सटीक समाचार, चंडीगढ़। Punjab New Update: पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने एक बार फिर केंद सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। इस बार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर रार मची है। पंजाब के सीएम भगवंत मान ने केंद्र सरकार पर राज्य के संवैधानिक अधिकारी की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पंजाब कैबिनेट ने इसको लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया है।
कैबिनेट ने कहा- पंंजाब के संंवैधानिक अधिकारों व निर्धारित प्रक्रिया नजरअंदाज की गई
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट की आज बैठक हुई। कैबिनेट की बैठक में कहा गया है कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के संवैधानिक अधिकारों और निर्धारित प्रक्रिया को नजरअंदाज करने की एक और कोशिश हुई है। पंजाब सरकार की राय की प्रतीक्षा किए बिना जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने दिया गया।
कैबिनेट ने प्रस्ताव पास कर चीफ जस्अिस की नियुक्ति ओर शपथ ग्रहण रोकने की मांग की
कैबिनेट ने इस पर गंभीर आपत्ति जताते हुए प्रस्ताव पारित किया। इसमें कहा गया कि जब तक पंजाब सरकार की की राय नहीं ले ली जाती और उन पर योग्य विचार नहीं कर लिया जाता, इस नियुक्ति और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को रोका जाए।
भगवंत मान ने कहा- केंद्र सरकार ने निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन किया
एक्स पर पोस्ट कर मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, ‘ आज पंजाब कैबिनेट ने केंद्र सरकार की ओर से पंजाब के अधिकारों पर लगातार किए जा रहे हमलों और संवैधानिक नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सर्वसम्मति से महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किया है। राज्य सरकार की सहमति लिए बिना पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस की नियुक्ति करना निर्धारित प्रक्रिया (मेमोरंडम ऑफ प्रोसीजर) और संवैधानिक नियमों की सीधा उल्लंघन है। ‘
आरडीएफ की रोकी गई राशि देने की भी मांग की
भगवंत मान ने कहा कि केंद्र की ओर से हमारे 9,000 करोड़ रुपये के आरडीएफ और बाढ़ राहत पैकेज को रोकना, बीबीएमबी के नियम बदलना और अब न्यायिक नियुक्तियों में सीधा दखल देना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारी मांग है कि इस नियुक्ति को तुरंत रोका जाए और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार राज्य की राय को उचित सम्मान दिया जाए।
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मुख्यमंत्री ऑफिस (CMO) की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार लंबे समय से पंजाब के अधिकारों का उल्लंघन कर रही है। हाल के दिनों में केंद्र का दखल बहुत बढ़ गया है, जिसमें पंजाब को भारत के संविधान और कई नियमों/कानूनों के तहत मिले अधिकारों से बार-बार वंचित किया गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से क्या कहा गया?
- मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा केंद्र ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के नियमों में सर्वसम्मति से बदलाव करके उस पारंपरिक परंपरा को खत्म कर दिया। इसके तहत सदस्य (पावर) का चयन पंजाब से होना सुनिश्चित था।
- इसके अलावा केंद्र ने पंजाब यूनिवर्सिटी के केंद्रीकरण का प्रस्ताव रखा था, जिसका पंजाब द्वारा पुरजोर विरोध किया गया था। केंद्र ने अपनी अथॉरिटी का दुरुपयोग करके पंजाब के लोगों की पकड़ और अधिकारों को दबाने के लिए अपना दखल जारी रखा है।
कैबिनेट की बैठक में क्या कहा गया?
- भारत सरकार के कानून और न्याय मंत्रालय के जरिए भारत के राष्ट्रपति ने जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने का आदेश पारित किया है। यह नियुक्ति राज्य सरकार की सहमति लिए बिना की गई है, जिससे सभी संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को दरकिनार किया गया है।
- हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों और जजों की नियुक्ति और तबादले के लिए मेमोरंडम ऑफ प्रोसीजर’ का पैरा 6 स्पष्ट रूप से निर्देश देता है कि भारत के चीफ जस्टिस के लिए नाम की सिफारिश प्राप्त होने के बाद केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री संबंधित राज्य सरकार के विचार प्राप्त करेंगे। राज्य सरकार के विचार प्राप्त होने के बाद केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के मंत्री प्रधानमंत्री को प्रस्ताव सौंपेंगे, जो फिर चयन के संबंध में राष्ट्रपति को सलाह देंगे।
- प्रोसीजर के मेमोरंडम और स्थापित संवैधानिक नियमों की पूरी तरह अनदेखी करते हुए केंद्र ने राज्य सरकार के जवाब की प्रतीक्षा किए बिना जल्दबाजी में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति नोटिफाई कर दी।

