सटीक समाचार, चंडीगढ़। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने गुरुग्राम के राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ( INDU At Gurugram) के काम में देरी पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार चाहती ही नहीं कि यह बने। यही कारण है कि 12 वर्षों से इस विश्वविद्यालय का कार्य लटका हुआ है और भाजपा सरकार एक ही रटा-रटाया जवाब संसद दे रही है।
बोले- राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय का जितना काम हमने कराया उसके आगे एक ईंट नहीं लगी
उन्होंने इस संबंध में लोकसभा में प्रश्न पूछा। उन्होंने कहा कि प्रश्न पर जवाब ने भाजपा सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को उजागर कर दिया है। दीपेन्द्र हुड्डा के सवाल के जवाब में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बताया कि गरुग्रााम के आईएनडीयू में भूमि अधिग्रहण, चारदीवारी, परिधीय मार्ग, गार्ड कक्ष और निगरानी टावर जैसे प्रारंभिक कार्यों पर 176 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
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दीपेंद्र ने कहा कि इससे स्पष्ट हो गया है कि कांग्रेस सरकार के समय जितना काम हुआ था उसके आगे एक ईंट भी नहीं लगी। उन्होंंने आईएनडीयू परियोजना के प्रारंभ से अब तक वर्षवार आवंटित, खर्च की गई तथा खर्च न की गई धनराशि का ब्यौरा मांगा और पूछा कि क्या इसके डीपीआर को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
दीपेंद्र हुड्डा ने पूरी परियोजना के बारे में ब्योरा मांगा
इसके अलावा, उन्होंने परियोजना के पूरा होने में विलंब के कारणों सहित इसके पूरा होने की मूल एवं संशोधित समय-सीमा का ब्योरा भी मांगा । दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार ने न तो रक्षा विश्वविद्यालय जैसी महत्त्वपूर्ण परियोजना के पूरा होने की स्पष्ट समय-सीमा बताई, न ही वर्षवार धनराशि के उपयोग का पूरा विवरण दिया और न ही देरी की जिम्मेदारी तय की।
हुड्डा ने कहा कि मौजूदा सरकार रक्षा विश्वविद्यालय के निर्माण में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी है। उन्होंने कहा, मैंने 2016 में सवाल पूछा तो 25 नवबंर, 2016 को तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुभाष भामरे ने लोकसभा में जवाब दिया कि चारदीवारी बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि इसके बाद 2022 में भी सरकार ने राज्य सभा में उनके सवाल का वही जवाब दिया। अब 2026 में एक बार फिर लोकसभा में भाजपा सरकार 2016 के जवाब को ही दोहरा रही है। इससे स्पष्ट है कि INDU गुरुग्राम का काम ज्यों का त्यों पड़ा हुआ है।
कहा- अन्य कई परियोजनाओं की तरह हरियाणा से कहीं और न चला जाए
दीपेंंद्र हुड्डा ने यह भी कहा कि उन्हें डर है कि रेल कोच फैक्ट्री, इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एम्स परिसर के 10 राष्ट्रीय संस्थानों की तरह रक्षा विश्वविद्यालय भी कहीं और न चला जाए। उन्होंने गुरुग्राम के गांव बिनोला में प्रस्तावित रक्षा विश्वविद्यालय के बारे में विस्तार से बताया।
दीपेंद्र ने कहा कि 1999 में कारगिल रिव्यू कमेटी द्वारा भारत की सुरक्षा प्रबंधन व्यवस्था की कमियों को सामने लाने के लिए भआईएनडीयू का प्रस्ताव रखा गया था। मई 2010 में काफी प्रयासों के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल से इसे गुड़गांव में स्थापित करने को मंजूरी दिलाई गई। सितंबर 2012 में इसकी जमीन अधिग्रहण का काम पूरा किया गया।
2013 में रक्षा विश्वविद्यालय की आधारशिला रखी गई थी
उन्होंने बताया कि 205 एकड़ जमीन पर बनने वाले इस रक्षा विश्वविद्यालय की आधारशिला वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने रखी थी। हम जितना काम कराकर गए बस वही काम हुआ। इसके बाद केंद्र और प्रदेश में भाजपा सरकार बन गयी और उसने रक्षा विश्वविद्यालय का काम ठंडे बस्ते में डाल दिया।
सांसद हुड्डा ने कहा कि इस रक्षा विश्वविद्यालय के तहत डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ डिस्टेंस एंड ओपन लर्निंग, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस टेक्नॉलाजी, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट, आईआईटी, नेशनल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज की स्थापना की जानी थी। इस रक्षा विश्वविद्यालय के शुरु होने से सेना की सामरिक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होती साथ ही इलाके का विकास होता और हरियाणा के युवाओं को उच्च शिक्षा व रोजगार के अवसर भी मिलते।
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