सटीक समाचार, पानीपत। Panipat New Update: शरीर के साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी जरूरी है। इस संबंध में शिक्षकों और विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता प्रशिक्षण कार्यक्रम (Mental Health Awareness and Well-being Training Programme) का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम में विशेषज्ञ वक्ता के रूप में पानीपत के देशबंधु गुप्ता राजकीय महाविद्यालय की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुनीता चांद ने विद्यार्थियों और शिक्षण-गैरशिक्षण कर्मियों को प्रशिक्षण दिया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्ति के समग्र व्यक्तित्व, शैक्षणिक प्रदर्शन, सामाजिक संबंधों तथा जीवन की गुणवत्ता से जोड़ा।
डॉ. सुनीता चांद ने कहा कि आज के दौर में मानसिक स्वास्थ्य को उतना ही महत्व देना चाहिए, जितना शारीरिक स्वास्थ्य को दिया जाता है। विशेष रूप से युवाओं एवं विद्यार्थियों के संदर्भ में मानसिक स्वास्थ्य को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यार्थी जीवन में शैक्षणिक दबाव, भविष्य की चिंता, पारिवारिक अपेक्षाएं, सामाजिक संबंध, भावनात्मक उतार-चढ़ाव और करियर से संबंधित तनाव जैसी अनेक परिस्थितियां सामने आती हैं।

उन्होंने आत्महत्या की प्रवृति विषय पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि आंकड़ों के अनुसार युवा आयु वर्ग में आत्महत्या की घटनाओं को लेकर विशेष चिंता की आवश्यकता है। किसी विद्यार्थी द्वारा स्वयं को नुकसान पहुंचाने अथवा आत्महत्या से संबंधित बात करना कभी भी केवल मजाक या ध्यान आकर्षित करने का प्रयास मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में तत्काल उसके अभिभावकों, महाविद्यालय के प्राचार्य अथवा संबंधित जिम्मेदार व्यक्ति को सूचित कर विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
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उन्होंने Mental Health Continuum के माध्यम से समझाया कि मानसिक स्वास्थ्य को केवल ‘स्वस्थ’ अथवा ‘बीमार’ के दो वर्गों में नहीं बांटा जा सकता। व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों में अलग-अलग अवस्थाओं से गुजर सकता है। उन्होंने इसके प्रमुख चरणों को Thriving, Coping, Struggling, In Distress और In Crisis के रूप में समझाया।
विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने पर जोर
डॉ. सुनीता चांद ने बताया कि विद्यार्थियों की समस्याओं को केवल एक कारण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। इसमें Biological, Psychological और Social तीनों पहलुओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। जैविक स्तर पर स्वास्थ्य, नींद, हार्मोनल परिवर्तन अथवा अन्य शारीरिक परिस्थितियां प्रभाव डाल सकती हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को विद्यार्थी की परेशानी को केवल ‘पढ़ाई में मन नहीं लग रहा’ या ‘अनुशासन की समस्या’ मानने के बजाय उसके पीछे छिपे कारणों को समझने का प्रयास करना चाहिए।
Warning Signs की पहचान पर जोर
प्रशिक्षण में “Warning Signs – What to Look For” विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों में मानसिक परेशानी के संभावित संकेतों को पहचानने के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि ये संकेत Academic, Emotional, Behavioural और Verbal स्तर पर सामने आ सकते हैं। अचानक शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट, पढ़ाई में रुचि कम होना अथवा कक्षाओं से दूरी बनाना Academic संकेत हो सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक First Aid : Look, Listen, Link
डॉ. सुनीता चांद ने संकट की स्थिति में Psychological First Aid के तीन महत्वपूर्ण चरणों Look, Listen और Link को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया। Look का अर्थ है व्यक्ति और उसके आसपास की परिस्थितियों का निरीक्षण करना तथा यह समझना कि वह तत्काल संकट में तो नहीं है। Listen का अर्थ है व्यक्ति की बात को धैर्यपूर्वक और बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनना तथा उसकी भावनाओं को समझना।
उन्होंने कहा कि Link का अर्थ है जरूरत पड़ने पर व्यक्ति को उचित अभिभावक, शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, चिकित्सक अथवा मानसिक स्वास्थ्य सेवा से जोड़ना तथा आगे भी उसका follow-up सुनिश्चित करना।
आवश्यकता पड़ने पर सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी
डॉ. चांद ने बताया कि आत्महत्या अथवा गंभीर मानसिक संकट की स्थिति में विशेषज्ञ सहायता लेना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि पानीपत में उपलब्ध सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं तथा मनोवैज्ञानिक सहायता से संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त Tele-MANAS के टोल-फ्री नंबर 14416 पर मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए संपर्क किया जा सकता है। Tele-MANAS सेवा 24×7 उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि तत्काल चिकित्सा आपातस्थिति में 108 जैसी आपातकालीन सेवा का उपयोग किया जा सकता है। पानीपत जिला प्रशासन की आधिकारिक हेल्पलाइन सूची में 108 को Emergency & Management Disaster Services के अंतर्गत तथा 102 को Ambulance Control Room (Medical Help) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
इस अवसर पर एसडी पीजी कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से संभव नहीं है, बल्कि उनके शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी समान रूप से आवश्यक है। उ इस अवसर पर कॉलेज के सभी शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारी उपस्थित रहे|
