सटीक समाचार, पानीपत। Hindi Divas 2026: यहां एसडी पीजी कॉलेज में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में विद्यार्थी और उपस्थिति लोग जन-जन की इस भाषा की अविरल धारा में बह गए। उन्होंने हिंदी की राजभाषा से राष्ट्रभाषा बनने तक की यात्रा के बारे में जाना। हिंदी को अभी औपचारिक रूप से भले ही राष्ट्रभाषा का दर्जा नहीं मिला है, लेकिन यह जनमानस की भाषा बन चुकी है। यह भारत के साथ दूसरे देशों तक पहुंच चुकी है।
पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् के सहयोग से भव्य समारोह
एसडी पीजी कॉलेज में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पानीपत इकाई के सहयोग से भव्य हिंदी दिवस समारोह हुआ। इसमें विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ अधिवक्ता एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद् पानीपत इकाई के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा थे।

हिंदी भाषा के साथ भारतीय संस्कृति की पहचान बनी
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी भाषा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की पहचान बन गई है। इसे भारतीय संविधान में राजभाषा का दर्जा दिया गया है और उसकी यह यात्रा राष्ट्रभाषा सदृश्य है। भले ही हिंदी को अभी राष्ट्रभाषा के रूप औपचारिक रूप से दर्जा नहीं मिला है, लेकिन निस्संदेह वह जन-जन की भाषा बनकर यह पहचान बना चुकी है।
कार्यक्रम में डॉ जुगमती, डॉ कविता, डॉ एसके वर्मा, प्रो किरण मलिक, प्रो शिवरानी, प्रो ममता रावल आदि ने भी भाग लिया । इस अवसर पर भाषण, काव्य पाठ और दोहा पठान प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इसमें जिले के कई कालेजों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
14 सितंबर 1949 काे संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिया था
बता दें कि 14 सितंंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा हिंदी को राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया थाा। इस कारण प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। हिंदी दिवस भारत में भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति गहरी भावना और समर्पण को प्रकट करता है।यह देश की एकता और एकजुटता का संदेश भी देता है। भारत में भाषा की विविधता के बीच हिंदी एक दूसरे को जोड़ता है और उसके बीच सेतु का काम करती है।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई । विजेताओं को प्रमाणपत्र और शील्ड से सम्मानित किया गया । सभी प्रतिभागियों को नकद राशि भी दी गई। कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ जुगमती ने किया।
प्रदीप शर्मा ने कहा- हिंदी रग रग में समाहित होकर हमारी संस्कृति को संजोती है
समारोह के मुख्य अतिथि प्रदीप शर्मा ने सभी से हिंदी की अविरल धारा को हमेशा आगे बढ़ाने के लिए सभी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह विडंबना ही है कि न्यायालयों में अधिवक्ता अंग्रेजी में मुकदमे की पैरवी करते है तो उनके मुवक्किल को एक अक्षर भी समझ नही आता। वह समझ नहीं पाते हैं कि उनके मामले का निर्णय होते समय आखिर बोला क्या जा रहा है।

उन्होंने हिंदी भाषा के उद्भव और विकास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंंने कहा कि हिंदी हमारे रग-रग में समाहित होकर हमारी संस्कृति को भी संजोती है। आज हिंदी जनमानस की भाषा बन गई है। हिंदी अब सर्वव्यापक है बस इसको लेकर हमें अपनी सोच बदलनी होगी। वर्तमान में सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी का प्रयोग बढ़ा है। हम हिंदी को सिर्फ पढ़ते या बोलते नहीं बल्कि जीते हैं । हिंदी संस्कार की भाषा है।
हिंदी इंसानियत का पैगाम देती है: डॉ. अनुपम अरोड़ा
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि भाषा इंंसान को इंंसान से जोड़कर इंसानियत का पैगाम देती है । हिंदी मात्र एक भाषा नहीं अपितु राष्ट्रीय संस्कृति की प्रतीक, ध्वजवाहक एवं संरक्षक है। तकनीक के इस युग में पाश्चात्य प्रभाव से विदेशी भाषाओं का विशेष तौर पर अंग्रेजी का प्रचलन यद्यपि बढ़ा है, लेकिन भारत राष्ट्र एवं इसके नागरिकों एवं युवा पीढ़ी में राष्ट्रीय मुद्दों व संस्कृति का विनाश न हो इस दृष्टिकोण से हिंदी के महत्व को हमें पूर्णतया समझना और अपनाना है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित में हिंदी के प्रसार के लिए सभी को निरंतर प्रयास करने चाहिए। किसी दूसरी भाषा पर दोष मढ़ने की आदत से हमें बचना होगा। अगर हम हिंदी को उसका उचित स्थान नहीं दिला पाए तो इसके लिए सिर्फ हम जिम्मेदार होंगे कोई और नहीं। प्रत्येक हिंदी प्रेमी का कर्तव्य है कि राष्ट्र एकीकृत हो, लोकतंत्र सुदृढ़ हो व प्रत्येक नागरिक की सशक्त लोकतंत्र के निर्माण अपेक्षित भूमिका हो।
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भाषण, कविता और दोहा पाठ प्रतियोगिताएं आयोजित
इस अवसर पर हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता, कविता पाठ और दोहा पाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 80 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इसके परिणाम इस प्रकार रहे –
हिंदी दिवस भाषण प्रतियोगिता
प्रथम- आरती- बीए-तृतीय।
द्वितीय- सीमोन- बीए-द्वितीय।
तृतीय- अंजली- बीए-द्वितीय।
दोहा पठन प्रतियोगिता
प्रथम- विजेता- एमएससी-प्रथम।
द्वितीय- सानिया- बीए-तृतीय।
तृतीय- टीनू – बीए-द्वितीय।
कविता पाठ प्रतियोगिता
प्रथम- विजेता।
द्वितीय- खुशबू।
तृतीय- टीनू।

