भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले- मंडियों में किसानों को किया जा रहा प्रताड़ि‍त, कांग्रेस विधायक करेंगे दौरे

भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले- मंडियों में किसानों को किया जा रहा प्रताड़ि‍त, कांग्रेस विधायक करेंगे दौरे

Sateek Samachar, चंडीगढ़ ।

हरियााणा कांग्रेस ने राज्‍य में फसलों की खरीद को लेकर राज्‍य की भाजपा सरकार पर किसानों को प्रताडित करने का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई। इसमें फैसला किया गया कि गेहूं और सरसों की खरीद में किसानों को पेश आ रही दिक्कतों को जानने के लिए कांग्रेस के विधायक प्रदेशभर की मंडियों का दौरा करेंगे और किसानों की आवाज को उठाएंगे। हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार हर बार फसल खरीद के नाम पर सिर्फ घोटाला करती है।

हरियाणा कांग्रेस विधायक दल की बैठक, मई में होंगी जिलास्‍तरीय बैठकें

बैठक में फैसला लिया गया है कि मई महीने में पार्टी पूरे प्रदेश में जिला स्तरीय बैठकें करेगी। नवनिर्वाचित राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने समर्थन के लिए सभी विधायकों का धन्यवाद किया गया। इसके साथ ही पार्टी ने निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग को लिखित शिकायत देने का फैसला लिया है।

कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन अधिकारी ने गलत तरीके से कांग्रेस विधायकों की वोट को कैंसिल किया था। वोट कैंसिल के मामले को हाईकोर्ट में भी लेकर जाया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष रॉव नरेंद्र सिंह ने बताया कि क्रॉस वोटिंग को लेकर अनुशासन समिति की बैठक 3 अप्रैल को होगी ।

हुड्डा का भाजपा सरकार पर हमला

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा सरकार हर बार किसानों को परेशान करने का नया तरीका ढूंढ़ लाती है। इसबार भी उसने ऐसा किया है। इस बार गेहूं खरीद के लिए नया नियम बनाया गया है कि ट्रैक्टर की नंबर प्लेट की फोटो समेत किसानों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी होगा। इतना ही नहीं, किसान को वैरिफाई करने के लिए तीन-तीन गारंटर भी चाहिए होंगे। मानो, ये अनाज मंडी नहीं बल्कि कोई हाई सिक्युरिटी जोन या जेल हो।

‘सरकार हमेशा खरीद में अडंगा लगाने की तरकीब खोज लेती है’

हुड्डा ने कहा कि जल्द से जल्द और गेहूं की पूरी खरीद सुनिश्चित करने की बजाए, सरकार हमेशा खरीद में अड़ंगा लगाने की तरकीब निकालती रहती है। किसानों के लिए बायोमेट्रिक और गेट पर ही गेट पास काटने का नियम ऐसा है, जो व्‍यावहारिक रूप से लागू करना असंभव है। किसान एक मेहनतकश वर्ग है, जिस वजह से बहुत से किसानों की उंगलियों के निशान तक घिस जाते हैं। कई बार बैंकों तक में उनकी उंगलियों के निशान मैच नहीं होते या फिर मैच करने में उनका समय लगता है।

उन्‍होंने कहा कि ऐसे में अगर यही काम मंडी के गेट पर होगा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लग जाएगी, जो जाम का कारण बनेगी। ज्यादातर किसान किराये के ट्रैक्टर लेकर मंडी आते हैं। अगर जाम की वजह से या वैरिफिकेशन में देरी की वजह से खरीद में देरी हुई तो ट्रैक्टर का किराया कौन देगा? जाहिर तौर पर ये बोझ किसान पर पड़ेगा और पहले से कर्ज में डूबे किसान को और आर्थिक नुकसान होगा।

मडियों में पहले दिन ही खरीद हुई ठप

हुड्डा ने कहा कि सरकार के इस बेवजह अड़चनों की पोल भी खुल चुकी है। मंडियों में सरकारी खरीद पहले ही दिन ठप हो गई। कारण ये कि सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियम और ई-खरीद पोर्टल दोनों फेल हो गए। मंडियों में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन ई-पोर्टल अपडेट न होने के कारण गेट पास तक जारी नहीं हो सके।

उन्‍होंने कहा कि नए नियमों के तहत किसानों को गेट पास के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर नंबर और फसल की फोटो अपलोड करनी थी, लेकिन पहले ही दिन सिस्टम ठप हो गया। नतीजा यह रहा कि किसान मंडियों में घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नहीं हो सकी। आढ़ती एसोसिएशन ने भी बताया है कि एक गेट पास बनाने में 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है, जिससे एक दिन में सीमित संख्या में ही किसानों की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में और बड़ी अव्यवस्था की आशंका है।

हुड्डा ने मंडियों की व्यवस्था की ओर भी सरकार का ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि वह लगातार किसानों से बात कर रहे हैं। मंडियों में न बारदाना है, न तिरपाल. ना लेबर, न किसानों के लिए कोई सहूलियत और न ही अबतक ट्रांसपोर्ट के टेंडर हुए हैं। ऐसे में जो फसल आएगी वे मंडियों में ही पड़ी रहेंगी और उसका उठान नहीं होगा। उठान नहीं होगा, तो किसानों की पेमेंट नहीं होगी। कुल मिलाकर ये सरकार ऐसे हालात पैदा कर रही है कि किसान मंडी आना ही छोड़ दें। मंडी क्या, ये सरकार तो चाहती है कि किसान खेती ही छोड़ और इस सेक्टर को भी पूरी तरह पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दे।

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