सटीक समाचार, मुंबई। Shreyas Iyer on Vaibhav Suryavanshi: 15 साल के युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी न्यूजीलैंड में भी क्या फिर ‘वाटर ब्याय’ की भूमिका में नजर आएंगे। वैभव को लेकर टीम इंडिया के प्रबंधन व कप्तान की ‘प्लानिंग’ अब खुलकर सामने आ गई है। अय्यर ने सूर्यवंशी को लेकर न्यूजीलैंड में बहुत बड़ा बयान दिया है और एक तरह से साफ कर दिया कि फिलहाल आगे भी वैभव को टीम इंडिया में मौके नहीं मिलने वाला है। कोच गौतम गंभीर और श्रेयस अय्यर वैभव सूर्यवंशी को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।
आखिर वैभव के लिए क्या है बीसीसीआई की प्लानिंग
बता दें कि बीसीसीआई ने पहले कहा था कि वैभव पर हमारी नजर है और उसको लेकर हमारी खास प्लानिंग है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बीसीसीआइ की यही ‘प्लानिंंग’ है। अभी तक के घटनाक्रम से यह सवाल उठता है कि इस तरह की बयानबाजी क्या जरूरी है और क्या इस तरह के रवैये से इस 15 साल के खिलाड़ी का हौसला नहीं तोड़ा जा रहा है। जिस तरह अय्यर- गंभीर इस युवा बल्लेबाज को लेकर मीडिया में बोलते रहते हैं और इस पर बीसीसीआई को ‘मौन’ भी प्रश्न उठाता है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले वनडे से पूर्व श्रेयस अय्यर का बयान चर्चाओं में
न्यूजीलैंड के साथ 22 अक्टूबर को होने वाले पहले मैच से पहले श्रेयस अय्यर ने मीडिया से बातचीत में वैभव सूर्यवंंशी को प्लेइंग 11 में शामिल किए जाने की संंभावना को पूरी तरह नकार दिया। इसके साथ ही उन्होंने आगे भी उनको टीम इंडिया में मौके मिलने की संभावना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वैभव के पास टीम इंडिया में आने के लिए आगे कई साल पड़े हैं।
क्या कहा श्रेयस अय्यर ने
” वैभव को अभी वेट करना होगा। इंपोर्टेंट है कि उसके जैसा टैलेंट हमेशा ड्रेसिंग रूम के अराउंड खुश रहे। वह बहुत ही यंंग है और डेफनेटली आपको पता है उसके पास कई साल है आपच्यूनेटी (अवसर) मिलने के लिए। ऐसा नहीं है कि वह अभी सीधा टीम में वाक इन (टीम के 11 में शामिल होना) कर सकता है। क्योंकि, अभी जो हमारे ओपनर है वे कंसिसटेंट स्कोर कर (लगातार रन बन रहे हैं) हैं और उन्होंने वर्ल्ड कप भी जिताया था। एक तरह से देखा जाए तो उस इन दोरों से ओवरसीज में विकेट कैसा खेलता है और इन विकेटों को लेकर फेयर आइडिया होगा। वह आगे जब भी यहां आएगा तो बेहतर प्रिपेयर रहेगा। उस दौरान वह नए प्लेयरों को भी यहां के बारे में अपने अनुभव का लाभ भी दे सकेगा।”
टीम प्रबंधन जिसे चाहे चुन सकती है, फिर वैभव को लेकर कप्तान-कोच की सार्वजनिक बयानबाजी क्यों
टीम 11 में किसे चुनना है और किसे नहीं, यह टीम प्रबंधन खास कोच और कप्तान का ही फैसला होता है। ऐसे में जिसे टीम में रखना है रखें और जिसे टीम11 से बाहर करना है करें, लेकिन किसी एक खिलाड़ी को लेकर एक के बाद एक मीडिया में बयान देने की क्या आवययकता है। जिस तरह गंभीर एंड टीम 15 साल के इस क्रिकेटर को लेकर बयानबाजी कर रही है उसे सही करार नहीं दिया जा सकता है।
श्रेयस, तिलक वर्मा, अभिषेक वर्मा और ईशान के रहते वैभव जिम्बाव्बे में बने थे मैन ऑफ द सीरीज
श्रेयस अय्यर साल 2023 से टी-20 टीम इंडिया का हिस्सा नहीं थे और अचानक 2026 में कप्तान बना दिए गए। उनकी कप्तानी में आयरलैंड और इंग्लैंड में टीम का हाल और अब तक उनकी खुद की बल्लेबाजी उनके टीम में रहने पर भी बड़ा सवाल उठ रहे हैं। जिम्बाव्बे दौरे में खुद अय्यर, उपकप्तान तिलक वर्मा, ईशान किशन, अभिषेक शर्मा भी थे, लेकिन मैच ऑफ द सीरीज बने थे 15 साल के वैभव सूर्यवंशी।
संजू सैमसन बनाम वैभव सूर्यवंशी चर्चा उचित नहीं
संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा की बल्लेबाजी को लेकर कोई सवाल नहीं है, लेकिन पूरे मामले को संजू बनाम वैभव करना कहीं से भी उचित नहीं है। इसके साथ ही जैसे कुछ खिलाड़ियों को किसी बहाने मौके देकर टीम में शामिल किया जाता है वह भी देखने वाली बात है। नमन धीर को स्पिन गेंदबाज के तौर पर चुना गया और उनकी अच्छी बल्लेबाजी स्किल बात की गई है। वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में उनका प्रदर्शन स्थिति को साफ करता है।
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ईशान किशन दोहरा शतक बनाने के बाद भी टीम से हुए थे बाहर
जरा याद कीजिये ईशान किशन को वनडे मैच में दाेहरा शतक बनाने के बाद भी कैसे टीम 11 से लगातार बाहर रखा गया और उन्होंने इस बारे में तत्कालीन कोच से पूछा तो उन्हें टीम से ही नहीं हटा दिया गया बल्कि बीसीसीआई ने कांटैक्ट से भी बाहर कर दिया। इसके बाद उनकी लगातार उपेक्षा की जाती रही।
बीसीसीआइ के कदम पर होगी अब नजर
अब देखना है कि बीसीसीआई क्या कदम उठाता है। पसंद-नापसंद का ‘गंभीर पैमाना’ चलता है या टैलेंट के आधार पर भारतीय क्रिकेट आगे बढ़ता है। अभी तो हालत यह है कि खिलाड़ी घायल हो, अनफिट हो खासकर बॉलर, टीम इंडिया में चुन लिया जाता है, दूसरी ओर घरेलू क्रिकेट में लगातार मैच खेल रहे और बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ी (मो. शमी) को अनफिट बताकर उसके लिए टीम इंडिया के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। वास्तव में यह स्थिति भारतीय क्रिकेट के वरदान है या अभिशाप, यह फैसला बीसीसीआई को करना चाहिए और भारतीय क्रिकेट के लिए उचित रास्ता बनाना चाहिए।


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