सटीक समाचार, पानीपत। Religion News: जैन मुनी अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज (ठाणे-2) का रविवार को पानीपत पहुंचने पर जैन समाज के लोगों ने भव्य स्वागत किया। जैनमुनी यहां गांधी मंडी स्थानक में चातुर्मास करेंगे। वह इंदौर से नंगे पैर 1000 किलोमीटर पदयात्रा करते हुए पानीपत पहुंचे हैं। उन्होंने 4 जून, 2026 को पदयात्रा शुरू की थी। दावा है कि इस पदयात्रा के दौरान उन्होंने एक दिन 70 किलोमीटर पदयात्रा की।
अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज ने किया चातुर्मास के लिए प्रवेश
पानीपत पहुंचने पर जैनमुनि की अगवानी साध्वी समता जी महाराज तथा जैन सभा प्रधान जगदीश जैन सहित बड़ी संख्या में समाज के उत्साही भक्तजनों ने की। वह यहां चार महीने प्रवास करेंगे। जैनमुनि ने यहां पहुंचने के बाद नगर विहार किया।
जैनमुनि के 2471 अभिग्रह हो चुके हैं पूरे
महाराज श्री का जन्म सन् 1973 में मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के इच्छापुर गांव में हुआ था। वह जन्म से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी होने के साथ-साथ धार्मिक संस्कारों से ओतप्रोत रहे। उन्हाेंनें वर्ष 2001 में जैन भागवती दीक्षा अंगीकार करके भगवान महावीर की साधना एवं कठोरता को अपने जीवन का आधार बनाया।
उन्होंने दीक्षा के बाद से ही बेले-बेले (दो उपवास-पारणा, फिर दो उपवास-पारणा…) की तपस्या प्रारंभ की, वह भी अभिग्रह सहित। इसके अनुरूप मन में यह संकल्प किया जाता है कि कुछ बातें पूरी होंगी तो पारणा करूंगा नहीं तो उपवास जारी रहेंगे।

अभिग्रह संख्या 1 से 13 तक रही है। अभिग्रह बहुत कठिन रहे हैं। अभिग्रह न फलने के कारण कईं बार तपस्या लगातार पांच दिन तक भी चली। डॉ. राजेश मुनि के 17 जुलाई, 2026 तक 2471 अभिग्रह पूरे हो चुके हैं। यह एक कीर्तिमान है। अभिग्रह की श्रृंखला अभी गतिमान है। बीच-बीच में वह बड़ी तपस्या भी करते रहते हैं। वह अब तक 5000 से भी अधिक दिन उपवास में रहे हैं।
उग्र विहारी संत रत्न हैं
डॉ.राजेश मुनि उग्र विहारी संत रत्न हैं। वह तपस्या के साथ भी प्रतिदिन 40-50 किलोमीटर विहार करने की क्षमता रखते हैं। इस बार तो उन्होंने इंदौर से पानीपत के बीच में एक दिन 70 किलोमीटर पदयात्रा करके अपना ही एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वह एक कुशल संथारा विशेषज्ञ हैं और संथारा विषय पर पीएचडी की है । वह अब तक 132 मुमुक्षु आत्माओं को संथारा दिलवा चुके हैं।
गोल्डन बुक वर्ल्ड रिकार्ड्स में शामिल
उनकी तपस्या को अमेरिका की संस्था ने गोल्डन बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया है। वह विभिन्न संस्थाओं द्वारा तप केसरी, उग्र विहारी, महा अभिग्रहधारी, जिनशासन गौरव, संयम शिरोमणि, वर्तमान के वर्धमान, वर्तमान के गुरुवेणी, समन्वय सेतु, नवकार मंत्र जपाचार्य, सर्व धर्म दिवाकर आदि 46 उपाधियों से अलंकृत हो चुके हैं। इंदौर में एक चौराहे का नाम अभिग्रह चौक डॉ. राजेश मुनि मार्ग रखा गया है।
भगवान महावीर स्वामी के अभिग्रह का अनुशरण किया : एपी जैन
गांधी मंडी जैन समाज के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि अभिग्रह के लिए मुनि महाराज ने स्वयं भगवान महावीर स्वामी का अनुसरण किया। लगभग 2600 वर्ष पूर्व भगवान महावीर स्वामी ने बहुत कठिन 13 अभिग्रह किए थे। इसके कारण उन्हें लगातार पांच महीने 24 दिन तक पारणा विहीन रहना पड़ा था।
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