सटीक समाचार, पानीपत। Jain Muni New Maha Vrat: यहां गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज साहब के आठवें निर्जल उपवास के उपलक्ष में ‘तप अनुमोदना दिवस’ का आयोजन किया गया। श्री एस. एस. जैन सभा (रजि.) के तत्वावधान में इसे बड़े श्रद्धा सेवा भक्ति तथा त्याग-संकल्प के साथ आयोजित किया गया। हरियाणा, खासकर पानीपत में यह पहली बार हुआ है कि किसी संत ने निर्जल उपवास की अठाई की हो।
आठ लोगों ने आजीवन पचक्खान ग्रहण किए
इस अवसर पर सेवाभावी श्री राजेंद्र मुनि जी महाराज, महासाध्वी श्री समता जी महाराज, साध्वी श्री भविका जी महाराज का सानिध्य रहा। इस त्यागपूर्ण वातावरण में कम से कम आठ-आठ नए लोगों ने आजीवन जमीकंद, कच्चे पानी व रात्रि भोजन के त्याग, रोजाना सामायिक करने के पचक्खान ग्रहण किए। आठ ही भक्तजनों ने एकासनों के मासखमण करने का नियम भी लिया। कुछ अन्य बातों को भी और जोड़कर, लक्ष्य इन सभी को 25-25 करने का है।
अभिग्रहधारी मुनिराज ने इस अवसर पर विनम्रता का परिचय देते हुए अपने आठवें उपवास का पचक्खान अग्रवाल मंडी में विराजित दृढ़संयमी श्री मनोज मुनि जी महाराज से लिया। उल्लेखनीय बात यह भी रही कि तीन दिन के उपवास के पश्चात ये हर दिन अभिग्रह भी निश्चित करते रहे । ये अभिग्रह फलीभूत भी होते रहे तथापि वह अपनी तपस्या को हर दिन बढ़ाते रहे और आज आठवें दिन तक ले आए।

कल को अभिग्रह जप एवं अभिग्रह फलने पर मर्यादा के अनुसार पारणे का पुण्य लाभ चाचा-भतीजा डॉ. रामनिवास जैन व प्रवीण जैन को प्राप्त हुआ है। इसके लिए उन्होंने गांधी मंडी जैन समाज के लिए 1.21 लाख की सहयोग राशि घोषित की है। डॉ. रामनिवास जैन हरियाणा जैन कांफ्रेंस के अध्यक्ष हैं और प्रवीण जैन गांधी मंडी जैन सभा के महामंत्री डॉ. ईश्वर जैन के सुपुत्र हैं।
डॉ. राजेश मुनि जी महाराज 27 साल की आयु में दीक्षित हो गए थे
अभिग्रहधारी जी महाराज का परिचय महासाध्वी श्री समता जी महाराज ने दिया। उन्होंने बताया कि इनका जन्म एक बहुत ही धार्मिक, संस्कारी परिवार में हुआ । इस बात का अंदाजा इस बात से लग जाएगा कि इन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में चौविहार अर्थात रात्रिकाल कुछ भी खाने-पीने का त्याग प्रारंभ कर दिया था।

महासाध्वी श्री समता जी महाराज ने बताया कि अभिग्रहधारी जी महाराज ने 15 वर्ष की आयु में कच्ची-पक्की हरी अर्थात फल- सब्जी की मर्यादा कर ली थी। स्कूल, कॉलेज में पढ़ते हुए वर्षी-तप अर्थात सालों-साल एक दिन उपवास एक दिन पारणा करते रहे थे, बीच-बीच में बड़ी तपस्याओं के साथ।
उन्होंंने बताया कि संत मुनिराज का संपर्क इन्हें बहुत अच्छा भाता था और ये स्वयं संत बनने के लिए लालायित रहते थे। 8 वर्ष की आयु में इनके सिर से पिता का साया उठ गया था। उनकी माताजी व बाबा जी उनकी धर्म में रुचि की गहराई को समझते थे लेकिन उन्होंने इन्हें जैन भागवती दीक्षा लेने की इज़ाजत नहीं दी थी।
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उन्होंने बताया कि ऐसा संयोग बना की मध्य प्रदेश के बड़वाह में 7 फरवरी 2001 को 8 दीक्षाएं होने जा रही थी। मज़ाक मज़ाक में कुछ लोगों ने इन पर कटाक्ष कर दिया कि जा तू भी दीक्षा ले ले। तब इन्होंने दीक्षा लेने की ठान ली, ठीक दीक्षा वाले दिन ही गुरु भगवंतों के सामने प्रस्तुत हो गए और उनके वैराग्य की गहराई को समझते हुए पारिवारिक जनों को भी स्वीकृति देनी ही पड़ी। इस प्रकार 27 वर्ष की आयु में ये जैन संत के रूप में दीक्षित हो गए।

गांधी मंडी जैन सभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि दीक्षा के समय डॉ. राजेश मुनि जी महाराज एमए, एमएससी थे। उनकाे जैन धर्म का गहरा अध्ययन था तथा पहले भी स्वाध्यायी के रूप में प्रवचन आदि करते रहे थे। इन्होंने दीक्षा लेते ही कठोरतम साधना कर दी। अभिग्रह के साथ बेले-बेले पारणा प्रारंभ कर दिया।
एक दिन में 72 किलोमीटर नंगे पांव पद विहार कर लेते हैं
डॉ. जैन ने बताया कि डा. राजेश मुनि जी महाराज तपस्या में भी एक दिन में 72 किलोमीटर तक का नंगे पांव पद विहार कर चुके हैं, 40-50 किलोमीटर की पांव यात्रा तो उनके लिए आम बात है। इन्होंने लगभग 1000 संथारों का अध्ययन करके 3000 पृष्ठों की थीसिस लिखकर पीएचडी की डिग्री प्राप्त की, डॉक्टर कहलाने लगे। वह स्वयं 136 चारित्रात्माओं को संथारें दिला चुके हैं। ये 2490 अभिग्रह के साथ 5000 से अधिक दिन उपवास में रहे हैं।

उन्होंने बताया कि विभिन्न संस्थाओं ने इन्हें लगभग 46 अलंकरणों से सम्मानित किया है। इंदौर में एक चौक का नाम अभिग्रह चौक तथा वहां से एक मार्ग को डॉ. राजेंद्र मुनि मार्ग रखा गया है। इनकी अलौकिकता के आधार पर अमेरिका की एक प्रतिष्ठित संस्था ‘गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने इन्हें सम्माननीय स्थान दिया है।
इस पावन अवसर पर बहुत से भक्तों ने समूह में या अकेले-अकेले भजनों के माध्यम से गुरु भगवंत के पावन चरणों में अपने-अपने उज्जवल भाव-पुष्प प्रस्तुत किए। डॉ. ईश्वर जैन ने कहा, ‘मेरे गुरुवर ने की निर्जल अठाई, बधाई-बधाई, लाखों-लाख बधाई।’
इस मौके पर भगत महावीर जैन, प्रधान जगदीश जैन, विरेंद्र जैन, सुशील जैन, कालू जैन, किरण जैन, सुलोचना जैन, सरिता जैन आदि आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु जन मौजूद रहे।


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