Reliance के चेयरमैन मुकेश अंंबानी कामकाजी महिलाओं के लिए चाहते हैं मजबूत व्‍यवस्‍था, कहा- कारपोरेट जगत सामूहिक पहल करे

अरुंधती भट्टाचार्य की आत्‍मकथा के हिंदी संंस्‍करण 'अपराजिता' के विमोचन पर मुकेश अंबानी , अरुंधती भट्टाचार्य व अन्‍य। (फोटो सौजन्‍य रिलायंस मीडिया)
अरुंधती भट्टाचार्य की आत्‍मकथा के हिंदी संंस्‍करण 'अपराजिता' के विमोचन पर मुकेश अंबानी , अरुंधती भट्टाचार्य व अन्‍य। (फोटो सौजन्‍य रिलायंस मीडिया)
Last Updated: 12 Sep, 2026 at 09:38 PM by Sunil Kumar Jha

सटीक समाचार, मुंबई। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने कहा कि कारपोरेट जगत कामकाजी महिलाओं और माताओं को बेहतर सहयोग देने के लिए मजबूत व्‍यवस्‍था बनाए। इसके लिए सामूहिक पहल की जाए। भारत की प्रगति में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है। जब महिलाएं आगे बढ़ेंगी, तो भारत आगे बढ़ेगा। देश की महिलाएं रुकने से इनकार करेंगी, तो भारत भी अनस्‍पोटेबल (Unstoppable) बनेगा।

अरुंधति भट्टाचार्य की अंग्रजी आत्‍मकथा के हिंदी संस्‍करण अपराजिता’ का विमोचन

उन्‍होंने यहां एक कार्यक्रम में अरुंधति भट्टाचार्य की आत्मकथा ‘Indomitable’ के हिंदी संस्करण ‘अपराजिता’ का विमोचन किया। उन्होंने अरुंधति के नेतृत्व और मुश्किल हालात में भी आगे बढ़ने के जज्बे की सराहना की। अंबानी ने कहा कि अरुंधति ने 2013 में भारतीय स्टेट बैंक की पहली महिला चेयरपर्सन बनकर इतिहास रचा और अन्‍य महिलाओं के लिए भी रास्ते खोले। उन्‍होंने कहा कि अरुंधति की किताब से परिवारिक मूल्यों, असफलता की जिम्मेदारी खुद लेने, लगातार सीखते रहने और लोगों को साथ लेकर नेतृत्व करने की सीख मिलती है।

कहा- असफलता के लिए दूसरों को दोष देने की जगह अपनी गलती देखना चाहिए

उन्होंने कहा कि असफलता के लिए दूसरों को दोष देने के बजाय यह देखना चाहिए कि गलती कहां हुई और आगे क्या बदला जा सकता है। अच्छा नेतृत्व सिर्फ अनुयायी बनाना नहीं, बल्कि नए नेताओं को तैयार करना है।

अंबानी बोले- महिलाओं की ताकत मां, पत्‍नी और बेटी में देखी

मुकेश अंबानी ने कहा कि उन्होंने महिलाओं की ताकत अपनी मां कोकिलाबेन, पत्‍नी नीता अंबानी और बेटी ईशा अंबानी में भी देखी है। नीता और ईशा दोनों कामकाजी माताएं हैं। उनका नेतृत्व नई पीढ़ी की महिलाओं के लिए प्रेरणा है। उन्‍होंने कहा कि भारत की युवा महिलाओं का आत्मविश्वास उन्हें देश के भविष्य को लेकर अत्‍यंत आशावादी बनाता है।

प्रेरणा देती हैं महिलाओं की उपल‍ब्‍धि‍यों

मुकेश अंबानी बोले, ‘अरुंधति जैसी महिलाओं की उपलब्धियां प्रेरणा देती हैं, लेकिन कॉरपोरेट जगत को महिलाओं के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना है।’ उन्होंने कारोबार जगत के नेतृत्‍वकर्ताओं से कामकाजी महिलाओं और माताओं के लिए बेहतर सहयोग की व्यवस्था बनाने की अपील की।

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इसके साथ ही उन्‍होंने अरुंधति और अन्य अनुभवी महिलाओं से इस पहल का नेतृत्व करने का आग्रह किया। अंबानी ने कहा कि रिलायंस फाउंडेशन इसमें पूरा सहयोग करेगा। अंबानी ने कहा, ‘कठिनाई आएंगी, लेकिन हम रुकेंगे नहीं। असफलता आएगी, लेकिन झुकेंगे नहीं। हम उठेंगे, सीखेंगे और जीतेंगे।’

जानें कौन हैं अरुंंधती भट्टाचार्य

  • अरुंधती भट्टाचार्य देश की प्रमुख बैंकरों में शामिल हैं।
  • वह सेल्‍सफाेर्स इंडिया की चेयरपर्सन और सीईओ हैं।
  • स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की पहली महिला चेयरपर्सन रही हैं। वह वर्ष 2013 में एसबीआइ की चेयरपर्सन बनीं। वह इस पद पर चार साल रहीं और इस दौरान एसबीआइ में ऐतिहासि‍क कार्य हुए। इस दौरान एसबीआइ का तेजी से डिटिलाइलजेशन हुआ और मोबाइल बैंकिंग को बढ़ावा मिला।
  • उनके कार्यकािल में ही एसबीआइ में पांच सहयोगी बैंकों का विलय जैसा महत्‍वपूर्ण कार्य हुआ।
  • अरुधंती को बैंकिंग और उद्योग-व्‍यवसाय में उल्‍लेखनीय कार्य योगदान के लिए पिछले साल यानि 2025 में देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्‍मान ‘पद्मश्री’ प्रदान किया गया।
  • वह विश्‍व की शक्तिशाली महिलाओं की फोर्ब्‍स सूची में भी शामिल की जा चुकी हैं।

अरुंधती भट्टाचार्य ने अब तक कौन सी किताबें लिखी हैं ?

  • अरुंंधती ने मुख्‍य रूप से अपनी आत्‍मकथा इंडोमिटेबल ( Indomitable) लिखी है। इसका हिंदी संस्‍करण ‘अपराजिता’ है।
  • इसके अलावा उनकी ‘प्रि‍पेयर फॉर द अननोन’ पुस्‍तक भी प्रकाशित हुई थी।

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