सटीक समाचार, पानीपत। Panipat Local New Update: पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में सड़क सुरक्षा पर प्रतियाेगिता का आयोजन किया गया। सड़क सुरक्षा क्विज प्रतियोगिता के ब्लाकस्तरीय लेवल के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया गया। इसमें कॉलेज के लगभग 600 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले प्रतिभागियों का चयन किया गया ।
कॉलेज में लेवल-3 और लेवल-4 की प्रतियोगता हुई
यह प्रतियोगिता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ट्रैफिक), करनाल के मार्गदर्शन में हुई। कॉलेज एनएसएस यूनिट्स एवं कॉलेज रोड सेफ्टी क्लब की देख-रेख में इस प्रतियोगिता में एएसआइई करमबीर, कॉलेज में सड़क सुरक्षा क्लब के नोडल ऑफिसर डॉ. राकेश गर्ग, एन एस एस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ संतोष कुमारी, डॉ पवन कुमार और डॉ संगीता गुप्ता का विशेष सहयोग रहा

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने किया । कॉलेज में लेवल-3 और लेवल-4 लेवल की प्रतियोगिता का आयोजन हुआ । बता दें कि क्विज प्रतियोगिता के इस अभियान की शुरुआत तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक शत्रुजीत कपूर आईपीएस की प्रेरणा से 2013 में हुई थी।
यह अभियान रिकॉर्ड भागीदारी का अनूठा उदाहरण बन चुका है और इसे लिम्का बुक ऑफ़ रिकार्ड्स में भी स्थान मिला है । पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग के सांझा प्रयासों से इस प्रतियोगिता के आयोजन में रिकॉर्ड संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया है ।
लोग सड़क सुरक्षा पर गंंभीर हों : करमबीर
इस अवसर पर एएसआइ करमबीर ने कहा कि ट्रैफिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने तथा लोगों को नियमों का पालन करवाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। नियमों का पालन न करने वालों पर नज़र रखी जा रही है । विदेशों में कम दुर्घटनाएं होने का कारण वहां के लोगों का अनुशासनप्रिय होना है । वक़्त आ गया है कि लोग अब सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर हों।
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उन्होंने कहा कि ड्राइविंग की समझ की कमी और यातायात नियमों की निरंतर अवहेलना ने हमारी सड़कों को बेहद असुरक्षित बना दिया है । मोटर वाहन चालकों, पैदल चलने वालों, साइकिल चालकों और यहाँ तक कि यातायात पुलिस कर्मियों को भी यातायात के नियमों की पर्याप्त जानकारी नहीं है।
सड़कों अराजक स्थिति पैदा हो जाती है
उन्होंने कहा कि सुरक्षित ड्राइविंग की जानकारी के अभाव और यातायात के नियमों को भली-भांति लागू न किए जाने के कारण आज सड़कों पर अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो गई है । भारत में हर साल एक लाख 40 हज़ार से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं। पिछले दशक में ही देश में सड़कों पर होने वाली मौतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
विश्व में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में 10 प्रतिशत भारत में होती हैं
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व के कुल वाहनों में से केवल एक प्रतिशत वाहन भारत में है, जबकि विश्व में होने वाली कुल सड़क दुर्घटनाओं में से 10 प्रतिशत हादसे भारत में होते है । हमें चाहिए कि हम बचपन से ही अपने बच्चों को यातायात ने नियमों और सड़क-चिन्हों के बारे में बताएं और सिखाएं ।
डॉ. अनुपम चोपड़ा ने कहा- सड़क सुरक्षा मानव जीवन से जुड़ा पहलू
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा एक सामाजिक कार्य होने के साथ-साथ मानव जीवन से जुड़ा पहलू है, जिसकी अनदेखी अमूल्य जीवन पर भारी पड़ सकती है। सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए सड़क पर वाहन चलाते समय नियमों का पालन करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की मदद करने का गुण हर युवा में होना चाहिए । वाहनों की बढती संख्या ने सड़क सुरक्षा जैसे मुद्दे को प्रासंगिक बना दिया है । अब सड़क पर चलने वाले हर इंसान की जान को बचाना और संजोना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए ।
उन्होंंने कहा कि यातायात संबंधित ज्यादातर समस्याएं युवाओं से जुड़ी हैा । ऐसे में हर युवा का दावित्व है कि वह आने वाली पीढ़ियों को निराश न करें और सड़क सुरक्षा को मन से अपनाएंं। मस्ती और जोश में आकर वाहनों को चलाना अकसर घातक सिद्ध होता है । सड़क सुरक्षा एक संवेदनशील मुद्दा है जिसको पुलिस और प्रशासन ने गंभीरता के साथ हर बार उठाया है और समाज को नई दिशा दिखाई है क्विज प्रतियोगिता भी इसी उद्देश्य से आयोजित की गई है।

