Insurance: हेल्‍थ और मोटर बीमा में एजेंट कमीशन घटाने की तैयारी, क्‍या IRDAI के प्रस्‍ताव का ग्राहकों काे मिलेगा लाभ

हेल्‍थ और मोटरकार बीमा पर इरडा ने प्रस्‍ताव किया है। (फाइल फोटो सोशल मीडिया)
हेल्‍थ और मोटरकार बीमा पर इरडा ने प्रस्‍ताव किया है। (फाइल फोटो सोशल मीडिया)
Last Updated: 25 Sep, 2026 at 05:15 PM by Sunil Kumar Jha

सटीक समाचार, नई दिल्‍ली। Insurance : स्‍वास्‍थ्‍य और मोटरकार बीमा में एजेंटों का कमीशन घटाने की तैयारी है। कुछ अन्‍य कदम उठाने की पहल भी गई है। इस संबंध में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने प्रस्‍ताव दिया है। इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्‍या ग्राहकों को इसका लाभ मिलेगा।

पिछली बार सरकार ने स्‍वास्‍थ्‍य और मोटरकार इंश्‍योरेंस (Health And Motor Car Insurance) पर जीएसटी शून्‍य कर दिया था। इससे इनके प्रीमियम में कमी आने की उम्‍मीद थी, लेकिन बीमा कंपनियों ने प्रीमियम में वृद्धि कर इसे पहले से भी महंगा कर दिया। इससे ग्राहकों को इसका कोई लाभ नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि क्‍या इरडा द्वारा प्रस्‍तावित कदमों का लाभ ग्राहकों तक पहुंच पाएगा।

इरडा के प्रस्‍ताव पर कंपनियों को विचार करने का आज अंतिम दिन

इरडा ने इंश्‍योरेंस सेक्‍टर में सुधार करने और इसे अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रस्‍ताव पेश किया है। इसके तहत एजेंटों का कमीशन कम करने और बीमा कंपनियों के खर्च में कटौती सहित कई अन्‍य उपायों का मसौदा दिया गया है। इस पर 25 अक्‍टूबर यानि आज तक स्‍टोकहाेल्‍डर कंपनियों से विचार करने को कहा है। दूसरी ओर, इरडा के प्रस्‍ताव के बाद बीमा कंपनियों शेयर के भाव में भी शेयर मार्केट में गिरावट दर्ज की गई है।

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बता दें कि ग्राहकाें को बेचे जाने वाली बीमा पॉलिसी के प्रीमियम में एजेंट और डिस्‍टीब्‍यूटर कमीशन भी शामिल होता है, लेकिन कंपनियां इस बारे में ग्राहकों को जानकारी नहीं देती हैं। इसके साथ ही कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं कि बीमा पॉलिसी बेचते समय ग्राहकों को गलत या अधूरी जानकारी देकर ग्राहकों को गुमराह किया जाता है। इससे बाद में ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और कई मामलों में तो इंश्‍योरेंस क्‍लेम देने से भी इन्‍कार कर दिया जाता है।

इन सब तथ्‍यों को भी इरडा के प्रस्‍ताव में ध्‍यान में रखा गया है। दरअसल, बीमा पॉलिसियों पर डिस्‍टीब्‍यूटर और एजेंट कमीशन पहले साल में 35 से 40 प्रतिशत तक होता है। इरडा ने डिस्‍टीब्‍यूटर का कमीशन घटाकर 15 प्रतिशत और एजेंट का कमीशन 20 प्रतिशत तक करने का प्रस्‍ताव दिया है। बीमा पॉलिसी के रिन्‍यूअल पर अब 10 से 15 प्रतिशत की जगह 5 प्रतिशत कमीशन करने का प्रस्‍ताव दिया गया है।

कमीशन के बारे में ग्राहकों को देनी होगी जानकारी

अब ग्राहकों को बीमा पॉलिसी बेचते समय कंपनियों को एजेंट और डिस्‍टीब्‍यूटर कमीशन के बारे में जानकारी देनी होगी। इससे ग्राहकाें को पता चलेगा कि उनके बीमा प्रीमियम में कितना कमीशन शामिल है।

मिस सेलिंग पर लगेगी रोक

इरडा के प्रस्‍ताव से ग्राहकों को गलत या अधूरी जानकारी देकर पॉलिसी बेचने पर भी प्रतिबंध लगेगा। कंपनियों ने कितनी गलत व अधूरी जानकारी देकर बीमा पॉलिसी बेची इसका पूरा डेटा भी जारी किया जाएगा। प्रस्‍ताव में कहा गया है कि गलत और अधूरी जानकारी देकर पॉलिसी बेचने वाले एजेंट व डिस्‍टीब्‍यूटर से कमीशन की राशि वापस ली जाएगी। इसके साथ ही पॉलिसी के कागजात पर एजेंट की आइडी भी दर्ज होगी।

कंपनियों को घटाने होंगे अपने खर्च

इरडा के प्रस्‍ताव में बीमा कंपनियों को अपने खर्च में कटौती करने भी कहा गया है। इसके अनुसार, कंपनियों को अपना खर्च आगामी दो वर्ष में 15 प्रतिशत और पांच साल में 12.5 प्रतिशत तक लाना होगा।

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लोन लेते समय जबरन गैरजरूरी बीमा लेने लेने के लिए विवश करने पर भी रोक लगेगी। अभी ऐसा होता है क‍ि लोन लेने पर गैरजरूरी बीमा लेने पर ग्राहकों को विवश किा जाता है।

ये सवाल भी उठ रहे हैं –

  • सवाल यह उठ रहा है कि क्‍या बीमा कंपनियां इरडा के कदमों का लाभ ग्राहकों तक पहुंचने देंगी। सरकार द्वारा हेल्‍थ और मोटरकार बीमा पर जीएसटी 18 प्रतिशत से समाप्‍त कर इसे शून्‍य करने का लाभ बीमा कंपनियों ने ग्राहकों तक नहीं पहुंचने दिया। उल्‍टा प्रीमियम इतना बढ़ा दिया गया कि बीमा पॉलिसियां पहले की अपेक्षा और महंगी हो गईं।
  • बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बीमा क्षेत्र मेंं इतनी प्रतिस्‍पर्धा है कि कंपनियां द्वारा एजेंटों को हतोत्‍साहित करने की संभावना कम लगती हैं और इसके लिए वे कुछ अलग रास्‍ता निकाल सकती हैं।
  • बीमा क्षेत्र के जानकारों का कहना है इन उपायों को अपनाया जाता है तो इरडा को इसके साथ ही ऐसी व्‍यवस्‍था करनी चाहिए कि इन कदमों का लाभ ग्राहकों तक पहुंचे।

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