नमिता झा (सटीक समाचार), मुंबई। Arunachaleshwar Temple: शिव के पंच भूत स्थलों में शामिल अरुणाचलेश्वर मंदिर में शिव की परम कृपा बरसती है। मान्यता है कि यहां मुक्ति के द्वार खुलते हैं और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है। यह पावन मंदिर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में स्थित है। इसे पांच सबसे पवित्र शिव मंदिराें में और अग्नि तत्व का प्रतीक माना जाता है।
यहां भगवान शंकर की अग्निलिंग के रूप में पूजा- अर्चना की जाती है। पौराणिक और धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान शिव अनंत (जिसका अंत न हो) अग्नि स्वरूप में प्रकट हुए थे।
अग्निलिंग के रूप माैजूद हैं भगवान शिव, अहंकार से मुक्ति मिलती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस तीर्थस्थल पर व्यक्ति को हर तरह के अहंंकार से मुक्ति मिलती है। धार्मिक कथाओं और श्रुतियों के अनुसार, भगवान शिव ने यहां ब्रह्मा जी के अहंकार को भंग किया था। शिव पुराण में इस स्थल को पांच सबसे पवित्र स्थलों में एक बताया गया है। शिव पुराण के अनुसार, यहां दर्शन और पूजा-अर्चना से मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताएं – इस मंदिर के चिंतन मात्र से मिलती है पूनर्जन्म के चक्र से मुक्ति
लोक और धार्मिक मान्यता यहां तक है कि इस पवित्र मंदिर का चिंतन करने मात्र से व्यक्ति को पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। मान्यताएं हैं कि यहां भगवान शिव अग्निस्तंभ के रूप में प्रकट हुए थे। यह मंदिर अरुणाचल पहाड़ी की तलहटी में स्थित है।
यहां माता पार्वती ‘उन्नामुलाई अम्मन’ के रूप में विराजमान हैं। सबसे विशेष बात यह है कि यहां केवल मंदिर के अंदर अग्नि स्तंभ के रूप में में मौजूद शिवलिंग को ही नहीं वरन पूरे पर्वत को भगवान शिव जी का स्वरूप माना जाता है।
भक्त करते हैं 14 किलोमीटर की परिक्रमा
यहां भक्त अरुणाचल पहाड़ी की क़रीब 14 किलोमीटर की परिक्रमा कहते हैं। इसे ‘गिरिवलंम’ कहा जाता है। पूर्णिमा की रात को ‘गिरिवलंम’ करने का विशेष महत्व है और यही कारण है कि पूर्णिमा पर ‘गिरिवलंम’ करने हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
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कार्तिगई दीपम त्योहार
यहां मशहूर त्योहार ‘कार्तिगई दीपम’ है। यह त्योहार सामान्यत: नवंबर या दिसंबर में आता है। इस अवसर पर अरुणाचल पहाड़ी की चोटी पर बहुत बड़ा महादीप प्रज्ज्वलित किया जाता है। यह भगवान शंकर के अग्नि ज्योति स्वरूप की याद में जलाया जाता है। कार्तिगई दीपम के दिन अर्धनारीश्वर की शोभायात्रा और दर्शन का यहां खास महत्व है।
मंदिर परिसर और शिल्पकला
- अरुणाचलेश्वर मंदिर परिसर करीब 25 एकड़ क्षेत्र में फैला है।
- यह मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना है।
- इसकी संरचना में 17वीं और 19वीं सदी में सुधार किया गया।
- मंदिर की दायीं ओर भव्य मंडप है। इस मंडप में हजार स्तंभ हैं। इसको विजयनगर काल में निर्मित माना जाता है।
- इसकी वास्तुकला द्रविड़ शैली की है और बहुत भव्य है।
- मंदिर में चार प्रवेश द्वार हैं। प्रवेश द्वार को गोपुरम कहा जाता है। मंदिर का पूर्वी गाेपुरम करीब 217 फीट ऊंचा है और 11 मंजिला है। यह दक्षिण भारत के मंदिरों में सबसे ऊंचे प्रवेश द्वारों में एक है।
- मंदिर परिसर में कई आंगन हैं। इन्हें संकेंद्रित प्राकारम कहा जाता है। यहां विशाल दीवारें हैं।
- पूरे मंदिर पसिसर में पत्थरों और स्तंभाें पर सूक्ष्म और मनोहारी मूर्तियां उकेरी हुई हैं। ये मूर्तियां विभिन्न देवी-देवताओं की हैं।
- मुख्य मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव अग्निलिंगम के रूप में विराजमान हैं।
- मंदिर के परिसर के दूसरे प्रांगण में माता पार्वती का सुंदर मंदिर है। माता पार्वती को यहां उन्नमलाई अम्मान कहा जाता है।
- मंदिर में एक खासियत भूतल कक्ष है। यहां पाताल लिंगम हैं। लोक मान्यता है कि यहां संत रमण महर्षि ने कठोर तप किया था।
- पूरा मंदिर परिसर किला जैसा लगता है। पत्थर की ऊंची दीवारों से घिरे इस परिसर में कई मंदिर, जलकुंड और मंडपम हैं।
अर्द्ध स्वरूप
इस मंदिर को शिव के अर्द्धनारीश्वर स्वरूप से जोड़ा जाता है। स्कन्द पुराण के अनुसार, यहां माता पार्वती ने तपस्या की थी और इसी कथा को अर्द्धनारीश्वर से जोड़ा जाता है।
दर्शन का क्या समय है?
- मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन का समय प्रात: 5.30 बजे (5.30 AM) से दोपहर 12.30 बजे (12.30 PM) और अपराह्न 3.30 बजे (3.30 PM) से रात्रि 9.30 बजे (9.30 PM) तक होता है।
- उक्षाकाल की पूजा सुबह 5.30 बजे (5.30 AM) , कला शांति पूजा 8.00 बजे (8.00 AM) और उची कला पूजा सुबह 11.30 बजे (11.30 AM) होती है।
- इसके बाद अपराह्न 5.30 बजे (5.30 PM) सायराचाई पूजा होती है। इसके बाद 7.30 बजे (7.30 PM) इरंदम कला पूजा और रात 9.30 बजे (9.30 PM) में अर्थजमा पूजा होती है।
यहां कैसे पहुंचें
हवाई मार्ग – यहां हवाई मार्ग से पहुंचने के लिए चेन्नई एयरपोर्ट या पुडुचेरी हवाई अड्डा आना होगा। चेन्नई एयरपोर्ट से अरुणाचलेश्वर मंदिर करीब 175 किलोमीटर दूर है। इसी तरह, पुडुचेरी एयरपोर्ट से करीब 112 किलोमीटर दूर है। दोनों एयरपोर्ट से टैक्सी या बस से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
रेल मार्ग – मंदिर परिसर से महज दो किलोमीटर की दूरी पर तिरुवन्नामलाई रेलवे स्टेशन है।


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