सटीक समाचार, बठिंडा। पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAM ADAMI PARTY) की सरकार ने पंचायतों के सरपंचों के मानदेय (Punjab Sarpanch Salary) में पांच गुना वृद्धि कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Mann) ने सरपंचों का मानदेय दो हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 10 हजार रुपये करने की घोषणा की। यह वृद्धि 15 अगस्त से की गई है। भगवंत मान ने कहा कि सरकार पंचायती लोकतंत्र को मजबूत करने और गांवों की नेतृत्व क्षमता को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बठिंडा में ‘सरपंच मिलनी’ कार्यक्रम में सीएम भगवंत मान ने की घोषणा
बठिंडा में आयोजित ‘सरपंच मिलनी’ कार्यक्रम में भगवंत मान ने कहा कि सरपंच दिन-रात गांवों की सेवा करते हैं और वे अपने अनमोल योगदान के लिए सम्मान के हकदार हैं। ग्रामीण विकास के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। सरपंच खुशहाल और रंगला पंजाब सृजन के सामूहिक प्रयासों का नेतृत्व करते हुए जनता के पैसे का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करें।
अभी मिल रहा है दो हजार रुपये प्रति माह, 15 अगस्त से होगी वृद्धि
उन्होंने कहा, ‘आज हमने एक बड़ा फैसला लिया है। पिछली सरकारों ने सरपंचों को 1,200 रुपये मानदेय देने का वादा किया था, लेकिन उन्होंने यह वादा कभी पूरा नहीं किया। हमारी सरकार ने सरपंचों के लिए 2,000 रुपये का मानदेय सुनिश्चित किया था, जिसे अब बढ़ाकर 10,000 रुपये प्रति माह किया जाएगा।

मुख्यमंत्री कहा कि पंचायतों को लोकतंत्र की नींव के रूप में जाना जाता है। उनमें अपार शक्ति होती है और उनके फैसलों का पूरे गांव द्वारा सम्मान और पालन किया जाता है। गांववासियों के हितों की रक्षा करना और उनकी उम्मीदों को पूरा करना सरपंचों का मूल कर्तव्य है। देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी गांवों में रहती है, इसी कारण पंचायती राज संस्थाओं को लोकतंत्र का प्रकाश पुंज माना जाता है।
सरकार की नीतियों को जमीनी स्तर पर लागू करते हैं सरपंच
उन्होंने कहा कि पंचायती राज संस्थाएं राज्य सरकार की लोकहितैषी और विकासोन्मुख योजनाओं का लाभ नीचे के स्तर तक पहुंचाने का काम करती हैं। नीतियां सरकार द्वारा बनाई जाती हैं तो सरपंच और पंच उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
भगवंत मान ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा उन कार्यों के लिए ग्रांट जारी की जा रही हैं जो जनता के महत्व के हैं और जिनकी सीधी निगरानी पंचायतों द्वारा की जाती है। गांवों के विकास के विभिन्न प्रोजेक्ट भी उनके नेतृत्व में तैयार किए जाते हैं और सरपंचों को इन कार्यों और सेवाओं की तनदेही से निकट निगरानी करनी चाहिए।
सरपंच गुटबाजी से दूर रहकर कार्य करें
मान ने कहा कि सरपंच विकास कार्यों में किसी भी तरह की नाजायज दखलअंदाजी से दूर रहें। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अतीत में गांवों के कई विकास कार्य गुटबाजी के कारण प्रभावित हुए। ग्रामीण क्षेत्रों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए सरपंचों को गांवों में गुटबाजी समाप्त करने को मुख्य प्राथमिकता देनी चाहिए। सरपंचों को गांव के हर निवासी के साथ बराबर का सलूक करना चाहिए और निष्पक्ष होकर फैसले लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि कई सरपंचों ने अपनी समझदारी और दूरदर्शिता से अपने गांवों का नक्शा बदल दिया है।
गांंवों को नशा मुक्त बनाने पर विशेष ध्यान दें सरपंच
उन्होंने कहा, ‘सरपंचों को गांवों को नशा मुक्त बनाने की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए और युवा पीढ़ी को नशों की लत से बचाने में मदद करनी चाहिए। उन्हें गांवों में सांप्रदायिक सद्भावना, शांति और भाईचारे की भावना को मजबूत करने के लिए भी अथक प्रयास करना चाहिए।’
सरकार और गांवाें के बीच पुल
मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सरपंच सरकार और गांवों के बीच एक पुल हैं। ग्रामीण पंजाब के विकास और परिवर्तन में उनकी बहुत बड़ी भूमिका है। गांवों में विकास कार्यों के लिए फंडों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने सरपंचों से अपील की कि वे अपने गांवों में विकास प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दें ताकि राज्य सरकार बिना किसी देरी के इन्हें शुरू कर सके।
मुख्यमंत्री ने कहा, सरपंच का चुनाव राज्य की सबसे कठिन चुनाव होता है क्योंकि वे सीधे तौर पर जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े रहते हैं। एक योग्य सरपंच गांव का नक्शा बदल सकता है और गांववासियों की खुशहाली सुनिश्चित कर सकता है। ‘सरपंच मिलनी’ कार्यक्रम गांव स्तर की समस्याओं को समझने के लिए एक पहल है।
भगवंत मान ने कहा, “गांवों में बड़ी मात्रा में ग्रांट पहुंच रही हैं और वह दिन दूर नहीं जब पूरे पंजाब के गांवों का पूर्ण कायाकल्प देखने को मिलेगा। इन फंडों का उपयोग ऐसे तरीके से किया जाना चाहिए जिससे समाज के हर वर्ग को फायदा हो। गलियों जैसे अन्य कामों को हाथ में लेने से पहले लाइब्रेरी, स्कूलों का निर्माण और सोलर लाइटें लगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि गांवों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जा सके।”

