सटीक समाचार, चंडीगढ़।
पंजाब सरकार ने राज्य में कृषि सुधारों को लेकर मंगलवार को बड़ा कदम उठाया। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) प्रणाली में सुधार की घोषणा की है। इसके तहत 26 साल पुराने उस ढांचे को बदल दिया गया है जिसने किसानों को लंबे समय से अपर्याप्त संस्थागत कर्ज पर निर्भर रहने और साहूकारों के रहमो-करम पर छोड़ दिया था।
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों के लिए ऐतिहासिक ऐलान किया
यह नई नीति फसल की वास्तविक लागत के अनुसार फसल-वार कर्ज की सीमा (क्रेडिट लिमिट) को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगी, ब्याज का बोझ कम करेगी और अधिक मुनाफे वाली फसलों व सहायक क्षेत्रों के लिए कर्ज की पात्रता का विस्तार करेगी। इसके तहत पराली प्रबंधन के लिए विशेष वित्तीय सहायता शुरू होगी और किसानों को एटीएम और यूपीआइ जैसे आधुनिक डिजिटल प्लेटफार्मों के माध्यम से धन का उपयोग करने में सक्षम बनाएगी।
भगवंत मान बोले- , किसान अब एटीएम और यूपीआइ से भी पैसे निकाल सकेंगे
पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इन सुधारों को कृषि को अधिक लाभदायक और टिकाऊ बनाने की दिशा में अहम फैसला बताया। मान ने कहा कि नया केसीसी ढांचा किसानों के हाथों में अधिक पैसा सीधे पहुंचाएगा, गेहूं-धान के चक्र से बाहर फसल विविधता को तेज करेगा, सहकारी कर्ज संस्थाओं को मजबूत करेगा और किसानों को कर्ज के जाल से बाहर निकालने में मदद करेगा। इन सुधारों से पंजाब भर के 13 लाख से अधिक किसानों को लाभ होने की उम्मीद है। कई फसलों के लिए कर्ज सहायता में भारी वृद्धि होगी। इसमें बागवानी फसलें भी शामिल हैं, जहां पहले मिलने वाली 32,000 रुपये प्रति एकड़ की एकसमान सीमा के मुकाबले अब कर्ज 1.57 लाख रुपये प्रति एकड़ तक जा सकता है।
सीएम बोले- यह सिर्फ नीतिगत बदलाव नहीं, लालफीताशाही समाप्त किया
भगवंत मान ने कहा, ‘यह सिर्फ कोई नीतिगत बदलाव नहीं है, बल्कि पंजाब के किसानों की आर्थिक आजादी के उद्देश्य से लिया गया ऐतिहासिक फैसला है। हमने लालफीताशाही को समाप्त कर दिया है, यह सुनिश्चित किया है कि अधिक पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचे और प्राथमिक कृषि सहकारी सभाओं (पीएसीएस) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए प्रभावी ढंग से किसानों की सेवा करना आसान बना दिया है।’
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2000 से चले आ रहे पुराने केसीसी सिस्टम को बदलकर 26 सालों की स्थिरता को तोड़ा है। दो दशकों से अधिक समय से पंजाब के किसानों को हाथों-हाथ कागजी कार्रवाई, चेक बुक और पासबुकों के आस-पास घूमने वाले पुराने और जटिल केसीसी ढांचे पर निर्भर रहने के लिए मजबूर किया गया था। हमारी सरकार ने इस सिस्टम को बदलकर पारदर्शी, डिजिटल और बेहतरीन कर्ज व्यवस्था लागू की है, जो कि आधुनिक कृषि की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।
अब कर्ज सीमा गेहूं के लिए प्रति एकड़ 30 हजार रुपये और धान के लिए 39 हजार रुपये
