Punjab Assembly New Session: पेपर लीक पर निंदा प्रस्‍ताव पास, सीएम भगवंत मान बोले- Gen-Z के साथ चट्टान की तरह खड़ी है आप सरकार

पंजाब विधानसभा सत्र में भगवंत मान। (सौजन्‍य - पंजाब डीपीआरओ)
पंजाब विधानसभा सत्र में भगवंत मान। (सौजन्‍य - पंजाब डीपीआरओ)

सटीक समाचार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के नए सत्र (Punjab Assembly New Session) में मुख्‍यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पंजाब सरकार जेन-जी (Gen-Z) के साथ चट्टान की तरह खड़ी है। आम आदमी पार्टी की ओर से पेपर लीक मामलों और आंदाेलनकारी युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के विरोध में विधानसभा में निंदा प्रस्‍ताव पेश किया गया। इसे ध्‍वनि मत से पारित कर दिया गया।

ध्‍वनि मत से पारित हुआ निंदा प्रस्‍ताव, केंद्र सरकार को भेजा जाएगा

प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान भगवंत सिंह मान ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के राज में बार-बार हो रहे पेपर लीक के मामलों ने छात्रों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। इंसाफ मांगने वालों को अश्रु गैस के गोलों, पैलेट गनों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में पारित निंंदा प्रस्‍ताव को पंजाब सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजेगी। इसमें केंद्र को पेपर लीक के मामलों को रोकने और देश की शिक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए सख्त कदम उठाने की अपील की जाएगी।

कांग्रेस ने सदन से किया वाअआउट

प्रस्ताव पर बहस के दौरान कांग्रेस ने सदन से वाकआउट कर दिया। भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘ भारत को विश्वगुरु बनाने का दावा करने वालों ने देश भर में एक के बाद एक हो रहे पेपर लीक के मामलों को रोकने में अपनी नाकामी से शिक्षा प्रणाली का मजाक बना दिया है। पेपर लीक परीक्षार्थियों के सपनों को तोड़ देती है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि नीट परीक्षा के 22 उम्मीदवारों ने निराशा में खुदकुशी तक कर ली। जब से भाजपा सरकार ने सत्ता संभाली है, देश में 93 पेपर लीक हो चुके हैं।

भगवंत मान ने कहा- 2019 से 24 तक 65 पेपर लीक हुए

पेपर लीक से संबंधित आंकड़ों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2019 से 2024 के बीच पेपर लीक के ऐसे मामलों की संख्या 65 थी और सबसे ज्यादा पेपर लीक भाजपा के नेतृत्व वाली राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों की सरकारों में हुए। प्रधानमंत्री, जो छात्रों को परीक्षाओं में बैठने के नुस्खे बताते रहते हैं, पेपर लीक रोकने में नाकाम रहे हैं। उस प्रधानमंत्री से और क्या उम्मीद की जा सकती है जिसकी अपनी डिग्री का ही कोई पता नहीं है।’

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उन्होंने कहा, ये नेता अपने निजी राजनीतिक हितों के लिए स्कूल पाठ्यक्रम को बदल रहे हैं, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। देश के छात्रों ने प्रधानमंत्री को केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेने के लिए मजबूर कर दिया।

आंदोलन कर रहे युवाओं पर पैलेट गन का इस्‍तेमाल दुर्भाग्‍यपूर्ण

भगवंत मान ने कहा कि पूरी दुनिया में पैलेट गनों पर पाबंदी है, लेकिन केंद्र सरकार ने निर्दोष युवाओं के खिलाफ बेरहमी से इनका इस्तेमाल किया है। परीक्षाओं को निष्पक्षता से करवाने का वादा करने की बजाय प्रधानमंत्री लोगों को गुमराह करने के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का वादा कर रहे हैं। यह सिस्टम का मजाक बनाना नहीं तो और क्या है कि केंद्र सरकार परीक्षाओं के सुचारू संचालन के लिए रक्षा सेवाओं का सहयोग ले रही है।

शिक्षा प्रणाली पर उठाए सवाल

भगवंत मान ने कहा, ऐसे पेपर लीक देश की शिक्षा प्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करते हैं और इसीलिए हमारे देश की डिग्रियों की विदेशों में कोई कदर नहीं है। इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने की बजाय केंद्र सरकार उनका बचाव कर रही है। प्रधानमंत्री छात्रों को परीक्षाओं की तैयारी करना सिखाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी सरकार अधीन आने वाली संस्थाओं को कभी यह नहीं सिखाया कि पारदर्शिता, निष्पक्षता और सुरक्षा के साथ परीक्षाएं कैसे करवाई जाती हैं।

बोले – कांग्रेस का निंदा प्रस्‍ताव पर चर्चा के दौरान वाकआउट दुर्भाग्‍यपूर्ण

बहस के दौरान कांग्रेस के रवैये पर निराशा जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस को छोड़कर सदन के लगभग हर सदस्य ने निंदा प्रस्ताव का समर्थन किया। कांग्रेस ने बहस का बहिष्कार करने का रास्ता चुना। यह बहुत अफसोसजनक है कि जब देश भर के छात्र अपने भविष्य के लिए लड़ रहे हैं तो कांग्रेस बार-बार होते पेपर लीक जैसे अहम मुद्दे पर भी उनके साथ नहीं खड़ी हुई।’

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मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जब मैं विधानसभा में बोल रहा था तो विरोधी दल की सीटें खाली पड़ी थी। यह 2027 की एक झलक है। इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर बहस में हिस्सा लेने की बजाय उन्होंने कार्रवाई का बहिष्कार किया। एक तरफ उनके नेता शिक्षा से संबंधित मुद्दों पर प्रधानमंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन करते हैं और दूसरी तरफ जब उन्हें सदन में उसी मुद्दे पर बहस करने का मौका मिलता है तो वे वाकआउट कर जाते हैं।

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