सटीक समाचार, पानीपत। Panipat Unique Punishment: जुवेनाइल कोर्ट में एक मामले में दोषी तीन नाबालिग लड़कों को अनोखी सजा सुनाई है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड तीनों को सरकारी अस्पताल में तीन माह सामाजिक सेवा देने की सजा सुनाई गई है। इन लड़कों पर कहासुनी बीच बचाव कर रहे पड़ोसी की आंख में चाकू मारने का आरोप था। बोर्ड ने कहा कि यह फैसला सुधारात्मक और सामाजिक सरोकार को दृष्टि में रखकर सुनाया गया है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने सुनाया सुधारात्मक एवं सामाजिक सरोकार से जुड़ा फैसला
यह मामला 19 अक्टूबर 2024 का था। सिटी पुलिस थाना में दर्ज मामले के अनुसार, स्थानीय मार्केट में एक टेलर के साथ तीन लड़कों की कहासुनी हो गई थी। इस दौरान उसके पड़ोसी ने बीच बचाव किया। इस पर लड़कों ने पड़ोसी की आंख के नीचे कैंची मार दी थी और इसके बाद वे वहां से फरार हो गए।
कहासुनी में बीचबचाव करने वाले के आंख के नीचे कैंची से वार करने का आरोप
बाद में पुलिस ने तीनों लड़कों को सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ लिया। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत 115 (2) 118 (1)190,191(3),333 351 (2) और 238 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। इनमें एक लड़का 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था। उसके आने वाले समय में परीक्षाओं को ध्यान में रखते हुए यह सजा सुनाई गई है।
सजा में समाज के प्रति दायित्य का बोध कराने पर विशेष जोर
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनीत लिंबा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार ने अपने निर्णय में दोषी के व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा उसे समाज के प्रति अपने दायित्व का एहसास कराने पर विशेष जोर दिया है।
बोर्ड के समक्ष विचाराधीन मामले में तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के यह आदेश दिया गया। बोर्ड ने निर्देश दिया कि दोषी तीनों किशोरों को निर्धारित अवधि तक सरकारी अस्पताल में सामाजिक सेवा करनी होगी। इस दौरान संबंधित विभाग द्वारा उसकी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।
अपराध की पुनरावृति से रोकने संग समाज की मुख्सधारा में जोड़ना है
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने कहा कि किशोर न्याय व्यवस्था का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बच्चों को अपराध की पुनरावृत्ति से रोकते हुए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करना भी है। सरकारी अस्पताल में सेवा के माध्यम से दोषी को सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी का महत्व समझाने का प्रयास किया जाएगा।
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अस्पताल में बीमारों व घायलों की सेवा से दृष्टिकोण बदलेगा
बोर्ड ने कहा कि जो घायल या बीमार लोग सरकारी अस्पताल में अपना इलाज करवाने आते हैं उनके प्रति भी इन किशाेरों का दृष्टिकोण बदलेगा और दूसरे को चोट पहुंचाना कितना हानिकारक हो सकता है यह भी पता चल सकेगा।
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किशोर ने निर्देश का पालन नहीं किया तो दोबारा सुनाई जा सकती है सजा
बोर्ड ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सामुदायिक सेवा के दौरान दोषी की गतिविधियों की नियमित निगरानी की जाए और निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित कराया जाए। यदि इन किशोरों ने इसका पालन नहीं किया तो बोर्ड द्वारा यह अधिकार सुरक्षित रखा गया है कि दोबारा से सजा दी जा सकती है। यह निर्णय किशोर न्याय व्यवस्था में सुधार, पुनर्वास और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करने की दिशा में लिया गया है।


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