Sawan 2026 Special: यहां प्रकृति की मनाेरम छटा के बीच शिवभक्ति की तरंग, भीमाशंकर में होती है विशेष अनुभूति

पुणे के पास स्थित श्री भीमा शंकर मंदिर। (सौजन्‍य - सोशल मीडिया)
पुणे के पास स्थित श्री भीमा शंकर मंदिर। (सौजन्‍य - सोशल मीडिया)
Last Updated: 11 Aug, 2026 at 12:31 AM by Sunil Kumar Jha

नमिता झा (सटीक समाचार), मुंबई। Sawan 2026 Special: देश में भगवान शिव के 12 ज्‍योतिर्लिंग हैं और इनमें तीन महाराष्‍ट्र में स्थित हैं। महाराष्‍ट्र में ये ज्‍याेतिर्लिंग हैं- नाशिक में त्र्यंबकेश्वर, पुणे में भीमाशंकर और संभाजी नगर ( औरंगाबाद ) में घुश्मेश्वर महादेव। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के बारे में बात करते हैं। ज्‍योतिर्लिंगों में इसका छठा स्‍थान है। यहां आकर तनमन शिवभक्ति में रंग जाता है। पूरा वातावरण शिवमय लगता है।

सहयाद्रि पर्वतों के घने जंगल के बीच स्थित है भीमाशंकर ज्‍योति‍र्लिंग

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग सहयाद्रि पर्वतों के घने जंगलों के बीच स्थित है और समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 3250 किलोमीटर है। पुणे से भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दूरी 110 किलोमीटर है ।

मान्‍यता- भगवान शिव ने भीमासुर का वध किया था

मान्‍यता है कि इस ज्योतिर्लिंग का नाम कुंभकर्ण के बेटे भीमासुर का भगवान शिव ने वध किया था और इसी कारण इस शिवलिंग का नाम भीमाशंकर पड़ा। यहां के बारे में एक पौराणिक कथा है। मान्‍यता के अनुसार कथा है कि कुंभकर्ण के पुत्र भीमासुर ने कठिन तपस्या करके वरदान प्राप्त किया था। इसके बाद वह मदांध हो गया और देवताओं, ऋषियाें और शिवभक्‍तों पर अत्याचार करने लगा। उससे प्रता‍ड़ि‍त होकर देवताओं और ऋषियों ने भगवान शंकर से प्रार्थना की।

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कथा है कि महादेव इसी जगह पर प्रकट हुए और भीमसुर से उनका भयानक युद्ध हुआ। उन्‍होंंने भीमासुर का वध किया। इसके बाद देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शिव यहां ज्योतिर्लिंग रूप में विराजमान हुए। यह भी मान्‍यता है कि युद्ध के दौरान भगवान शंंकर के शरीर से यहां पसीना गिरा और उससे भीमा नदी का उद्गम हुआ। इस नदी के जल को काफी पवित्र माना जाता है। यह नदी महाराष्ट्र और कर्नाटक के कई इलाकों के लिए बेहद अहम जलस्रोत है।

मंदिर की वास्‍तुकला नागर और हमारपंथी शैली का मेल

इस मंदिर की वास्तुकला नागर और हमारपंथी शैली का खूबसूरत मेल है। माना जाता है कि वतर्मान मंदिर क़रीब 13 वीं सदी में निर्मि‍त है। कुछ समय बाद मराठा शासकों ने इसका विस्तार कराया। महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज जी ने भी इस मंदिर को संरक्षण दिया था और यहां कई सुविधाएं दी थीं। नाना फडनवीस ने यहां कई निर्माण कराया। भीमा शंकर में शिवलिंग का आकार काफी बड़ा और मोटा है, इस कारण इनको मोटेश्‍वर महादेव भी कहा जाता है।

महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज और नाना फडनवीस ने यहां कई कार्य कराए

मंदिर किसने बनवाया इस बारे में कोई प्रमाण नहीं मिलता है, लेकिन यहां समय-समय पर कई विकास कार्य करवाए गए। प्राप्‍त जानकारी के अनुसार, 180ीं शताब्‍दी में महान मराठा राजनेता नाना फडनवीस ने यहां सभा मंडप और मंदिर के भव्‍य शिखर का निर्माण कराया था। महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज ने मंदिर में पूजा व्‍यवस्‍था और संचालन के लिए सहायता प्रदान की।

मंदिर परिसर में साक्षी विनायक मंदिर , मोक्षकुंड , गुप्त भीमाशंकर , सर्वतीर्थ , कमलजा देवी मंदिर , गोरखनाथ आश्रम , हनुमान तालाब हैं। यहां अक्टूबर से फरवरी तक कभी भी आया जा सकता है। बारिश के मौसम में रास्तों में फिसलन बहुत होती है, इसलिए पूरी सावधानी बरतनी आवश्‍यक है। ये जगह धार्मिक यात्रा के साथ ही ट्रेकिंग के लिए भी मशहूर है। मानसून में पूरा इलाका बादलों और धुंध से ढक जाता है, जिससे यहां का नज़ारा और दिलकश हो जाता है।

मंदिर के पीछे गुप्‍त भीमाशंकर का रास्‍ता है

मंदिर के पीछे से ‘गुप्त भीमाशंकर’ मंदिर का रास्ता जाता है। पौराणिक मान्‍यता है कि भीमासुर का वध करने के बाद भगवान शिव यहां अदृश्य रूप में विराजमान हुए।

कमलजा देवी मंदिर: यह माता पार्वती का मंदिर है। ऐसी मान्‍यता है कि माता ने यहां भगवान शिव की मदद के लिए तपस्या की थी।

भीमाशंकर वन्यजीव अभ्यारण्य का हिस्सा है। इसके साथ ही यहां कई दुर्लभ पक्षी और औषधीय पौधे पाए जाते हैं। सावन के मास और महाशिवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। मंदिर श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह पांच बजे खुलता है और रात 9.30 बजे तक खुला रहता है।

अस्‍वीकारीकरण : इस लेख में दी गई जानकारी और कथन केवल सूचना है। इस लेख में लिखी बातों की न तो हम समर्थन करते हैं और न ही पुष्टि। ये जानकारियां पौराणिक मान्‍यताओं, जनश्रुतियों और दंतकथाओं से ली गई हैं।

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