जैन स्‍थानक में चातुर्मास प्रवचन, राजेश मुनि बोले- सलाह देना सरल, विश्‍वास जीतना कठिन

Panipat Jain Sthanak: पानीपत के जैन स्‍थानक में चातुर्मास प्रवचन के दौरान डॉ. राजेश मुनि जी महाराज और उनके बारे में उद्गार व्‍यक्‍त करते जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन। (फोटो सौजन्‍य जैन सभा)
Panipat Jain Sthanak: पानीपत के जैन स्‍थानक में चातुर्मास प्रवचन के दौरान डॉ. राजेश मुनि जी महाराज और उनके बारे में उद्गार व्‍यक्‍त करते जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन। (फोटो सौजन्‍य जैन सभा)
Last Updated: 12 Oct, 2026 at 09:05 PM by Sunil Kumar Jha

सटीक समाचार, पानीपत। Panipat Jain Sthank : यहां गांधी मंडी जैन स्थानक में चल रही चातुर्मास प्रवचन में अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज ने कहा कि कि दुनिया की हर चीज वहीं मिल सकती है जहां खोई हो लेकिन विश्वास के साथ ऐसा नहीं है। दूसरों को सलाह देना बहुत सरल काम है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है।

कहा- विश्‍वास खुशि‍यों का स्रोत भी

उन्‍होंने कहा कि विश्वास जीतना जितना कठिन है उतना ही यह खुशियों का स्रोत भी है। इसीलिए हर रिश्ते में विश्वास की अत्यधिक अहमियत है, इसको खोया नहीं जाना चाहिए। मुनिश्री जी ने कहा कि पहले जीवन मंत्र से चलते थे फिर यंत्र से चलने लगे, आज षड्यंत्र द्वारा चल रहे हैं।

विचार तपस्विनी साध्वी श्री भविका जी महाराज ने एक संस्कृत युक्ति को बताते हुए प्रकट किया और कहा कि विश्वास फलदायक होता है। देव गुरु और धर्म के प्रति श्रद्धा से ही मानव का कल्याण होता है।

अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज के प्रति उद्गार

इस अवसर पर जैन समाज के प्रमुख लोगों ने अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि के प्रति अपने उद्गार व्‍यक्‍त किए। जैन सभा के महामंत्री डॉ ईश्वर जैन नेकहा ‘गुरुवर तेरे चरणों की गर धूल जो मिल जाए/ सच कहता हूं मेरी तकदीर संवर जाए/ तेरे चरणों में बीते मेरी हर सुबह और शाम/ मेरी भी उम्र गुरुवार तुमको ही लग जाए।’

सामूहिक गीत की प्रस्‍तुति

अंजलि जैन, सरिता जैन व नेहा जैन ने इस अवसर पर सामूहिक गीत प्रस्‍तुत किया। उनके गती के बोल थे- ‘करते हैं अनुमोदना आपकी तपस्या भारी है/ राजेश मुनि को वंदन करें दुनिया सारी है/ पानीपत नगरी में आपके तप की है धूम मची / दूर-दूर से आए देखो नर और नारी हैं।’

डॉ. एपी जैन ने कहा- गुरुवर हैं कीर्तिमान संपन्न संत

इस अवसर पर जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने कहा कि मुनि श्री एक कीर्तिमान संपन्न संत हैं। इनके इतने कीर्तिमान हैं कि उनका योग भी स्वयं एक कीर्तिमान बन जाएगा। यहां केवल सर्वाधिक महत्वपूर्ण कीर्तिमानों की बात करते हैं। अभिग्रह से प्रारंभ करें तो उनका 2500 अभिग्रह करने का एक कीर्तिमान है।

उन्‍हाेंने कहा कि 2500वां अभिग्रह अभी गतिमान है। इनके साथ जुड़े कुल 5000 दिनों से अधिक के निर्जल उपवास व्रत भी एक कीर्तिमान हैं। किसी एक अभिग्रह में 100 बोल होना भी एक कीर्तिमान है; पानीपत आने के पश्चात आपके सुशिष्य राजेंद्र मुनि जी महाराज द्वारा भी इनके साथ-साथ अभिग्रह द्वारा बेले बेले तप करना भी एक कीर्तिमान है।

मुनि श्री का एक दिन में 40-50 किमी पैदल चल लेना आम बात

उन्‍होंने कहा कि इनके लिए एक दिन में नंगे पांव 40-50 किलोमीटर चल लेना आम बात है और इस कारण इन्हें उग्र विहारी कहा जाता है। मुन‍ि श्री ने इस बार भीषण गर्मी में एक दिन में 70 किलोमीटर चलने का रिकॉर्ड बनाया है। उनकी प्रेरणा से 20,087 लोगों द्वारा नशा मुक्ति के संबंध में संकल्प पत्र भरने का रिकॉर्ड गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज़ हो चुका है।

संथारा पर शोध करने वाले पहले संत

डॉ. एपी जैन ने कहा कि संथारा विषय पर शोध करने वाले ये पहले संत हैं। उन्होंने 137 श्रमणों एवं श्रावकों व श्राविकाओं को स्वयं संथारों के पच्चखान कराए हैं। इस विषय पर पीएचडी की उपाधि के लिए 3000 पृष्ठों का शोध ग्रंथ लिखना भी एक कीर्तिमान है।

इंदौर से भी श्रद्धालु पानीपत पहुंच रहे हैं

डाॅ.जैन ने बताया कि मुनिश्री जी इंदौर में गत वर्ष का चातुर्मास संपन्न करके यहां आए हैं। वहां उनके प्रति जो दीवानगी है उसके कारण वहां से रोजाना कोई ना कोई दर्शनार्थ यहां आता ही रहता है। रविंद्र हिरण एवं आयुष राखेचा ने तो यहां आकर मास खमण या इससे ऊपर की उपवास व्रत की तपस्याएं भी की हैं। आज भी लगभग 15 व्यक्ति इंदौर से पधारे हैं। उनमें से मुख्य पदाधिकारियों का समाज ने भरपूर स्वागत किया है।

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डॉ. एपी जैन ने कहा कि 9 अक्टूबर को मुनिश्री जी के अभिनंदन महा समारोह में इनके 15 बोल सहित अभिग्रह वाला चार निर्जल उपवास का पचक्खान था, उनमें से 14 पूरे हो गए थे। 15वां अभी तक पूरा न होने के कारण आज इनका निर्जल 8 दिन का उपवास हो गया है। हम भगवान महावीर से प्रार्थना करते हैं कि शीघ्रातिशीघ्र 15 वां बोल पूरा हो जाए ताकि इस विषय में समाज की चिंता समाप्त हो जाए।

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