सटीक समाचार, नई दिल्ली। जन्म और मृत्य पंजीकरण (Birth And Death Registration) को लेकर देरी या लापरवाही बरतना अब भारी पड़ेगा। केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंंजीकरण और प्रमाणपत्र को लेकर नियम में बदलाव किया है। अब जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में देरी से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। देरी करने पर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ेगी। इस संबंध मंगलवार को केंद्र सरकार द्वारा पेश विधेयक राज्यसभा में भी पारित हो गया। लोकसभा से यह पहले ही पारित हो चुका है।
संसद में नया विधेयक पारित, विपक्षी सांसदों ने किया हंगामा
केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु पंजीकरण को लेकर 31 जुलाई को लोकसभा में विधेयक पारित कराया था। इसके बाद इसे राज्यसभा में भेजा गया था। मंगलवार को जब इस विधेयक को पारित कराने की प्रक्रिया चल रही थी तो विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। विपक्षी सांसदों में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की सदन में मौजूद नहीं रहने पर आपत्ति जताई। विपक्ष के सांसदाें ने अयोध्या के राम मंदिर में चंदे की चोरी को लेकर नारे लगाए।
एक साल तक जन्म -मृत्यु पंजीकरण को लेकर कोई बदलाव नहीं
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि एक वर्ष तक जन्म-मृत्यु पंजीकरण को लेकर नियम में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही पहले की तरह 21 दिनों के अंदर सूचना देने पर जन्म या मृत्यु पंजकरण होगा। सरकार ने कहा कि 21 दिन के बाद एक साल तक जन्म -मृत्यु पंजीकरण के लिए विलंब शुल्क देना होगा।
एक साल के बाद पंजीकरण के लिए यह होगी प्रक्रिया
संसद में पारित नए विधेयक में मूल रूप से एक साल के बाद जन्म या मृत्यु पंजीकरण को लेकर नियम में बदलाव किया गया है। अब एक साल के बाद और दो साल के अंदर जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए अधिक मश्क्कत करनी पड़ेगी। इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम यानि उपमंडल मजिस्ट्रेट या इन अधिकारियों द्वारा नियुक्त किसी अधिकारी से अनुमति लेनी पड़ेगी।
दो वर्ष से अधिक की देरी पर न्यायिक मजिस्ट्रेट से लेगी होगी इजाजत
किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने में दो साल से अधिक की देरी हो जाती है तो इसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही यह रजिस्ट्रेशन हो सकता है। इसके लिए अनुमति देने से पहले संबंधित अधिकारी काे इस बारे में जानकारी और दस्तावजों की पूरी तरह से जांच करनी होगी। इस नए विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 को और कड़क बनाना है, ताकि इसमें गड़बड़ी की संभावना नहीं रहे। अब राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक कानून बन जाएगा।
इसलिए जरूरी है जन्म और मृत्यु पंजीकरण
हर बच्चे के जन्म का पंजीकरण आवश्यक होता है। समय से पंजीकरण करवा कर जन्म प्रमाण पत्र बनवा लेने जरूरी होता है। इसके आधार उसे शिक्षा, पहचान और विभिन्न सरकारी याेजनाओं और वैधानिक अधिकाराें का लाभ मिलता है। जीवन में रोजगार सहित अन्य कार्यों मेंयह बेहद महत्वूपूर्ण होता है। इसी तरह मृत्यु का सही रिकार्ड उत्तराधिकारियों के लिए प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाओं में जरूरी होता है।
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