सटीक समाचार, गुवाहाटी। असम में बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित परिवारों की सहायता (Flood Relief In Assam) के लिए रिलायंस फाउंडेशन ने अपना अभियान और तेज कर दिया है। रिलायंस की अन्य कंपनियों व संस्थाओं के साथ मिलकर फाउंडेशन के स्वयंसेवक दूरदराज के बाढ़ प्रभावित क्षेत्राें में पहुंंचकर पीड़ित लोगों की मदद की है। इसके साथ ही रिलायंस फाउंडेशन ने असम के मुख्यमंत्री बाढ़ राहत कोष में 21 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है।
सीएम राहत कोष में राज्य में चलाए जा रहे राहत कार्यों से अलग होगा
रिलायंस फाउंडेशन ने कहा है कि यह राशि राज्य में पहले से चलाए जा रहे राहत कार्यों के अतिरिक्त दी जाएगी। शिवसागर और चराइदेव जिलों में फाउंडेशन की टीमें भोजन, सुरक्षित पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, अस्थायी आश्रय और पशुओं की देखभाल से जुड़े कार्यों में जुटी हैं।
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नीता अंबानी ने कहा – संकट की घड़ी में असम के बाढ़ पीड़ितों के साथ खड़े हैं
रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर एवं चेयरपर्सन नीता एम. अंबानी ने असम के बाढ़ प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए दिए संदेश में कहा, ‘आप संकट की इस घड़ी में अकेले नहीं हैं। हम आपके साथ खड़े हैं और आने वाले दिनों में भी आपके साथ बने रहेंगे। मिलकर हम जीवन को फिर से पटरी पर लाएंगे और उम्मीद को दोबारा जगाएंगे।’

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने रिलायंस फाउंडेशन का आभार जताया
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सहायता के लिए नीता अंबानी और रिलायंस फाउंडेशन का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं, अस्थायी आश्रय और पशुधन की देखभाल में सहयोग कर रही हैं।
प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्य जारी
रिलायंस की ओर से एक बयान में कहा गया है कि फाउंडेशन का लक्ष्य दोनों जिलों के कम से कम 50 हजार जरूरतमंद लोगों तक राहत और पुनर्वास सहायता पहुंचाना है। प्रभावित इलाकों में सामुदायिक रसोई के जरिए गर्म भोजन दिया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति और जल शोधन प्रणालियों को बहाल करने के साथ स्वास्थ्य केंद्रों की सफाई और उन्हें दोबारा चालू करने का काम भी किया जा रहा है।
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रिलायंस के एक अधिकारी ने बताया कि पशुओं की देखभाल के लिए वनतारा की टीमें घर-घर जाकर पशु चिकित्सा सेवाएं दे रही हैं। राहत अभियान स्थानीय प्रशासन और समुदायों के सहयोग से चलाया जा रहा है, ताकि शिविरों में रह रहे परिवार जल्द अपने घर लौट सकें। यह अभियान अभी जारी रहेगा।

