New Update On Blackbucks: 20 काले किरणों को मिला कच्‍छ के बन्‍नी में अपना परिवेश, वनतारा के सहयोग से संरक्षण के लिए बड़ा कदम

गुजरात के कच्‍छ में काले हिरणों को बन्‍नी क्षेत्र में उनके प्राकृतिक परिवेश में छोड़ा गया। (फोटो सौजन्‍य रिलायंस मीडिया)
गुजरात के कच्‍छ में काले हिरणों को बन्‍नी क्षेत्र में उनके प्राकृतिक परिवेश में छोड़ा गया। (फोटो सौजन्‍य रिलायंस मीडिया)
Published: 17 Aug, 2026 at 06:00 AM

सटीक समाचार, जामनगर/कच्छ। New Update on Blackbucks: रिलायंस के वनतारा और गुजरात सरकार के वन विभाग ने काले हिरणों (Blackbucks) के संंरक्षण और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है। उनको सुरक्षित और अपना प्राकृतिक परिवेश देने की मुहिम चलाई गई है। इसके तहत 20 काले हिरणों को कच्‍छ के बन्‍नी क्षेत्र में प्राकृतिक वातावरण वाले घास के मैदानों में छोड़ा गया।

वनतारा के सहयोग से बन्नी में 20 काले हिरणों को घास के मैदानों में छोड़ा गया

गुजरात वन विभाग ने रिलायंस के वनतारा के ग्रीन्स जूलॉजिकल रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर (GZRRC) के तकनीकी सहयोग से कच्छ के बन्नी इलाके में इन काले हिरणों को घास के मैदानों में छोड़ा। यह कदम क्षेत्र में स्थानीय वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने और बन्नी के प्राकृतिक पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पांच नर और 15 मादा काले हिरणों का पुनर्वास

इन 20 काले हिरणों में पांच नर और 15 मादा हैं। इन्हें जामनगर स्थित वनतारा से बन्नी लाया गया। गुजरात के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) से जरूरी मंजूरी के बाद यह स्थानांतरण किया गया। इससे पहले सभी हिरणों की स्वास्थ्य जांच सहित क्वारंटीन और सुरक्षित परिवहन समेत जरूरी प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

बन्‍नी क्षेत्र में जीवों के प्राकृतिक संतुलन को बेहतर करने की कोशिश

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ 20 काले हिरणों को बन्नी में छोड़ना नहीं है। इसके जरिए इलाके में स्थानीय शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाने और प्राकृतिक संतुलन को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। काले हिरणों की संख्या बढ़ने से दूसरे वन्यजीवों के लिए भी प्राकृतिक भोजन और रहने का बेहतर माहौल तैयार होगा।

बन्‍नी इलाके में काले हिरण के अलावा चिंकारा, नील गाय और जंगली सूअर भी हैं

बन्नी का इलाका काफी बड़ा है और यहां बड़ी संख्या में पशुपालक समुदाय रहते हैं। इसके अलावा यहां काले हिरण, चिंकारा, नीलगाय और जंगली सूअर जैसे कई स्‍थानीय वन्यजीव भी पाए जाते हैं। इन जानवरों की संख्या बढ़ाने के साथ उनके प्राकृतिक रहने के स्थान को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

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गुजरात के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. जयपाल सिंह (आइएफएस) ने कहा कि स्थानीय वन्यजीवों को दोबारा उनके प्राकृतिक वातावरण में लाना स्वस्थ पर्यावरण के लिए बहुत जरूरी है।

वनतारा के स्पेशल डायरेक्टर,(कंप्लायंस एंड ड्यू डिलिजेंस) अजीत कुलकर्णी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर इससे बेहतर योगदान नहीं हो सकता कि हम ऐसा भविष्य बनाने में मदद करें, जहां भारत के स्थानीय वन्यजीव अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सकें। बन्नी के संरक्षण के लिए गुजरात वन विभाग और सरकार के साथ काम करना हमारे लिए सम्मान की बात है।

क्‍या है यह पूरा कार्यक्रम?

  • बन्नी में काले हिरणों को छोड़ने की यह पहल गुजरात में स्थानीय शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या बढ़ाने के बड़े कार्यक्रम का हिस्सा है।
  • केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गुजरात में 500 काले हिरणों और 100 चिंकारों को अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर बसाने की मंजूरी दी है।
  • इस कार्यक्रम का एक हिस्सा प्रस्तावित चीता पुनर्वास योजना के तहत वन्यजीवों के लिए भोजन की उपलब्धता बढ़ाने से जुड़ा है।
  • बन्नी में काले हिरणों को बसाने का मुख्य उद्देश्य इस इलाके में पहले से पाए जाने वाले वन्यजीवों की संख्या को बढ़ाना है।

कैसे चल रहा है यह कार्यक्रम ?

  • बन्नी वन विभाग ने इस पूरे कार्यक्रम में वनतारा से तकनीकी मदद मांगी है।
  • इसमें विशेष वाहन, पोर्टेबल बाड़े, पशु चिकित्सकों की सहायता और वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की तकनीकी मदद शामिल है।
  • गुजरात वन विभाग और वनतारा पहले भी वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में साथ काम कर चुके हैं।
  • मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक की मंजूरी के बाद वनतारा ने बारडा वन्यजीव अभयारण्य में करीब 80 चीतल हिरणों को दोबारा प्राकृतिक वातावरण में बसाने में भी वन विभाग की मदद की है।
  • बन्नी में काले हिरणों की वापसी इस बात का उदाहरण है कि वन्यजीवों को बचाने के साथ-साथ उनके प्राकृतिक स्थान को सुरक्षित रखना भी जरूरी है।

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