सटीक समाचार, पानीपत। Panipat SD PG College: पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज की महिला शतरंज टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शतरंज चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया। कॉलेज टीम ने रनर अप ट्राफी पर कब्ज़ा किया। इसके साथ ही कॉलेज की दो खिलाड़ियों नवजिश और मृदुल का आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चेस चैंपियनशिप के लिए भी चयन हो गया है। इस चौंनपियनशिप का आयोजन उत्तर प्रदेश के कानपुर में होगा।
कॉलेज की महिला टीम ने चैंपियनशिप में दूसरा स्थान प्राप्त किया
कॉलेज की महिला चेस टीम ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में ओवरआल दूसरा स्थान हासिल किया। एसडी पीजी कॉलेज की टीम ने एमएन कॉलेज अमला कि टीम को 4-0, आर्य कॉलेज पानीपत की टीम को 3-1 और खालसा कॉलेज यमुनानगर को 4-0 के अंतर से हराया । कॉलेज की टीम का एसडी कॉलेज परिसर पहुंचने पर स्वागत किया। कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्षा डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो नीलम, ग्राउंड्समैन राम प्रताप आदि खिलाड़ियों को बधाई दी।
कालेज पहुंचने पर खिलाड़ियों का हुआ स्वागत
एसडी पीजी कॉलेज के प्रधान दिनेश गोयल ने कहा कि शतरंज खेलने से दिमाग की कार्यक्षमता बढ़ती है और बुद्धिमत्ता लेवल में सुधार होता है । खेल के दौरान चालों को याद रखने और एकाग्र रहने से मानसिक सतर्कता बढ़ती है जो हमारी स्मृति को मजबूत करती है । शतरंज खिलाड़ियों को दूरगामी परिणाम सोचने और योजना बनाने में निपुण बनाता है।
प्राचार्य बोले- शतरंज खेलने से एकाग्रता और तार्किक सोच तेज हाेती है
कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि शतरंज एक बेहतरीन दिमागी कसरत है और याददाश्त, एकाग्रता और तार्किक सोच को तेज करती है। यह रचनात्मकता, योजना बनाने की क्षमता और धैर्य को बढ़ाता है। इसके साथ ही मानसिक तनाव कम करने और बौद्धिक क्षमता में सुधार करने में मदद करता है। शतरंज खेलने से मस्तिष्क का दायां हिस्सा सक्रिय होता है जिससे रचनात्मक सोच विकसित होती है।
यह समाचार भी पढ़िये: पानीपत में पूर्वांचल समाज का प्रदर्शन, देर रात तक दिया धरना, वंदे भारत व गरीब रथ के स्टाप और लंंबी दूरी की ट्रेनों की मांग
उन्होंने कहा कि यह खेल तनाव को कम करने और मानसिक व्याकुलता को प्रबंधित करने में मदद करता है। दिमाग को सक्रिय रखने के कारण, यह डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों के खतरे को कम करता है। बच्चों के लिए, यह खेल गणित और विज्ञान जैसे विषयों में तार्किक क्षमता को बढ़ाकर उनका प्रदर्शन सुधारता है । शतरंज हर उम्र के लोगों के लिए लाभदायक है और यह एक मनोरंजक ‘माइंड थेरेपी’ की तरह भी काम करता है।
सभी खिलाड़ियों ने कहा कि उनकी जीत का श्रेय उनके माता-पिता, एसडी कॉलेज प्रबंधकारिणी, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और प्रो सुशीला बेनीवाल को जाता है। वे अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाप छोड़ना चाहते हैं और इसके लिए वे निरंतर अभ्यास में जुटे हुए हैं ।

