Gardening: सुदर्शन प्‍लांंट रूप और गुण दोनों में अद्भूत, बढ़ाता है बगीचे की रौनक

Sudarshan Plant: सुदर्शन प्‍लांट बेहद सुंदर और गुणों से भरपूर होता है। यह औषधीय पौधा बगीचे की शोभा में नया निखार ला देता है! (फोटो सटीक समाचार)
Sudarshan Plant: सुदर्शन प्‍लांट बेहद सुंदर और गुणों से भरपूर होता है। यह औषधीय पौधा बगीचे की शोभा में नया निखार ला देता है! (फोटो सटीक समाचार)
Last Updated: 20 Oct, 2026 at 03:08 AM by Sunil Kumar Jha

नमिता झा (सटीक समाचार), मुंंबई। Gardening Sudarshan Plant: पौधाें की दुनिया बेहद खूबसूरत होती है और उतनी ही आनंददायक है इनकी बागबानी की आदत। सुंदर फूल-पौधे हमें बढ़िया अहसास ही नहीं देते वरन् हमारे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए भी काफी उपयोगी होते हैं। इन पौधों में ही शामिल है सुदर्शन। इसके औषधीय गुणों के कारण इसे सुखदर्शन भी कहा जाता है। इसका फूल मनोहर और हल्‍का मधुर सुगंध वाला होता है।

औषधीय गुणों से परिपूर्ण होता है सुदर्शन पौधा

सुदर्शन के पौधे औषधीय गुणों से परिपूर्ण होते हैं। इनका इस्‍तेमाल आयुर्वेदिक औषधि बनाने में होता है। इस पौधे में सामान्‍यत: मार्च से जुलाई के मध्‍य फूल ख‍िलते हैं। आयुर्वे‍दिक औषधि बनाने में इसके जड़, तना, पत्‍ते, फूल और बीज का इस्‍तेमाल होता है।

यह पौधा होता है विषाक्‍त, औषधि के रूप में बाह्य उपयोग ही करें

यह पौधा काफी विषाक्‍त होता है, अतएव इसका बाह्य उपयोग ही होता है। जहरीला होने के कारण इसके इस्‍तेमाल में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है। इसके पत्‍ते का रस उपयोग पारंपरिक रूप से कान के दर्द से राहत के लिए किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग बिना चिकित्‍सीय सलाह या निगरानी में कतई नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही इसके कंद का उपयोग गठिया और सूजन से राहत पाने के लिए भी बाहरी प्रयोग में किया जाता है। इसके लिए चिकित्‍सक की सलाह और निगरानी आवश्‍यक रूप से होनी चाहिए।

इस पौधे के यह हैं नाम –
भाषा नाम
हिंदीसुदर्शन , सुख दर्शन, नागदौन ।
संस्कृतसुदर्शना , चक्रांगी , मधुपर्णिका ।
मराठी नागदौन, गदंभिकांदा, गोलकमदो।
वैज्ञानिक नामक्रिनम लैटिफोलियम (Crinum Latifolium)।
अंग्रेजी नामवाइड-लीव्ड क्रिनम लिली’ (Wide-leaved crinum lily) मिल्क एंड वाइन लिली (Milk and wine lily)।

इस प्‍लांट का आकार, इसके पत्‍ते और फूल कैसे होते हैं ?

  • ये प्लांट जमीन के अंदर बड़ा गोल / अंडाकार कंंद बनाता है। इसके लंबे और चौड़े हरे पत्ते निकलते हैं। पौधा अमूमन 2 से 3 फीट तक ऊंचा हो सकता है और इसकी पत्तियां 2 से 4 फीट तक लंबी होती हैं।
  • इसके फूल बेहद खूबसूरत होते हैं। फूल सफ़ेद रंग के होते हैं और उनमें हल्की गुलाबी / लाल धारियां होती हैं। फूल एक लंबे डंठल के ऊपर गुच्छे में निकलते हैं।

यह समाचार भी पढ़िये: Bonus For Railway Employess: 11.40 लाख रेलवे कर्मचारियों मिलेगा 78 दिनों का बोनस

यह पौधा कैसे लगाएं और इसकी कैसे देखभाल करें?

