NMACC और कतर म्जूजियम बच्चों की शिक्षा को देंगे नया आयाम, पांंच साल के लिए रणनीतिक साझेदारी की

NMACC और कतर म्जूजियम बच्चों की शिक्षा को देंगे नया आयाम, पांंच साल के लिए रणनीतिक साझेदारी की
Last Updated: 23 Dec, 2025 at 10:25 PM by Sunil Kumar Jha

Sateek Samachar, मुंबई/दोहा।

नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) और कतर म्यूज़ियम्स ने बच्चों की शिक्षा को नया आयाम देने की तैयारी की है। इसके लिए दोनों ने पांच साल के लिए रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते पर एनएमएसीसी (NMACC) की ओर से रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की निदेशक ईशा अंबानी और कतर म्यूज़ियम्स की चेयरपर्सन शेखा अल मायासा बिन्त हमद बिन खलीफा अल थानी ने हस्ताक्षर किए। समारोह दोहा स्थित नेशनल म्यूज़ियम ऑफ कतर में आयोजित हुआ।

समझौते के तहत ‘म्यूज़ियम-इन-रेज़िडेंस’ कार्यक्रम होंगे शुरू

इस साझेदारी के तहत दोनों देशों में ‘म्यूज़ियम-इन-रेज़िडेंस’ आधारित शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें बच्चों को खेल, कला और अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसर मिलेंगे। कार्यक्रमों का फोकस प्रारंभिक बाल शिक्षा पर होगा। इसके साथ ही शिक्षकों और स्वयंसेवकों को भी नए शिक्षण तरीकों, सामग्री और प्रशिक्षण से बेहतर बनाया जाएगा।

खेल-खेल में सीखने पर ज़ोर, शिक्षकों और स्वयंसेवकों को मिलेगा प्रशिक्षण

एनएमएसीसी (NMACC) भारत में इन कार्यक्रमों को रिलायंस फाउंडेशन के सहयोग से लागू करेगा। कतर के डाडू चिल्ड्रन म्यूज़ियम से जुड़े विशेषज्ञ मास्टरक्लास और व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। हर कार्यक्रम को स्थानीय जरूरतों के अनुसार तैयार किया जाएगा, ताकि इसका लाभ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों तक पहुंच सके।

ईशा अंबानी ने कहा, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर साझा करने का प्रयास

इस अवसर पर ईशा अंबानी ने कहा, ‘नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में हमारा प्रयास है कि दुनिया के श्रेष्ठ विचार भारत तक पहुंचें। इसके साथ -साथ हमारी यह भी कोशिश है कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर साझा किया जाए। कतर म्यूज़ियम्स के साथ यह साझेदारी बच्चों और शिक्षा पर केंद्रित एक सार्थक पहल है।’

ईशा अंबानी ने कहा, ‘हम मानते हैं कि संस्कृति से कल्पनाशक्ति जन्म लेती है और शिक्षा से संभावनाएं साकार होती हैं। इस सहयोग के ज़रिये हम ऐसे सीखने के अनुभव तैयार करना चाहते हैं, जो हर बच्चे को आत्मविश्वास के साथ सीखने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करें।’

इस पहल का लक्ष्य स्कूलों, आंगनवाड़ियों, सामुदायिक केंद्रों तथा ग्रामीण और वंचित इलाकों तक पहुंचना है। बच्चों में रचनात्मकता, जिज्ञासा और सीखने की रुचि बढ़ाने के साथ-साथ यह साझेदारी भारत–कतर के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को भी नई मजबूती देगी।

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