सटीक समाचार, धूरी। Lal Dora Land: पंजाब में लाल लकीर यानि लाल डोरा के अंदर की जमीन पर बने मकानों में रहनेवाले लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है। उनका लंबे अरसे का इंतजार खत्म हो गया है और ऐसे मकानों का मालिकाना हक मिलना शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने धुरी में एक कार्यक्रम में ‘मेरा मकान मेरे नाम’ योजना के तहत लाल डोरे डोरा के अंदर मकानों के मालिकाना हक का सर्टिफिकेट लोगों को सौंपा।
मुख्यमंत्री ने ‘लाल लकीर’ के अंदर बने मकानों के मालिकाना हक प्रमाण पत्र दिए
समारोह में भगवंत मान ने इसको ऐसी प्रक्रिया की शुरुआत बताया, जो लोगों को कानूनी रूप से दर्ज मालिकाना हक, सीमांकन के नक्शे और बैंक ऋण की सुविधा उपलब्ध करवाएगी। उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे अधिक लाभ गरीबों, दलितों और भूमिहीन परिवारों को मिलेगा, जिनके मकान पहले सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं थे।

400व गांवों में संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी
उन्होंने कहा कि इससे सही नक्शों और राजस्व रिकॉर्ड से लंबे समय से चले आ रहे संपत्ति संबंधी विवादों को निपटाने में भी मदद मिलेगी। राज्य ने पंजाब को लाल लकीर से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जल्द ही लगभग 4,000 गांवों में संपत्तियों की रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
कहा- पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में एतिहासिक पहल
भगवंत सिंह मान ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर पोस्ट में कहा, ‘धूरी रैली के भारी जनसमूह ने साबित कर दिया है कि हमारे कामों की गूंज पंजाब के घर-घर में सुनाई दे रही है। परिवारवाद की राजनीति खत्म करके हमने पंजाब को ‘लाल लकीर’ से मुक्त करने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। उन्होंने कहा कि लगभग 4,000 गांवों को जल्द ही संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्रियां मिलेंगी। धूरी को 47 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट तोहफे के रूप में दिया गया है।’
योजना का मुख्य उद्देश्य योग्य परिवारों को उनके घर की दस्तावेजी मान्यता देना
सभा में मुख्यमंत्री मान ने कहा कि ‘मेरा घर मेरे नाम’ योजना का मुख्य उद्देश्य हर योग्य परिवार को उसके घर का स्पष्ट मालिकाना हक और दस्तावेजी मान्यता देना है। हमारा संकल्प है कि हर योग्य परिवार का घर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो और उसे मालिकाना हक की पुष्टि करने वाला दस्तावेज मिले। यह प्रयास लोगों के अधिकारों, स्वाभिमान और भविष्य की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
ड्रोन सर्वेक्षण और आधुनिक तकनीक का हो रहा इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘इस योजना के तहत संपत्तियों की निशानदेही और नक्शे तैयार करने के लिए ड्रोन सर्वेक्षण और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वेक्षण के माध्यम से घरों की स्थिति और सीमाओं की पहचान की जा रही है तथा स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।’
प्रॉपर्टी कार्ड में गलती होने पर अधिकारियों को तुरंत बताएं
भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘ मैं सभी लाभार्थियों से अपील करता हूं कि वे अपने प्रॉपर्टी कार्ड पर दर्ज नाम, घर के विवरण और अन्य जानकारी की ध्यानपूर्वक जांच करें। किसी भी गलती या अस्पष्टता की स्थिति में उन्हें यह मामला संबंधित अधिकारियों के ध्यान में लाना चाहिए।’
पहले चरण में राज्य में 2295 गांवों में बांटे जाएंगे प्रॉपर्टी कार्ड
इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पहले चरण में पंजाब भर के 2295 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड वितरित करने का प्रस्ताव है। इनमें संगरूर जिले के 221 गांव शामिल हैं। दूसरे चरण में पंजाब भर के 1,668 गांवों में प्रॉपर्टी कार्ड बांटे जाएंगे। तीसरा चरण नवंबर में और चौथा दिसंबर में शुरू होगा।
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भगवंत मान ने कहा- हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकी से नहीं डरने वाले
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘‘हम केंद्रीय एजेंसियों की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हमारा एकमात्र उद्देश्य पंजाब की निस्वार्थ सेवा करना है और पंजाबी किसी का भी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे।’
प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करने की यह है प्रक्रिया
- इस प्रक्रिया के तहत अधिसूचित आबादी क्षेत्र के प्रत्येक घर और प्लॉट का सर्वेक्षण और मैपिंग आधुनिक तकनीक के माध्यम से की जाती है, जिसमें ड्रोन मैपिंग भी शामिल है।
- मालिक की पहचान पटवारी या सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा गांव स्तरीय समिति की मौजूदगी में घर-घर जाकर की जाती है।
- इसके बाद ड्राफ्ट नक्शा और स्वामित्व संबंधी विवरण गांव में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाते हैं और पंचायत के साथ साझा किए जाते हैं।
- रिकॉर्ड को अंतिम रूप देने से पहले सुधारों की मांग करने के लिए मालिकों को पुष्टि के लिए व्हाट्सऐप पर उनके विवरण प्राप्त होते हैं। यह पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया परिवारों को अधिकारों के अंतिम रिकॉर्ड का हिस्सा बनने से पहले अपने स्वामित्व संबंधी विवरणों की जांच करने का अवसर देती है।
- एक बार अंतिम रूप दिए जाने के बाद स्वामित्व अधिकारों के रिकॉर्ड को औपचारिक रूप से प्रमाणित किया जाता है और इससे प्रॉपर्टी कार्ड तैयार किया जाता है।
- कार्ड में ऑनलाइन सत्यापन के लिए सर्वेक्षण यूनिट नंबर, जीपीएस लोकेशन, ड्रोन मैप और क्यूआर कोड होता है, जिससे परिवार को उसकी संपत्ति का एक दस्तावेजी और प्रमाणित रिकॉर्ड मिलता है।
इस कार्ड से ये लाभ मिलेंगे –
- यह विशेष रूप से गरीब और अनुसूचित जाति परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनके पास आबादी से बाहर कोई जमीन नहीं है और जिनके लिए घर ही उनकी एकमात्र संपत्ति हो सकती है।
- यह औपचारिक मान्यता स्वामित्व की अधिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है, संपत्ति की सीमाओं को दुरुस्त करने और विवादों को कम करने में मदद कर सकती है। जबकि संपत्ति को कारोबार, कृषि, शिक्षा या स्वास्थ्य के लिए बैंक ऋण लेने के लिए सिक्योरिटी के रूप में भी दिया जा सकता है।
- यह रिकॉर्ड पंजीकरण, हस्तांतरण और विरासत संबंधी दस्तावेजों में भी मददगार साबित हो सकता है, जिसमें प्रत्येक सह-स्वामी का हिस्सा दर्ज किया जाता है।
- ग्राम पंचायतों को गांव के विकास की योजना बनाने के लिए घरों, सड़कों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों के सही नक्शे मिल सकेंगे और प्रशासन को डिजिटाइज्ड तथा सटीक गांव के रिकॉर्ड प्राप्त होंगे।