  • इस पौधे को अप्रत्‍यक्ष या मध्‍यम धूप जरूरी होता है, लेकिन ठंड बिल्कुल सही नहीं है। इसकी संतुलित मौसम में सही ग्रोथ होती है। कुछ वक़्त के लिए ये प्लांट निद्रा यानि Dormancy में भी जाता है। इस समय इस पौधे में न तो ग्रोथ होती है और न कोई फूल निकलते हैं।
  • पौधा ऐसे करें तैयार : सुदर्शन के पौधे को इसके कंद या इसके छोटे पौध से उगाया जाता है। मुख्‍य पौधे के 2 से तीन साल पुराना हो जाने पर इसके नीचे नए छोटे-छोटे पौध निकलते हैं। इनसे सुदर्शन का नया पौधा लगाया जा सकता है।
  • पौधे लगाने के लिए मिट्टी ऐसे करें तैयार: इस पौधे को नमी जरूरी है लेकिन इसे पानी में डूबे रहना पसंद नहीं है। अगर इसको गमले में लगाएं तो पानी जमा न होने दें। इसके लिए गमले में अच्‍छी जल निकासी भूरभूरी मिट्टी होनी चाहिए। सामान्‍य मिट्टी को अधिक जल सोखने वाली बनाने के लिए उसमें थोड़ी सी रेत यानि बालू, गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्‍ट, फंगस से बचाने के लिए नीम की खली अथवा थोड़ी सी हल्‍दी मिला दें।
  • इसका पौधा बहुत तेजी से बढ़ता है और साथ ही इसकी जड़ें भी काफी फैलती हैं। ऐसे में गमले में लगाने के लिए उसका साइज अपेक्षाकृत बड़ा होना चाहिए। गमला मिट्टी या सीमेंट का हो तो बेहतर रहेगा। इसे घर के बगीचे में लगाने के लिए 12 से 14 इंच का गमला सही रहता है।
  • यह बारहों महीने यानि सालभर लगने वाला पौधा है। इसकी कोई निश्चित उम्र का जिक्र नहीं मिलता है, लेकिन यह कई वर्ष तक रहता है ।
  • सुदर्शन पौधे को अप्रत्‍यक्ष धूप अथवा मध्‍यम धूप की आवश्‍कता रहती है। इसके लिए प्रतिदिन 4 से 6 घंटेकी अप्रत्‍यक्ष या मध्‍यम धूप की जरूरत रहती है। इसे तेज धूप से बचाना चाहिए अन्‍यथा इसके पत्‍ते पीले हो जाएंगे और ये पौधा सूख भी सकता है।
  • गमले में 1 से 2 साल के पौधे में फूल आते हैं , सही देखभाल ज़रूरी है। छोटा पौधा लगाने पर फूल आने में वक़्त लगता है।
  • ज़्यादा नमी और हवा का कम आवागमन से इस पौधे में कीड़े लगने की संभावना हो जाती है। पत्तियों के पीछे या नीचे ध्यान से देखना चाहिए कि कहीं कीड़े तो नहीं लग गए हैं। संक्रमित पत्ते को पौधे से अलग कर देना चाहिए।

यह प्‍लांट कहां ज्‍यादा पाया जाता है ?

  • यह प्लांट महाराष्ट्र , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश , तेलंगाना राज्यों में ज़्यादा पाया जाता है। अपने देश में यह जंगलों में भी पाया जाता है।वैसे यह विदेश में यह बांग्लादेश , म्यांमार , थाईलैंड , वियतनाम, लाओत्से , दक्षिण चीन में अधिक पाया जाता है।
  • यह श्रीलंका, जावा, दक्षिण पूर्व एशिया और आस्‍ट्रेलिया में भी बहुतायत में पाया जाता है।

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *