सटीक समाचार, चंडीगढ़। Stubble Burning New Update: पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 86 प्रतिशत तक कमी आई है। यह दावा राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किया। उन्होंने कहा कि पराली का खेत में या बाहर बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाना जरूरी है। इसके लिए पूरे राज्य में व्यापक अभियान चलाया जाए।
कहा- व्यापक सूचना एवं जागरूकता अभियान चलाया जाए
पराली प्रबंधन की रणनीति से संबंधित बैठक में भगवंत मान ने राज्य में पराली जलाने की प्रवृत्ति को और रोकने के लिए व्यापक सूचना और जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार के निरंतर प्रयासों के कारण 2023 से 2025 तक ऐसी घटनाओं में 86 प्रतिशत की कमी आ चुकी है।
उन्होंने कहा कि अधिकारी को इस अभियान को गांवों और ब्लॉकों तक और अधिक प्रभावी ढंग से ले जाएं। उन्होंने कहा कि पंजाब के पर्यावरण को बचाने के लिए गैर सरकारी संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, समाजसेवियों, पंचायतों और किसानों की सक्रिय भागीदारी से पराली जलाने के खिलाफ जागरूकता ला सकते हैं। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर सोशल मीडिया की पहुंच तथा खेत में और खेत से बाहर पराली प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
इस साल 18.81 मिलियन टन पराली होने की संभावना
भगवंत मान ने बताया कि इस वर्ष पंजाब में लगभग 30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की बुआई की गई है, जिससे 18.81 मिलियन टन पराली होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने की घटनाएं 2023 में 36,663 से घटकर 2024 में 10,909 और 2025 में और घटकर 5,114 रह गई हैं। हमें इसे और आगे बढ़ाना है और यह सुनिश्चित करना है कि इस वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में और भी कमी आए।
सीएम ने कहा, विस्तृत डिजिटल योजना भी लागू की जाए
मुख्यमंत्री ने जमीनी स्तर की गतिविधियों के पूरक के रूप में एक व्यापक डिजिटल और मल्टीमीडिया रणनीति अपनाने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि रेडियो जिंगल्स, प्रिंट मीडिया, टेलीविजन, मोबाइल एसएमएस और आउटडोर मीडिया को शामिल करते हुए विस्तृत डिजिटल योजना लागू की जानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि प्रगतिशील किसानों, उत्कृष्ट प्रदर्शन वाली पंचायतों, पैक्स (प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसायटियों) और अन्य हितधारकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया जाना चाहिए।
बैठक में कैबिनेट मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां और हरदीप सिंह मुंडियां, मुख्य सचिव केएपी सिन्हा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव केके यादव, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव डॉ. रवि भगत, कृषि विभाग के सचिव अर्शदीप सिंह थिंद और अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित थे।

