sateeksamachar.com, पटना।
बिहार में भी मुंबई जैसी घटना सामने आई है। राज्य के बक्सर जिले के एक गांव में तरबूज खाने से एक ही परिवार के आठ लोगों की तबीयत बिगड़ गई। इन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पांच लोगों की स्थिति अब ठीक है और तीन का अस्पताल में इलाज चल रहा है। माना जा रहा है कि तरबूज पकाने और उसका रंग बदलने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले केमिकल के कारण यह घटना हुई है।
मुंबई में तरबूज खाने के बाद चार लोगों की हो गई थी मौत
बता दें कि पिछले दिनों मुंबई में तरबूज खाने के बाद एक ही परिवार चार लोगों की मौत हो गई थी। बाद में जांच में तरबूज में जिंक फॉस्फाइड का अंश मिला था। यह केमिकल चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल किया जाता है। अभी इस मामले में पूरी तरह साफ नहीं हाे पाया है कि इन लोागों की माैत का असली कारण क्या था।
तरबूज खाने के बाद उल्टी- दस्त और पेट दर्द शुरू हो गया
जानकारी के अनुसार, बिहार के बक्सर जिले के औद्योगिक थाना क्षेत्र के सोनवर्षा गांव में शनिवार दोपहर इंद्रासन साह नाम के व्यक्ति के परिवार के लोगों ने तरबूज खाया। इसके कुछ देर बाद परिवार के आठ लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। सभी को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और घबराहट शुरू हो गई। आस-पड़ोस के लोगों ने सभी को सरकारी अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद उनका इलाज शुरू हुआ।
इलाज के बाद पांच लोगों की तबीयत ठीक हो गई और तीन का अस्पताल में इलाज चल रहा है।
पांच की स्थिति में सुधार, तीन अब भी अस्पताल में भर्ती
सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी के अनुसार, एक व्यक्ति की स्थिति गंभीर होने के कारण उसे अस्पताल की इमरजेंसी से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। दो महिलाओं का अस्पताल में इलाज किया चल रहा है। इनमें इंद्रासन साह की पत्नी लीलावती देवीऔर पुत्री गीता देवी शामिल हैं।
फूड इंस्पेक्टर को जांच के निर्देश
मामले की जांच के लिए फूड इंस्पेक्टर को जांच का निर्देश दिया गया है। डाक्टरों का मानना है कि संभव है तरबूज को जल्दी पकाने और लाल दिखाने के लिए इस्तेमाल किए गए नाइट्रेट, एरिथ्रोसिन (कृत्रिम रंग) या कार्बाइड जैसे केमिकल के प्रयोग के कारण इन लोगों की तबीयत बिगड़ी। बहुत देर से रखे कटे व धूप में रखे तरबूज में बैक्टीरिया पनप जाते हैं और ऐसे तरबूज खाने से भी स्वास्थ्य बिगड़ने का खतरा रहता है।
तरबूज खरीदने और खाने में रखें ये सावधानियां –
तरबूज स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन इसे खरीदते और खाते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए। इनकी अनदेखी भारी पड़ सकती है।
चटक लाल और छेद वाले से बचें : तरबूज खरीदते समय उसे ठीक से देखें कि उसमें कोई छेद तो नहीं है। इसके साथ ही काटने पर इसका रंग अधिक लाल या चटक लाल तो नहीं है। अगर ऐसा है तो यह इंजेक्शन लगाया तरबूज हो सकता है। तरबूज को पकाने और मीठा बनाने के लिए केमिकल का इस्तेमाल करने के वास्ते इंजेक्शन लगाया जाता है।
तरबूज के ऊपर सफेद पावडर तो नहीं : देखें कि तरबूज की ऊपरी सतह पर सफेद या किसी अन्य रंग का पावडर तो नहीं है। यह कीटनाशक हो सकता है। अगर ऐसा दिखाई दे तो तरबूज को अच्छी तरह धोने के बाद ही खाएं।
तरबूज को काटने के बाद पानी में डालकर जांचें : तरबूज का एक टुकड़ा काटें और इसे पानी में डालें। यदि पानी थोड़ी ही देर में लाल हो जाता है तो समझ लें कि इसे लाल दिखाने के लिए कृत्रिम रंग का इस्तेमाल किया गया है। इस तरबूज को कतई न खाएं।
तरबूज को पहले पानी में डालकर जांचें : बाजार से लाए तरबूज का इस्तेमाल करने से पहले उसे एक से दो घंटे तक ठंडे पानी में डुबोकर रखें। इससे तरबूज की गर्मी निकल जाएगी और इसकी बाहरी सतह पर मौजूद रसाायन भी हट जाएगा।
कटा हुआ तरबूज न खरीदें : भूलकर भी कटा हुआ तरबूज न खरीदें। कई बार विक्रेता तरबूज की लाली दिखाने के लिए उसमें छोटा कट लगाकर रखते हैं। इसके साथ ही बाजार में कटा हुआ तरबूत भी बिकता रहता है। ऐसे तरबूत कदापि न खरीदें। इनमें धूल पड़ते रहते हैं और उन पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। इसके साथ ही इनमें बैक्टिरिया पनपते हैं। ये संक्रमण कारक हो सकते हैं।
कटा तरबूज धूप या कमरे के तापमान पर न रखें : तरबूज को काटने के बाद धूप में या बहुत देर तक कमरे के तापमान पर न रखें। ज्यादा पुराना और देर तक रखा तरबूज भी नहीं खाना चाहिए। कटा तरबूज फ्रिज में रखना हो तो इसे ठीक से ढ़क कर रखें1
