सटीक समाचार, चंडीगढ़। Hartyana Census 2027: हरियाणा में जनगणना 2027 (Census 2027) का पहला चरण पूरा हो गया है। अब अगले चरण की तैयारी शुरू कर दी गई है। हरियाणा सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 100 प्रतिशत कवरेज का लक्ष्य निर्धारित किया है। प्रथम चरण में राज्य में 51 हजार से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लाकों को कवर किया गया है।
राज्य सरकार ने कहा- जनगणना में कोई व्यक्ति या परिवार न छूटे
राज्य सरकार ने सभी जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि जनगणना में कोई भी व्यक्ति या परिवार न छूटे। सरकार ने इसके लिए सख्त जवाबदेही, गहन फील्ड निगरानी और समयबद्ध तैयारियों पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि जनगणना के दौरान किसी प्रकार की चूक, दोहरी गणना या आंकड़ों में त्रुटि की संभावना न रहे।
प्रथम चरण में 51907 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक कवर किए गए
हरियाणा निवास में प्रधान जनगणना अधिकारियों के एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें बताया गया कि जनगणना के प्रथम चरण में राज्य के 51,907 हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों को सफलतापूर्वक कवर किया जा चुका है। अब हरियाणा दूसरे चरण में जनसंख्या गणना की तैयारियों में जुट गया है। इस चरण में रिजर्व कर्मियों सहित लगभग 87,450 प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों की तैनाती की संभावना है, जो लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉकों में कार्य करेंगे।
जनगणना महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी: सुमिता मिश्रा
राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ‘जनगणना 2027’ के लिए राज्य नोडल अधिकारी हैं। उन्हाेंने सम्मेलन में अधिकारियों को जनगणना के बारे में दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने जनगणना को राष्ट्र निर्माण, विकास योजना और प्रभावी सुशासन से सीधे जुड़ी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय जिम्मेदारी बताया।

उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़ों की गुणवत्ता काफी हद तक जिला स्तर पर गंभीरता, नेतृत्व और फील्ड पर्यवेक्षण पर निर्भर करती है। उन्होंने जिला उपायुक्तों को जनगणना की तैयारियों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने, चार्ज अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने तथा जनसंख्या गणना शुरू होने से पहले संभावित परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान करने के निर्देश दिए।
कवरेज, सटीकता और गाेपनीयता पर ध्यान देने का निर्देश
उन्होंने कहा, ‘ कवरेज, सटीकता और गोपनीयता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।’ उन्होंने जिला प्रशासन को दुर्गम क्षेत्रों, तेजी से विकसित हो रही आवासीय बस्तियों, बहुमंजिला इमारतों, शहरी झुग्गी-बस्तियों तथा बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष परिचालन योजनाएं तैयार करने के निर्देश दिए।
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दूसरे चरण में ऐसे होगी कवरेज की व्यवस्था-
सम्मेलन में प्रस्तुत परिचालन रोडमैप के अनुसार, जनसंख्या गणना के दूसरे चरण में यह होगा कवरेज का स्वरूप होगा-
- हरियाणा के 23 जिलों, 6,522 गांवों और 88 कस्बों को शामिल करते हुए लगभग 70,000 प्रगणना ब्लॉकों में कार्य किया जाएगा।
- इस दौरान लगभग 74,800 प्रगणक और 12,650 पर्यवेक्षक, जिसमें रिजर्व कर्मी भी शामिल हैं।
- 203 जनगणना चार्जों में कार्य करेंगे। इनकी निगरानी 34 प्रधान जनगणना अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
- जनगणना की प्रमुख विशेषता डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग होगा। जनसंख्या गणना के लिए समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन, ऑनलाइन स्व-गणना (Self-Enumeration) और केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिससे कार्य में दक्षता, पारदर्शिता और आंकड़ों की सटीकता बढ़ाई जा सके।
डॉ. सुमिता मिश्रा ने दिए ये निर्देश दिए
- डॉ. मिश्रा ने जनगणना ड्यूटी से छूट मांगने वाले आवेदनों की भी कड़ाई से जांच करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से उन कर्मियों के मामलों की भी समीक्षा करने को कहा, जिन्होंने जनगणना के पहले चरण में ड्यूटी निभाई थी।
- सक्षम कर्मियों का चयन, समय पर नियुक्तियां और व्यापक प्रशिक्षण जनगणना की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रधान जनगणना अधिकारियों के सम्मेलन के साथ प्रशिक्षण गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं और इसके बाद चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों, फील्ड ट्रेनरों, प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण में निर्धारित प्रक्रियाओं, डिजिटल एप्लिकेशन और परिचालन संबंधी जिम्मेदारियों से कर्मियों को परिचित कराया जाएगा।
