Last Updated on 10 August, 2026 9:58 AM by Sunil Kumar Jha
सटीक समाचार, नई दिल्ली। Sawan Shivratri 2026 Shubha Muhurta: सावन मास की शिवरात्रि पर शुभ मुहुर्त में भगवान भोलेनाथ महादेव का जलाभिषेक करने से कई गुना पुण्य मिलता है। इस बार सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया लग रहा है। ऐसे में भगवान शिव की पूजा-अर्चना और जलाभिषेक में शुभ मुहुर्त का ध्यान रखना श्रेयस्कर होगा।
सावन मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है शिवरात्रि
बता दें कि हिंदू पंचाग के अनुसार, सावन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने से महादेव की विशेष कृपा मिलती है। इस वर्ष सावन शिवरात्रि मंगलवार 11 अगस्त को है। सावन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि मंगलवार प्रात: 4 बजकर 43 मिनट पर शुरू होगी और 12 अगस्त को रात्रि 1 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। पंडितों का कहना है कि उदया तिथि के अनुसार सावन शिवरात्रि 11 अगस्त को मनाई जाएगी।
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शिवरात्रि के दिन भक्त शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और दूध, जल, बेलपत्र आदि चढ़ाते हैं। सावन शिवरात्रि पर मंगलवार को कांवड़ यात्रा का भी समापन होगा। कांवड़िये इस दिन शिवलिंग का गंगाजल से अभिषेक करेंगे। बता दें कि इस बार कावड़ यात्रा 30 जुलाई को शुरू हुई थी। वैसे, सावन महीने का समापन 28 अगस्त हो होगा।
इस बार शिवरात्रि पर भद्रा का साया
सावन शिवरात्रि पर इस बार भद्रा का साया पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दौरान कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। पंडितों के अनुसार, भद्रा में शुभ कार्य और पूजा इत्यादि नेष्ट यानि उचित नहीं माना जाता है, लेकिन भगवान शिव की पूजा अर्चना की जा सकती है। भद्रा से इस पर कोई असर नहीं पड़ता है।
कब से कब तक रहेगा भद्रा का साया
- भद्रा का साया 11 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।
सावन की शिवरात्रि पर शुभ मुहुर्त में शिवलिंग का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करना काफी फलदायी माना जाता है। इस बार शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए कई अत्यंत शुभ मुहुर्त बन रहे हैं। आइये इन शुभ मुहुर्त के बारे में जानें और इसके अनुरूप भगवान भोलेशंकर का जलाभिषेक करें।
सावन शिवरात्रि शुभ मुहुर्त –
- ब्रह्म मुहुर्त : 11 अगस्त – 5 बजकर 23 मिनट से प्रात: 6 बजे।
- अभिजीत मुहुर्त : 11 अगस्त – दोपहर 12 बजकर 6 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट।
- गोधूलि मुहुर्त: 11 अगस्त – 9 बजकर 13 मिनट से 9 बजकर 32 मिनट।
- निशिता काल मुहुर्त : 11-12 अगस्त – मध्य रात्रि 12 बजकर 5 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक। यह पूजा का सर्वोत्तम काल माना जा रहा है।
चार प्रहर पूजा का मुहुुर्त
सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर शिव पूजन का विशेष महत्व है। मान्यता है कि शुभ मुहुर्त में चार प्रहर में जलाभिषेक और पूजन से विशेष शुभ फलों की प्राप्ति होती है। ये हैं शिव पूजन के लिए चार प्रहर-
- प्रथम प्रहर- 11 अगस्त – सायं 7 बजकर 4 मिनट से रात्रि 9 बजकर 45 मिनट तक।
- द्वितीय प्रहर : 11 अगस्त : रात्रि 9 बजकर 45 मिनट से रात 12 बजकर 26 मिनट तक।
- तृतीय प्रहर: 12 अगस्त रात्रि 12 बजकर 26 मिनट से प्रात: 3 बजकर 7 मिनट तक।
- चतुर्थ प्रहर : 12 अगस्त- प्रात: 3 बजकर 7 मिनट से सुबह 5 बजकर 45 मिनट तक।
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