Punjab Finance: सातवें पंजाब वित्‍त आयोग की बैठक, भगवंत मान बोले- स्‍थानीय निकायों का मजबूत वित्‍तीय ढांचा जरूरी

मुख्‍यमंत्री भगवंत मान ने सातवें पंजाब वित्‍त आयोग की बैठक की अध्‍यक्षता की। (फोटो सौजन्‍य डीपीआर)
मुख्‍यमंत्री भगवंत मान ने सातवें पंजाब वित्‍त आयोग की बैठक की अध्‍यक्षता की। (फोटो सौजन्‍य डीपीआर)
Last Updated: 22 Sep, 2026 at 10:55 PM by Sunil Kumar Jha

सटीक समाचार, चंडीगढ़। Punjab Finance Commission: सातवें पंजाब वित्‍त आयोग की बैठक में स्‍थानीय निकायों के वित्‍तीय ढांचे पर चर्चा की गई। आयाेग इस संबंध में अगले साल सितंबर में (सितंबर 2027) में अपनी सिफारिशें देगा। बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए मजबूत वित्तीय ढांचे की वकालत की। उन्‍होंने कहा कि स्‍थानीय निकायोें का मजबूत वित्‍तीय ढांचा जरूरी है।

सीएम भगवंत मान ने आयोग की बैठक की अध्‍यक्षता की

नवगठित सातवें पंजाब वित्त आयोग के साथ बैठक की अध्यक्षता की। उन्‍होंने कहा कि बैठक में उन्होंने कहा कि वित्तीय स्थिरता और जमीनी स्तर पर प्रभावी शासन सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के लिए अनुशासित वित्तीय मार्ग और टिकाऊ वित्तीय संस्थाओं की आवश्यकता है। आयोग का गठन पंचायतों/नगरपालिकाओं और राज्य के बीच करों, शुल्कों, रोड टैक्स और अन्य की हिस्सेदारी के लिए विशेष सिफारिशें करने के अलावा इन नागरिक संस्थाओं की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए अन्य सिफारिशें करने के बास्‍ते किया गया है।

आयोग सथानीय निकायों का वित्‍तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्‍च‍ित करेगा

उन्‍होंने कहा कि आयोग पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं को वित्तीय विकेंद्रीकरण सुनिश्चित करने का संवैधानिक माध्यम है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 73वें संविधान संशोधन के तहत बनाई गईं जमीनी स्तर की संस्थाओं के पास अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने के लिए वित्तीय क्षमता हो।

उन्होंने कहा कि राज्य वित्त आयोग के पास पंचायती राज संस्थाओं और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की जांच करने और स्थानीय सरकारों की वित्तीय देनदारियों तथा वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए एक ढांचे की सिफारिश करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

सीएम ने कहा- राज्‍य सरकार आयोग को पूरा सहयोग देगी

उन्होंने कहा कि आवश्यक नागरिक सेवाएं प्रदान करने और स्थानीय बुनियादी ढांचे के निर्माण में पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों की बढ़ती जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए संसाधनों के आवंटन की एक पारदर्शी, न्यायसंगत और टिकाऊ प्रणाली की आवश्यकता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आयोग को पूरा सहयोग और सहायता देगी। इस अवसर पर अतिरिक्त मुख्य सचिव आलोक शेखर, सचिव ग्रामीण विकास, सचिव स्थानीय निकाय और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

अब से कब तक है सातवें पंजाब वित्‍त आयोग का कार्यकाल

  • आयोग का पांच वर्ष का कार्यकाल 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हुआ और यह 30 सितंबर, 2027 तक अपनी रिपोर्ट उपलब्ध करवाएगा। व्यापक जनहित में आयोग उस आधार का भी संकेत देगा, जिस पर वह अपने निष्कर्षों पर पहुंचा है।

सातवें वेतन आयोग के कार्य का यह होगा दायरा

  • आयोग स्थानीय निकायों की आय क्षमता, व्यय संबंधी जिम्मेदारियों और वित्तीय आवश्यकताओं का व्यापक मूल्यांकन करेगा।
  • यह स्‍थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करने तथा उन्हें अपने कार्यों को प्रभावी ढंग से निभाने में सक्षम बनाने के लिए व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर सिफारिशें करेगा।
  • आयोग गैर-उत्पादक राजस्व व्यय को कम करने के उपायों और पूंजीगत संसाधनों के कुशल एवं प्रभावी उपयोग के लिए प्रशासन की गुणवत्ता तथा तकनीकी सहायता में सुधार करने के कदमों की सिफारिश भी करेगा।

वित्‍त आयोग टैक्‍सों व टोल का स्‍थानीय निकायों में बंटवारा कर सकता है

  • आयोग के पास यह अधिकार है कि वह राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों, शुल्कों, टोल और फीस की कुल प्राप्ति को राज्य और पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच बांट सकता है।
  • आयोग सभी स्तरों पर पंचायतों/नगरपालिकाओं के बीच ऐसी प्राप्तियों में हिस्सेदारी के वितरण की सिफारिश भी करेगा।

आयोग में ये लोग हैं शामिल

  • बता दें कि राज्य सरकार ने पंजाब के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव के. शिव प्रसाद की अध्यक्षता में ‘पंचायतों और नगरपालिकाओं के लिए पंजाब वित्त आयोग अधिनियम, 1994’ की धारा 3(1) के तहत सातवें पंजाब वित्त आयोग का गठन किया है।
  • आयोग में शौकत राय को विशेषज्ञ सदस्य, प्रशासनिक सचिव (ग्रामीण विकास एवं पंचायतें, पंजाब सरकार) और प्रशासनिक सचिव (स्थानीय निकाय, पंजाब सरकार) पदेन सदस्यों के रूप में तथा विशेष सचिव (वित्त, पंजाब सरकार) को सदस्य सचिव के रूप में शामिल किया गया है।

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