- प्रभारी अधिकारी फील्ड कर्मियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने तथा पर्यवेक्षकों के साथ साप्ताहिक बैठकें आयोजित करेंं। इसके साथ ही परिचालन संबंधी समस्याओं की पहचान और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करें।
- एफसीआर ने जनगणना कर्मियों के कल्याण और परिचालन संबंधी तैयारियों पर भी विशेष जोर दिया। जिला प्रशासन को पर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाएं, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक सहायता और आवश्यक प्रशासनिक सहयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
लंबित मानदेय के भगुतान पर जोर
उन्होंने सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से लंबित मानदेय भुगतान शीघ्र जारी करने पर जोर दिया, ताकि जनगणना कार्य में लगे कर्मियों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी न हो। सम्मेलन में प्रस्तुत वित्तीय प्रावधानों के अनुसार, प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को दोनों चरणों के लिए कुल 25,000 रुपये का मानदेय मिलेगा, जिसमें हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन के लिए 9,000 रुपये और जनसंख्या गणना के लिए 16,000 रुपये शामिल हैं।
जनगणना की सफलता में आम जनता की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए डॉ. मिश्रा ने उपायुक्तों को व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने तथा अफवाहों और गलत सूचनाओं का तथ्यों के आधार पर तत्काल खंडन करने के निर्देश दिए।
ये कदम भी उठाए जाएंगे
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के परिवारों तक पहुंचने के लिए सोशल मीडिया, शिक्षण संस्थानों, ग्राम पंचायतों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWAs), दीवार लेखन तथा पारंपरिक जन उद्घोषणा माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।
- गीता जयंती और सूरजकुंड मेले जैसे प्रमुख जनसमागमों का उपयोग भी जनगणना 2027 के प्रति जागरूकता बढ़ाने और नागरिकों को स्व-गणना के हेतु प्रोत्साहित करने के लिए किया जाएगा।
पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी
हरियाणा के जनगणना निदेशक डॉ. ललित जैन ने अधिकारियों को तकनीकी एवं परिचालन संबंधी तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनगणना 2027 भारत की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी। प्रगणक स्मार्टफोन पर समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से जनसंख्या संबंधी जानकारी दर्ज करेंगे। वहीं, Census Management and Monitoring System (CMMS) के माध्यम से फील्ड संचालन, प्रशासनिक प्रगति और जनगणना से जुड़े अधिकारियों के बीच समन्वय की निगरानी की जाएगी।
ये होगा जनगणना 2027 के लिए कार्यक्रम-
- सम्मेलन में प्रस्तुत कार्यक्रम के अनुसार, नागरिक 10 जनवरी से 24 जनवरी 2027 तक Self-Enumeration Portal के माध्यम से ऑनलाइन अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
- इसके बाद 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक घर-घर जाकर जनसंख्या गणना की जाएगी।
- 1 मार्च से 5 मार्च 2027 तक पांच दिवसीय पुनरीक्षण दौर आयोजित किया जाएगा, जिसमें छूटे हुए व्यक्तियों की पहचान, विसंगतियों का सुधार और पूर्ण कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा।
- जनगणना की संदर्भ तिथि एवं समय 1 मार्च 2027 को 00:00 बजे निर्धारित किया गया है। स्व-गणना का विकल्प चुनने वाले परिवारों का भी प्रगणकों द्वारा घर जाकर सत्यापन किया जाएगा।
- पर्यवेक्षक 20 प्रतिशत रिकॉर्ड का सत्यापन करेंगे, जबकि चार्ज अधिकारियों को ऐसे रिकॉर्ड चिन्हित करने की सुविधा होगी, जिनमें अतिरिक्त फील्ड सत्यापन की आवश्यकता हो।
सम्मेलन में विभिन्न तकनीकी सत्र हुए
सम्मेलन में जनसंख्या गणना की प्रक्रियाओं, प्रश्नावली, डिजिटल एप्लिकेशन, Self-Enumeration Portal, वैधानिक प्रावधानों तथा विशेष क्षेत्रों में जनगणना की व्यवस्थाओं से संबंधित तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, सेवा विभाग, डॉ. जी. अनुपमा; अतिरिक्त मुख्य सचिव, विकास एवं पंचायत विभाग, विजयेंद्र कुमार; निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग, डॉ. प्रियंका सोनी; मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों तथा जनगणना विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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