धनतेरस और दीवाली पर होगा विशेष शुभ संयोग, शुभ मुर्हुत में पूजन होगा बेहद फलदायी

Dhanteras Diwali 2026: इस बार धनतेरस और दीवाली पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं। ( फाइल फोटो सौजन्‍य सोशल मीडिया )
Dhanteras Diwali 2026: इस बार धनतेरस और दीवाली पर विशेष शुभ संयोग बन रहे हैं। ( फाइल फोटो सौजन्‍य सोशल मीडिया )
Last Updated: 3 Nov, 2026 at 07:24 PM by Sunil Kumar Jha

धनतेरस 6 और दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी

सटीक समाचार, कुरुक्षेत्र। Dhanteras 2026: दीपोत्सव का पांच दिवसीय पर्व इस वर्ष 6 नवंबर को धनतेरस के साथ शुरू होगा। इसके बाद 7 नवंबर को छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी, 8 नवंबर को दीपावली तथा 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। ज्‍योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार धनतेरस और दीवाली पर बहुत विशेष संयोग बन रहा है। ऐसे में शुभ मुहुर्त को ध्‍यान में रखकर खरीदारी और पूजन करने से विशेष फल प्राप्‍त होगा।

धनतेरस पर शुक्र का हस्त नक्षत्र में संयोग, दीपावली पर स्वाति नक्षत्र का प्रभाव

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा और खरीदारी का विशेष महत्व होता है। इसके साथ ही दीवाली पर प्रदोष काल में माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाएगी। इस बार धनतेरस पर शुक्रवार को है और इस दिन शुक्र ग्रह का हस्त नक्षत्र से जुड़ा खास संयोग है। इसके साथ ही दीपावली पर स्वाति नक्षत्र का प्रभाव ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है।

प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने से धनतेरस 6 नवंबर को

कुरुक्षेत्र के गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केंद्र के संचालक डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 11 बजकर 07 मिनट पर शुरू होगी और 7 नवंबर को सुबह 10 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में त्रयोदशी तिथि होने के कारण 6 नवंबर को धनतेरस मनाई जाएगी।

धनतेरस पर धन्वंतरि पूजन और खरीदारी का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस दिन भगवान धन्वंतरि की पूजा कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की जाती है।उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है।

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डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन यानि 6 नवंबर को शाम 6 बजकर 07 मिनट से रात 8 बजकर 03 मिनट तक लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त रहेगा। वहीं खरीदारी के लिए दोपहर 1 बजकर 31 मिनट से 3 बजकर 02 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। वृषभ लग्न में पूजन का विशेष महत्व रहेगा। धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने और यम दीपदान करने की भी परंपरा है।

यह है धनतेरस पर शुभ मुहुर्त –
खरीदारी का शुभ मुहुर्त –6 नवंबर दिन में 1.31 बजे (1.31 PM) से 3.02 बजे (3.02 PM) तक।
लक्ष्‍मी पूजन का शुभ मुहुर्त6 नवंबर शाम 6.07 बजे (6.07 PM) से रात 8.03 बजे (8.03 PM) तक।
दीपदान6 नवबंर धनतेरस पर शाम में घर के मुख्‍य दरवाजे पर दीप जलाएं और यम दीपदान करें।
7 नवंबर को छोटी दीपावली और नरक चतुर्दशी

डॉ. रामराज कौशिक के अनुसार, धनतेरस के अगले दिन 7 नवंबर को नरक चतुर्दशी यानी छोटी दीपावली मनाई जाएगी। इसे रूप चतुर्दशी और नरक चौदस भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन नरकासुर का वध कर हजारों बंदी महिलाओं को मुक्त कराया था। इस दिन प्रातःकाल अभ्यंग स्नान, तेल लगाने और शाम को दीपदान करने का विधान है। इसे बुराई पर अच्छाई की विजय और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।

