डॉ. राजेश मुनि श्री संभावनाथ जैन मंंदिर पधारे, ध्‍यान व नवकार मंत्र जाप से भक्तिमय हुआ माहौल

पानीपत गांधी मंडी स्‍थि‍त जैन स्‍थानक में चातुर्मास कर रहे महा अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी मंगलवार को श्री संभावनाथ जैन मंदिर पधारे। इस अवसर पर उनका भव्‍य स्‍वागत किया गया। (फोटो सौजन्‍य गांधी मंडी जैन सभा)
पानीपत गांधी मंडी स्‍थि‍त जैन स्‍थानक में चातुर्मास कर रहे महा अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी मंगलवार को श्री संभावनाथ जैन मंदिर पधारे। इस अवसर पर उनका भव्‍य स्‍वागत किया गया। (फोटो सौजन्‍य गांधी मंडी जैन सभा)
Published: 20 Oct, 2026 at 09:53 PM

सटीक समाचार, पानीपत। Jain Sthanak: महा अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज ठाणे-4 का हुड्डा सेक्टर 11 के श्री संभावनाथ जैन मंदिर पधारणा हुआ। उनका मंदिर पहुंचेन पर भव्‍य स्‍वागत किया गया। मुनिश्री ने मंदिर में बैठकर ध्यान किया। इस दौरान सभा के स्वाध्याय कक्ष में नवकार महामंत्र का जाप चला। इस दौरान पूरा माहौल श्रद्धा और भक्तिमय हो गया।

मुनि श्री का हुआ भव्‍य स्‍वागत

मुनिश्री पानीपत के आत्मानंद जैन सभा के पदाधिकारियों के आग्रह पर पहुंंचे। मुनि श्री के आने के बाद आत्मानंद सभा महामंत्री अरुण जैन ने मुनि श्री का आभार व्यक्त किया और उनका उच्च भावों से स्वागत किया। महामंत्री अरुण जैन की धर्मपत्नी निधि जैन आदि ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। अंजलि जैन आदि ने भजन प्रस्‍तुत किया।

डॉ. ईश्‍वर जैन ने कार्यक्रम को जैन धर्म की दो धाराओं का मधुर मिलन बताया

बता दें कि महाअभिग्रहधारी डॉ.राजेश मुनि जी महाराज अन्‍य संंत और साध्वियों के साथ पानीपत के गांधी मंडी जैनस्‍थानक में चातुर्मास कर रहे हैं। कार्यक्रम में मंडी जैन सभा और समाज की ओर से महामंत्री डॉ. ईश्वर जैन ने इस अवसर को जैन धर्म के दो धाराओं का‌ एक मधुर मिलन कहा। मंत्री राजेंद्र जैन ने भी उद्बोधन दिया। मुनिश्री ने मज़ाकिया लहज़े में कहा कि पहले मुझे 10 तारीख़ को आना था चलो आज दसवीं तिथि को आ गया हूं।

कार्यक्रम में मंगलपाठ भी हुआ

इस अवसर पर पहले महासाध्वी श्री समता जी महाराज एवं साध्वी श्री भविका जी महाराज ने संयुक्त तथा बाद में सेवा भावी श्री राजेंद्र मुनि जी महाराज ने मंगल पाठ की कृपा की। आख़िर में डॉ. राजेश मुनि जी महाराज ने दशहरे की महामांगलिक से सबको धन्य कर दिया।

जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि आराधना पद्धति की थोड़ी-थोड़ी भिन्नता के आधार पर जैन धर्म की चार मुख्य धाराएं हैं – दिगंबर, श्वेतांबर मूर्ति पूजक, श्वेतांबर स्थानकवासी व तेरापंथी, लेकिन इनकी मूल बातें एक ही हैं। मुनि श्री के श्वेतांबर स्थानकवासी संत होने पर भी श्वेतांबर मंदिर में आने से यह सिद्ध हुआ है कि हम पहले जैन हैं, बाद में कुछ और।

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कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सुबह आने लगे थे श्रद्धालु

इस कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के साथ जैन संत और साध्वियां ने प्रातः 6:30 बजे गांधी मंडी से प्रारंभ किया। बीच में जोंधन वाले ईश्वर जैन व राजाखेड़ी वाले सुभाष चंद्र जैन के निवास पर पड़ाव रखते हुए 7:30 बजे स्वाध्याय भवन में प्रवेश किया। यहां के महामंत्री अरुण जैन, मंत्री सुमित सुराणा और अन्य पदाधिकारियों ने मुनि श्री की बड़ी भाव भक्ति पूर्ण अगवानी की।

कार्यक्रम संपन्न होने के बाद महामंत्री श्री अरुण जैन परिवार की ओर से उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के लिए गौतम प्रसादी के सुंदर व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन, प्रधान जगदीश जैन, वीरेंद्र जैन, आत्मानंद जैन सभा की ओर से जगदीश जैन, प्रमोद जैन, वरुण जैन, सौरभ जैन, सुव्रत जैन, राजेंद्र जैन, कीर्ति जैन, आदिति जैन आदि श्रद्धालु जन मौजूद रहे।



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