, सतपाल ब्रह्मचारी और राज्यसभा सदस्य कर्मबीर बौद्ध ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। सांसदों ने कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2026) में देश का नाम रोशन करने पर सभी पदक विजेता खिलाड़ियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के 13 गोल्ड मेडल में से सात गोल्ड मेडल हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते हैं।
उन्होंने कहा कि हम संसद में अब तक सरकार से यही अपील कर रहे थे कि यदि भारत को 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी का अवसर मिलता है, तो हरियाणा को भी इसमें शामिल किया जाए। पूर्ण मेजबान न सही, तो कम से कम सह-मेजबान प्रदेश अवश्य बनाया जाए।
सांसद बोले – सरकार ने हमारी अपील पर ध्यान नहीं दिया
उन्होंंने कहा कि सरकार ने सरकार ने हमारी अपील पर कोई ध्यान नहीं दिया। खेल मंत्रालय द्वारा यह औपचारिक घोषणा कर दी गई है कि ये आयोजन केवल एक ही शहर अहमदाबाद (गुजरात) में होंगे। इसके साथ ही 2036 ओलंपिक की बिड भी केवल अहमदाबाद के लिए पेश की जा रही है। यह बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है और अब हम अपने इस हक के लिए हर स्तर पर लड़ाई लड़ेंगे।
अंतरराष्ट्रीय खेलों में देश को हरियाणा 50% अधिक पदक दिलाते हैं
उन्होंने कहा कि दो प्रतिशत आबादी वाले हरियाणा के खिलाड़ी देश को कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियन गेम्स और ओलिंपिक में 50% से अधिक मेडल दिलाते हैं, फिर भी हरियाणा की उपेक्षा का शिकार क्यों है? इससे भी दुर्भाग्यपूर्ण ये है कि हरियाणा सरकार ने इसकी मेजबानी या सह-मेजबानी के लिए कोई प्रस्ताव भी नहीं भेजा।
दीपेंंंद्र हुड्डा ने सवाल किया कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद में क्यों जहां एक भी मेडल नहीं हैं? उन्होंंने कहा कि भारत को कॉमनवेल्थ खेल 2030 की मेज़बानी का मौका मिला, तो इसके लिए गुजरात को चुना गया। हरियाणा की भाजपा सरकार प्रदेश के हक की आवाज तक नहीं उठा सकी।
दीपेंद्र हुड्डा ने कहा- सह मेजबानी के लिए हरियाणा सरकार दावा पेश किए
उन्होंंने कहा कि कॉमनवेल्थ खेल 2030 (CWG 2030) के लिए लाखों करोड़ का निवेश अब अहमदाबाद में होगा, खेल का ढांचा तैयार होगा। अगर हरियाणा को मेजबान या सह मेजबान बनाया जाता है तो यही खेल का ढांचा, स्टेडियम और डेवलपमेंट पर लाखों करोड़ खर्च हरियाणा में भी होता। दीपेन्द्र हुड्डा ने मांग की कि राष्ट्रमंडल खेल 2030 की मेज़बानी अथवा सह मेज़बानी के लिए हरियाणा सरकार तुरंत प्रस्ताव करे और भारत सरकार इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करे।
कहा- ओलिंंपिक 2036 के लिए भी सिर्फ अहमदाबाद के लिए बोली पेश की गई
उन्होंने कहा कि सरकार ने ओलिंपिक 2036 को भी गुजरात में कराने के लिए आधिकारिक बोली (बिडिंग) पेश करने की घोषणा की है। वहां भी हरियाणा पर ध्यान नहीं दिया गया। हरियाणा की इस तरह उपेक्षा देश को महंगी पड़ेगी। कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का आयोजन हरियाणा में होना चाहिए या फिर देश की राजधानी दिल्ली में हो। हरियाणा के जो जिले NCR में आते हैं उसमें आयोजन हो सकता है।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि आज हरियाणा में खेल ढांचे की इतनी दुर्दशा है कि खेल के मैदान में प्रैक्टिस करते हुए हमारे खिलाड़ियों की जान तक जा रही है। हरियाणा को ‘खेलो इंडिया’ बजट में सबसे कम राशि दी गई। देश के ₹3500 करोड़ के ‘खेलो इंडिया’ बजट में 600 करोड़ रुपये गुजरात मिला और सबसे ज्यादा मेडल लाने वाले हरियाणा को सिर्फ ₹80 करोड़ ही दिए गए। यह देश में सबसे कम है।
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उन्होंने कहा कि सरकार हरियाणा के लिए खेलो इंडिया में न के बराबर बजट दे रही है। यह देश की खेल भावना के साथ क्रूर मजाक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार के समय खेल व खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण अंचलों में खेल स्टेडियम बनाए थे।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए कांग्रेस की हुड्डा सरकार द्वारा बनाई गई ‘पदक लाओ, पद पाओ’ नीति और स्कूल स्तर पर कक्षा पहली से खेल-खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए स्पेट (SPAT) नीति को भी भाजपा सरकार ने सत्ता में आते ही खत्म कर दिया।
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उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, भाजपा सरकार हरियाणा में कांग्रेस सरकार के समय बने 481 खेल स्टेडियमों के रखरखाव के लिए पर्याप्त बजट तक नहीं दे पाई। 11 साल में नया स्टेडियम बनाना तो दूर, मौजूदा स्टेडियमों का रिपेयर तक नहीं कराया, खेल नर्सरियों की दुर्दशा कर डाली। इसके चलते हाल ही में दो होनहार खिलाड़ियों को जान गंवानी पड़ी।
