सटीक समाचार, चंडीगढ़। शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Singh Badal) सोमवार को विशेष जांच दल (Punjab SIT) के समक्ष पेश हुए। एसआइटी ने उनसे करीब दो घंटे तक बहबल कलां गोलीकांड और श्रीगुरुग्रंथ साहिब से बेअदबी के मामले में पूछताछ की। सुखबीर बादल ने कहा कि एसआइटी जांच के नाम पर राजनीतिक ड्रामा चल रहा है।
चाैथी बार एसआइटी के समक्ष पेश हुए सुखबीर बादल
बता दें कि अकाली दल -भाजपा सरकार के समय 2015 में बहबल कलां में गोलीकांड हुआ था। एसआइटी ने उनसे पंजाब पुलिस इंस्टीट्यूट में पूछताछ की। उनकी एसआइटी के समक्ष यह चौथी पेशी थी। पेशी के बाद मीडिया से बातचीत में सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि एसआइटी जांच के नाम पर सारा ड्रामा चल रहा है। यह एसआइटी असली दोषियों को पकड़ने के लिए नहीं गठित की गई है, बल्कि राजनीतिक लड़ाई के लिए बनाई गई है।
कहा- इसी जगह एक दिन भगवंत मान भी पेश होंगे
सुखबीर ने कहा, 11 साल हो गए, लेकिन अभी तक एसआइटी की जांच पूरी नहीं हो पाई है। मुझे जब भी एसआइटी द्वारा बुलाया गया, मैं तय समय पर पहुंचा। दरअसल, ये लोग शिरोमणि अकाली दल (SAD) से डर गए हैं। अकाली दल एक दिन इनको सत्ता से भगाएगी। उन्होंने कहा, ‘ आप लोगों को बता देना चाहता हूं कि एक दिन यही पुलिसवाले होंगे, यही जगह होगी और भगवंत मान यहीं आएंगे। हम न तो डरें हैं और न ही इनकी परवाह करते हैं।’
सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे
सुखबीर की एसआइटी के समक्ष पेशी के दौरान बारिश के बावजूद काफी संख्या में समक्ष इंस्टीट्यूट के बाहर खड़े रहे। पेशी को लेकर शहर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और काफी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। शिअद के नेताओं का कहना था कि सुखबीर को पूछताछ के लिए बुलाना आप सरकार (AAP Government) का चुनावी स्टंट है। बेअदबी के मामले में कांग्रेस और आप सरकार के समय से राजनीति हो रही है।
यह है मामला
पंजाब में शिअद-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान जून 2015 में फरीदकोट जिले के बुर्ज जवाहर सिंह वाला गांव से श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप की चोरी हो गई। इसके बाद बरगाड़ी गांंव में 12 अक्टूबर 2015 को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूप के पावन अंग बिखरे मिले। इससे लोगों में रोष पैदा हो गया। सिख संगठनों ने कोटकपूरा और बहबल कलां में धरना-प्रदर्शन शुरू किया।
प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग में दो लोग मारे गए थे
इसके बाद 14 अक्टूबर को पुलिस ने धरना दे रहे लोगों को हटाने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हो गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग की दी। इस फायरिंग में गांव निहाल सिंह वाला के युवक गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह की मौत हो गई। इस घटना में कई लोग घायल हो गए। इसी दिन कोटकपूरा में भी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग कर दिया। इससे कई लोग घायल हो गए।
इसके बाद पूरे पंजाब में लोगों में आक्रोश फैल गया और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। आरोप है कि उस समय गृह विभाग का प्रभार संभाल रहे सुखबीर बादल के आदेश पर प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग और बलप्रयोग हुआ था।