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि संशोधित नीति से किसानों को मिलने वाली कर्ज सीमा में भारी वृद्धि होगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बैंक कर्ज फसल की वास्तविक लागत को दर्शाता हो। हमने गेहूं के लिए कर्ज सीमा 24,380 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी है। इसी तरह धान के लिए 25,440 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर 39,000 रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि केसीसी के नए ढांचे में फसलों के अवशेष प्रबंधन को शामिल करने वाला पंजाब पहला राज्य बन गया है। धान की संशोधित 39,000 रुपये प्रति एकड़ की सीमा में से 2,000 रुपये प्रति एकड़ विशेष रूप से फसली अवशेष प्रबंधन के लिए रखे गए हैं। देश में पहली बार किसानों को पराली प्रबंधन के लिए विशेष सहायता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए वित्तीय रूप से मजबूत किया जा रहा है।
गन्ने के लिए प्रति एकड़ एक लाख रुपये हुई कर्जसीमा
मान ने कहा कि सरकार द्वारा गन्ना उत्पादकों की सहायता के लिए भी शानदार कदम उठाए गए हैं।लगाए गए गन्ने के लिए कर्ज सीमा को 44,000 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर एक लाख रुपये प्रति एकड़ कर दिया गया है। रेटून फसलों (फिर से उगने वाली) के लिए पहली बार 65,000 रुपये प्रति एकड़ की कर्ज व्यवस्था की गई है।
कृषि वानिकी और कृषि बागवानी फसलें भी कर्ज प्रणाली में शामिल
मुख्यमंत्री ने कहा कि हम किसानों को उच्च-मूल्य वाली फसलों की ओर मोड़ने के लिए सक्रिय रूप से कदम उठा रहे हैं। पहली बार, पॉपलर और बांस जैसी कृषि-वानिकी फसलों के साथ-साथ जामुन जैसी कृषि-बागवानी फसलों को कर्ज प्रणाली के अधीन लाया गया है। हमने लेमनग्रास के लिए भी कर्ज सीमा लाई है, जिससे शिवालिक पहाड़ियों के किसानों को लाभ होगा।
अब फसल के अनुसार कर्ज सहायता मिलेगी
उन्होंने कहा, ‘पहले, सभी फल और सब्जियों के लिए एकसमान कर्ज सीमा निर्धारित की गई थी। अब, फसल के अनुसार कर्ज सहायता शुरू की गई है, जिसकी सीमा प्रति एकड़ 1.57 लाख रुपये तक है। लहसुन उत्पादक अब प्रति एकड़ 1,57,372 रुपये, हाड़हू प्याज उत्पादक प्रति एकड़ 92,686 रुपये और हाइब्रिड टमाटर उत्पादक प्रति एकड़ 80,981 रुपये का कर्ज प्राप्त कर सकते हैं।’
ड्रैगन फ्रूट और चिया सीड व क्विनोआ की खेती भी अब कर्ज के दायरे में
उन्होंने कहा कि पहली बार, ड्रैगन फ्रूट और चिया सीड/क्विनोआ जैसी फसलों को कर्ज के दायरे में लाया गया है। नीली क्रांति को मजबूत करने के लिए मत्स्य पालन के लिए कर्ज सीमा 2.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर से बढ़ाकर तीन लाख रुपये प्रति हेक्टेयर कर दी गई है। सफेद झींगा उत्पादकों को अब प्रति हेक्टेयर 5.5 लाख रुपे की सहायता मिलेगी, जो पहले 4.5 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर थी।
भगवंत मान ने कहा, ‘हमने पुरानी बाधाएं हटा दी हैं। बी-कंपोनेंट को अब 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक किया जा सकता है, जिससे किसान बीज, खाद, पशु चारा, कस्टम हायरिंग, पराली प्रबंधन, जमीन समतल करने और यहां तक कि ड्रोन हायरिंग के लिए भी कर्ज प्राप्त कर सकेंगे। पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने और बिचौलियों को समाप्त करने के लिए, ए-कंपोनेंट अब सीधे किसानों के बचत खातों में जमा किया जाएगा।’