दीपावली पर स्वाति नक्षत्र का विशेष संयोग विशेष

डॉ. रामराज कौशिक ने बताया कि इस बार दीपावली का पर्व रविवार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर शुरू होकर 9 नवंबर को सुबह 11 बजकर 32 मिनट तक रहेगी। प्रदोष काल में अमावस्या तिथि होने के कारण दीपावली 8 नवंबर को ही मनाई जाएगी।

उन्‍होंने बताया कि इस दिन शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 7 बजकर 55 मिनट तक लक्ष्मी-गणेश पूजन का विशेष शुभ मुहूर्त रहेगा। वृषभ के स्थिर लग्न में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार स्वाति नक्षत्र को प्रगति, व्यापार और उन्नति से संबंधित माना जाता है।

इस नक्षत्र में किए गए शुभ कार्यों को विशेष महत्व दिया जाता है। वहीं शुक्र ग्रह को सुख, वैभव, ऐश्वर्य और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। इसलिए धनतेरस और दीपावली के इन ज्योतिषीय संयोगों को विशेष दृष्टि से देखा जा रहा है।

दीपावली पर शुभ मुहुर्त और खास बातें-
कार्तिक अमावस्‍या तिथि आरंभ – 8 नवंबर- सुबह 10.51 बजे (10.51 AM)।
कार्तिक अमावस्‍या का समापन- 9 नवंबर – सुबह 11.32 बजे (11.32 AM)।
दीपावली- 8 नवंबर प्रदोषकाल में अमावस्‍या तिथि होने के कारण।
लक्ष्‍मी-गणेश पूजन विशेष महुर्त – 8 नवंबर- शाम 5.59 बजे (5.59 PM) से शाम 7.55 बजे (7.55 PM)।
प्रदोष काल – 8 नवंंबर – 5.31 बजे (5.31 PM) से रात्रि 8.09 बजे (8.09 PM) तक।
वृषभ काल (स्थिर लग्‍न)- 8 नवंबर – शाम 5.31 बजे (5.31 PM) से शाम 7.50 बजे (7.50 PM)।
निशि‍ता काल मुहुर्त – 8-9 नवंबर – रात्रि 11.39 बजे (11.39 PM – 8 नवंबर) से रात्रि 12.31 बजे (12.31 AM – 9 नवंबर) तक।
निशिता वृषभ काल (स्थिर लग्‍न)- रात 12.23 बजे (12.23 AM – 9 नवंबर) से रात 2.41 बजे (2.41 AM – 9 नवंबर) तक।
चौघड़ि‍या शुभ मुहुर्त
शुभ चौघड़िया मुहुर्त 8 नवंबर शाम 5.31 बजे (5.31 PM) से शाम 7.09 बजे (7.09 PM) तक।
अमृत चौघड़ि‍या8 नवंबर शाम 7.09 बजे (7.09 PM) से रात्रि 8.47 बजे (8.47 PM) तक।
चर चौघड़ि‍या8 नवंंंबरररात्रि 8.47 बजे (8.47 PM) से रात्रि 10.25 बजे (10.25 P
9 नवंबर को सोमवती अमावस्या
  • दीपावली के अगले दिन सोमवार, 9 नवंबर को सोमवती अमावस्या का संयोग रहेगा। अमावस्या तिथि सुबह 11 बजकर 32 मिनट तक रहेगी।
  • सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है।
  • सोमवती अमावस्‍या पर पवित्र नदियों में स्नान, दान, पितरों का तर्पण और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है।
  • सोमवती अमवस्‍या को महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना से पूजा-अर्चना करती हैं।

(अस्‍वीकरण: इस आलेख में दी गई जानकारी ज्‍योतिषीय आकलन और धार्मिक मान्‍यताओं व जनश्रुतियों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी सिर्फ सूचना के लिए है। इससे सटीक समाचार या इसके आलेख के लेखक की किसी तरह की सहमति‍ या असहमति नहीं है। इसमें दिए गए मुहुर्त और उपाय ज्‍योतिषीय आकलन, धार्मि‍क व लोक मान्‍याताओं पर आधारित है। इसको लेकर पाठक स्‍वयं उचित तरीके से पुष्टि कर लें।)

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