Shard Purnima 2026: शरद पूर्णिमा रविवार को, गजकेसरी योग सहित बनेंगे कई शुभ संंयाेग

Sharad Purnima 2026: रविवार को शरद पूर्णिमा पर गजकेसरी और लक्ष्‍मी-नारायाण योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं। (फाइल फोटो सोशल मीडिया)
Sharad Purnima 2026: रविवार को शरद पूर्णिमा पर गजकेसरी और लक्ष्‍मी-नारायाण योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं। (फाइल फोटो सोशल मीडिया)
Last Updated: 24 Oct, 2026 at 03:01 PM by Sunil Kumar Jha

सटीक समाचार, कुरुक्षेत्र। Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा रविवार 25 अक्‍टूबर को है, इसलिए यह पर्व 25 अक्‍टूबर की रात में मनाई जाएगी। इस बार शरद पूर्णिमा पर वृद्धि, हर्षण के साथ गजकेसरी योग के साथ बेहद शुभ संयोग बनेंगे। धार्मिक मान्‍यताओं के अनुसार, इस अवसर पर विधिवत पूजा-अर्चना से श्रद्धालुओं को असीम पुण्‍य का लाभ मिलेगा।

इससे कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं, बिहार के मिथिलांचल में मनाया जाता है कोजगरा

बता दें कि हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा पर्व को विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। बिहार के मिथिलांचल में नवविवाहितों के लिए कोजगरा त्‍योहार मनाया जाता है। इसमें पूजन के बाद मखाना आदि का वितरण किया जाता है।

25 अक्‍टूबर की रात माता लक्ष्‍मी और चंद्रदेव की पूजा-अर्चना की जाती है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। इस अवसर पर मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना, चंद्रदेव की उपासना और खीर का प्रसाद तैयार करने की परंपरा निभाई जाती है।

वृद्धि, हर्षण, गजकेसरी और लक्ष्‍मी-नारायण योग बन रहे हैं

कुरुक्षेत्र के गायत्री अनुसंधान केंद्र के संचालक और ज्‍योतिषी पंडित रामराज कौशिक का कहना है कि ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार शरद पूर्णिमा पर वृद्धि और हर्षण योग सहित कई शुभ संयोग बन रहे हैं। चंद्रमा और गुरु की केंद्र भाव में स्थिति से गजकेसरी योग बन रहा है। वहीं, तुला राशि में सूर्य बुध और शुक्र की युति लक्ष्मी-नारायण योग बना रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को सुख, समृद्धि, सौभाग्य और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।

समुद्र मंथन से जुड़ा है मां लक्ष्मी के प्राकट्य का प्रसंग

रामराज कौशिक ने बताया की पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अनेक दिव्य रत्नों और अमृत के साथ मां महालक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसी कारण मां लक्ष्मी की आराधना के लिए पूर्णिमा तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु इस दिन घरों और मंदिरों में दीप प्रज्वलित कर माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूर्ण होती है।

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श्रीकृष्ण के महारास से भी जुड़ी है शरद पूर्णिमा

पंडित कौशिक ने बताया कि शरद पूर्णिमा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं से भी माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, इसी मनोहारी पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में गोपियों के साथ महारास रचाया था। इस कारण वैष्णव परंपरा में भी इस पर्व का विशेष स्थान है। वृंदावन और ब्रज क्षेत्र में इस अवसर पर श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजनों का विशेष महत्व रहता है।

चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा काफी पुरानी

शरद पूर्णिमा पर दूध और चावल से बनी खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने की परंपरा काफी पुरानी है। धार्मिक मान्‍यताएं और विश्वास है कि इस रात चंद्रमा की किरणें अमृतमयी होती हैं। चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर विशेष गुणों से युक्त हो जाती है। इस खीर को अगले दिन सुबह परिवार के सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

25 अक्टूबर की रात होगी शरद पूर्णिमा की पूजा, 26 अक्टूबर को स्‍नान-दान

पंडित रामराज कौशिक ने बताया कि पंचांग संबंधी दी गई गणना के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर समाप्त होगी। रात्रि में पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहने के कारण कोजागरी पूजा और चंद्रमा की आराधना 25 अक्टूबर की रात की जाएगी। इसके बाद 26 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि के समापन से पहले स्नान-दान करने की परंपरा निभाई जाएगी।

उन्‍होंने बताया कि 25 अक्टूबर को सर्वार्थ सिद्धि योग शाम 7 बजकर 22 मिनट से 26 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 29 मिनट तक है। चंद्रोदय का समय 25 अक्‍टूबर को शाम लगभग 5 बजकर 40 मिनट होगा। इस समय में स्‍थान के अनुसार स्‍थानीय स्‍तर पर थोड़ा अलग-अलग हो सकता है। खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के लिए रात 8 बजकर 30 मिनट से मध्यरात्रि तक का समय सुझाया गया है।

शरद पूर्णिमा पर शुभ मुहुर्त और योग
शरद पूर्णिमा तिथि की शुरूआत25 अक्‍टूबर – दिन में 11.55 बजे (11.55 AM)।
चंद्रोदय का समय25 अक्‍टूबर – शाम 5.40 बजे (5.40 PM)।
चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने का समय25 अक्‍टूबर -रात 8.30 बजे (8.30 PM)
पूर्णिमा तिथि का समापन26 अक्‍टूबर- सुबह 9.41 बजे (9.41 AM)।
सर्वसिद्धि योग 25 अक्‍टूबर को शाम 7.22 बजे (7.22 PM) से 26 अक्‍टूबर को सुबह 6.29 बजे (6.29 AM) तक।
स्‍नान-दान 26 अक्‍टूबर को पूर्णिमा के समापन समय सुबह 9.41 बजे (9.41 AM) से पहले।

अस्‍वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी और बताए गए उपाय/सलाह व कथन धार्मिक मान्‍यता और लोकश्रुतियों के आधार पर दी गई सामान्‍य सूचना के लिए हैं। इसमें दिए गए गए मुहुर्त और तथ्‍य विभिन्‍न माध्‍यमाें और ज्‍योतिषी से मिली और धार्मिक मान्‍यताओं और धर्मग्रंथों से मिली जानकारी के आधार पर है। सटीक समाचार की इससे सहमति या असहमति नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्‍य या दावा न मानें और अपने विवेक का इस्‍तेमाल करें।

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