सटीक समाचार, पानीपत। विश्व बंधुत्व दिवस 2026 (Universal Brotherhood Day 2026) पर पानीपत के एसडी पीजी कॉलेज में विशेष समारोह का आयोजन हुआ। इसमें स्वामी विवेकानंद के विचारों पर जीवंत संवाद से युवा पीढ़ी को नवीन प्रेरणा मिली। इससे विद्यार्थी नैतिक मूल्यों और राष्ट्रप्रेम के जागृत भावों से ओतप्रोत हुए। कॉलेज परिसर मे स्वामी विवेकानंद पर पुस्तक प्रदर्शनी विशेष आकर्षण रहा और युवाओं ने पुस्तकाें में खूब रुचि दिखाई।
स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचार’ विषय पर हुआ संवाद
समारोह में ‘स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचार’ विषय पर संवाद किया गया। इसमें प्राध्यापकों और विशिष्ट जनों के साथ कॉलेज के लगभग 250 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने स्वामी स्वामी विवेकानंद को दुनिया में भारत की पहचान बनाने वाला व्यक्तित्व बताया।

उन्होंने कहा कि करीब 125 साल बाद भी स्वामी विवेकानंद के अमेरिका के शिकागो में दिया प्रसिद्ध भाषण आज भी बेहद प्रासंगिकता है। इस अवसर पर प्रो संगीता गुप्ता, प्रो प्रवीण खेरडे, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. राहुल जैन, प्रो. मनोज कुमार आदि ने स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्प अर्पित किए।
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एसडी पीजी कॉलेज का विशेष केंद्र स्थापित है
- एसडी पीजी कॉलेज में विवेकानंद अंतरराष्ट्रीय केंद्र स्थापित है।
- इस केंद्र में स्वामी विवेकानंद में जीवन, विचारों और उनके लक्ष्यों पर कार्यक्रम, संगोष्ठी, कार्यशालाएं और अन्य गतिविधियां आयोजित होती रहती हैं।
- कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं का उच्चकोटि के चरित्र और दृष्टिकोण की सीख दी जाती है। उन्हें सामाजिक कार्यों से भी सरोकार जोड़ा जाता है।
- स्वामी विवेकानंद पर राष्ट्रीय स्तर के कई सेमिनार भी कॉलेज में आयोजित किए गए हैं।
अनुपम अरोड़ा ने कहा- स्वामी विवेकानंंद से बेहतर गुरु कोई नहीं
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए स्वामी विवेकानंद से बेहतर गुरु कोई और हो ही नहीं सकता । विश्व बंधुत्व समय की मांग है और हर रिश्ते-नाते को इसी सूत्र में पिरोने का कार्य और दायित्व युवा वर्ग के कंधो पर है।
यह दिन क्यों है खास
- आज के दिन ही स्वामी विवेकानंद ने शिकागो में ‘विश्व धर्म संसद’ के दौरान अत्यंत ओजस्वी भाषण से विश्व में भारत की विशेष पहचान स्थापित की थी। उनके भाषण से वहां मौजूद सभी लोग बेहद अचंभित रह गए थे और उनके विचारों ने सभी को झकझोर दिया था। डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि इस भाषण से दुनिया को अपना नजरिया बदलने के लिए मजबूर कर दिया। उनके भाषण में भारत की समृद्ध संस्कृति की झलक देखने को मिली.।
- आज युवाओं का उनसे अच्छा आदर्श कोई दूसरा हो ही नहीं सकता है। दुनिया में कोई ऐसा कोई दूसरा भाषण नहीं है जिसके लिए खास दिवस मनाया जाता हो।
- स्वामी विवेकानंद ने अपना संबोधन ‘मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों’ कहकर शुरू किया था। इस संबोधन पर सभागार में कई मिनट तक तालियां गूंजती रहीं । यह संबोधन उन लोगों के लिए नया था जो दुनिया को बांटकर देखने के आदी थे ।
- स्वामी विवेकानंद ने इससे विश्व बंधुत्व का अद्भूत संदेश दिया। उन्होंने विश्व एक और मानव का मानव के साथ खास रिश्ता समझाया।
- स्वामी विवेकानंद ने उदाहरणों के जरिए स्वामी विवेकानंद ने उपस्थित धर्म सम्मेलन को जता दिया कि भारत सहिष्णु और सार्वभौमिकता का पालन करने वाला है।
डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने उस दिन भारत की परंपरा, संस्कृति और धर्म से दुनिया को परिचित कराने का चमत्कार कर दिखाया। आज उनके अनुयायी दुनिया भर में हैं और उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक और ठोस हैं।
उन्होंने कहा कि स्वामी जी के विचार न सिर्फ दवा का काम करते हैं बल्कि बीमारीयों से बचने के तरीके भी हमें बताते है। मार्ग से भटके युवा यदि एक बार भी खुद को स्वामी विवेकानंद के विचारों पर ले आएं तो इसके नतीजे सुखद और चकित करने वाले होंगे । उनका उद्धार और जीवन का सकारात्मक होना निश्चित है ।
