सटीक समाचार, पानीपत। Panipat Jain Sthanak: पानीपत की गांधी मंडी स्थित जैन स्थानक में तप सम्राट रविंद्र की सुदीर्घ तपस्या के उपलक्ष में तप अनुमोदना तापस्वी अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज ने कहा की तपस्या जिन शासन का प्राण है और यह धर्म की सर्वोच्च प्रामाणिक भावना है।
कार्यक्रम का आयोजन एसएस जैन सभा के तत्वावधान में किया गया। इस अवसर पर अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज, परम सेवाभावी राजेंद्र मुनि जी महाराज महासाध्वी श्री समता जी महाराज एवं साध्वी श्री भविका जी महाराज का पावन सानिध्य रहा। डाॅ. राजेश मुनि ने कहा कि लंबी-लंबी तपस्या उग्र तपस्या कहलाती है। उग्र तपस्या कर्म बीमारी को समाप्त करने का एक अचूक जरिया है।
कहा- तपस्या हर किसी के बल बूते की बात नहीं
उन्होंने कहा कि तपस्या हर व्यक्ति के बल बूते की बात नहीं है। इसमें रसना का त्याग करना पड़ता है, इच्छाओं को मारना पड़ता है, जो इतना आसान नहीं है। यही कारण है कि बड़ी तपस्या करने वाले बहुत कम होते हैं। करोड़ों का दान देने वालों की तुलना में उग्र तपस्वी का अधिक मान होता है। रविंद्र जैन उच्च भाव से उग्र तपस्या कर रहे हैं। इन्हें तप सम्राट की उपाधि से अलंकृत करता हूं।

तपस्या से आत्मा कुंदन बनती है: महा साध्वी समता
महा साध्वी श्री समता जी महाराज ने कहा कि तपस्या द्वारा शरीर को तपाने से आत्मा कुंदन बनती है। उन्होंने एक गीत गुनगुनाया-‘ भाई रविंद्र जी हमने देखा हौसला तुम्हारा, हां हौसला तुम्हारा/ भूखे रहना हाय मेरी तौबा, घबराए जिया हमारा/मनोज गुरु की कृपा से तप हो गया तुम्हारा/ राजेश गुरु की कृपा बरसी, आत्म बल बढ़ा तुम्हारा…’
जानें कौन हैं रविंंद्र जैन
गांधी मंडी जैनसभा के संरक्षक डॉ. एपी जैन ने बताया कि रविंद्र जैन का जन्म बला गांव के धर्मनिष्ठ संस्कारी परिवार में हुआ।
- उनके पिताजी कलीराम जैन बड़े सुश्रावक थे। इनकी माताजी संथारा साधिका पिश्ता देवी थीं। इनका पूरा परिवार धर्म, ध्यान व तपस्या में अग्रणीय रहा है। रविंद्र जैन को शुरू से ही संतों का सानिध्य बहुत अच्छा लगता था।
- उनको विशेषतया गांधी मंडी महिला स्थानक में स्थिरावास में रहीं महासाध्वी श्री कैलाशवती जी महाराज व संथारा साधिका कुसुम प्रभा जी महाराज, महासाध्वी श्री सुधा जी महाराज, दृढ़ संयमी मनोज मुनि जी महाराज, परिषह विजेता श्री विशाल मुनि महाराज का सानिध्य रहा। रविंद्र जैन अपने लिए कैलाश पुत्र सुधा हनुमंत मनोज-विशाल कृपा पात्र लिखते हैं।
- इस समय इनका 52 वां उपवास व्रत गतिमान है, 2 अठाई व 3 तेलों के बाद। अभी इस चातुर्मास के दो महीने भी नहीं बीते हैं और उनके उपवासों की प्रक्रिया लगभग 3 महीने की हो गई है। गत वर्ष भी इन्होंने पहली बार 54 दिनों की उपवासों की लंबी तपस्या की थी।

तपस्वी परिवार एवं कीर्तिमान
डॉ. एपी जैन ने बताया कि केवल 30 दिन या अधिक की अर्थात मास खमण की तपस्या की बात करें तो इनकी तपरत्ना धर्मपत्नी 2018 से प्रारंभ करके अलग-अलग वर्षों में अब तक 32, 36, 76, 36, 72, और इस चतुर्मास में 72 दिन उपवास की सुदीर्घ तपस्या कर चुकी हैं। उनके सुपुत्र तपस्वी श्री अरिहंत जैन 43 व 36 दिन की तपस्या कर चुके हैं। कम से कम पानीपत की दृष्टि से तो पुरुष, महिला व युवा तीनों वर्गों में ये तपस्याएं सर्वाधिक हैं।
उन्होंने बताया कि सन् 2024 में इनकी धर्मपत्नी ने चातुर्मास प्रारंभ होने के 18 दिन पहले ही उपवास तपस्या प्रारंभ करके उत्तर भारत में चातुर्मास में सबसे पहले मासखमण पूरा करने का की कीर्तिमान बनाया था। उनकी कुल तपस्या 72 दिन की थी।
उन्होंने बताया कि उसी समय उनके 21 वर्षीय बेटे अरिहंत ने भी उनकी तपस्या के बीच में ही उपवास तपस्या का मासखमण करके मां-बेटे दोनों द्वारा इकट्ठे मास खमण करने का भी कीर्तिमान बनाया था। यह कीर्तिमान आज भी विद्यमान हैं। अब जब मां-पिता दोनों तपस्यारत हों, बिटिया डॉ. वंशिका जैन, बेटा अरिहंत व पुत्रवधू खुशी जैन उनकी तपस्या में सहयोगी बनकर एक प्रकार की तपस्या ही करते हैं।

जैन समाज के युवाओं ने किया नाट्य मंचन
कार्यक्रम में जैन समाज के युवाओं ने रविंद्र जैन के जीवन पर एक नाट्य प्रस्तुति भी दी। यह हरियाणा में संभवत: किसी तपस्वी पर पहली नाट्य प्रस्तुति है। इसमें सर्वजैन रिद्धि, अक्षिता, मंजू, आराध्या, प्रिशु, अर्चिता, रक्षित, श्रुति, ज्योति, करुणा व हिना नै सराहनीय अभिनय का परिचय दिया।
यह समाचार भी पढ़िये : JIO Home के ग्राहकों को तोहफा, अब दो और प्लान पर भी Amazon Prime Lite फ्री
डॉ. एपी जैन ने कहा, ’51 उपवास करना आसान नहीं है, आत्म बल हो जिसका ऊंचा कर पाता वही है/अनुमोदना कर रहा है आज हर जन /तप सम्राट रविंद्र जैन का अभिनंदन है…।’ कार्यक्रम में राजेंद्र जैन, डॉ. ईश्वर जैन आदि ने भी अनुमोदना और अभिनंदन के सार गर्भित विचार प्रस्तुत किए । इस मौके पर बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन मौजूद रहे।

