सटीक समाचार, चंडीगढ़। Punjab Politics: शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के बयान से पंजाब की राजनीति फिर गर्मा गई है। इससे शिअद और भाजपा के बीच दोबारा गठबंधन की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर ने कहा कि उनके लिए पंजाब सर्वोपरि है और शिअद की विचारधारा से सहमति रखने वाले दल के लिए हमारे दरवाजे खुले हैं।
राज्यपाल से मुलाकात के बाद कहा, विचारधारा से सहमति दलों के लिए दरवाजे खुले हैं
सुखबीर सिंह बादल ने पार्टी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल के साथ चंडीगढ़ में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से मुलाकात की और परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले में ज्ञापन दिया। राज्यपाल से मुलाकात के बाद सुखबीर सिंह बादल ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) के लिए पंजाब सबसे ऊपर है। हमारे लिए पंजाब के हित सबसे ऊपर है।
कहा- पंजाब में पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बेहद खराब हुई
सुखबीर बादल ने कहा कि हम पंजाब को प्राथमिकता देते हैं और इसके लिए हर संभव कदम उठाएंगे। जो दल हमारी सोच और विचारधारा से सहमत होंगे उनके साथ जाने में कोई दिक्कत नहीं है। पंजाब की पिछले कुछ वर्षों में स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की सरकारों ने राज्य को बहुत नुकसान पहुंचाया है। नशे का कारोबार संरक्षण के कारण बेकाबू हो गया है।
सुखबीर ने कहा, कांग्रेस और आप से नहीं हो सकता शिअद का समझौता
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पंजाब की दुश्मन पार्टियां हैं। इन्होंने पंजाब के हितों को काफी नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में कांग्रेस व आप से शिरोमणि अकाली दल का कोई समझौता नहीं हाे सकता। पंजाब को अभी की स्थिति से उबारने के लिए शिअद की विचारधारा से सहमति रखनेवाली पार्टियों से हम ओपन हैंं।
बादल के बयान से पंजाब की राजनीति गर्माई
सुखबीर बादल के इस बयान के बाद पंजाब में राजनीति फिर गर्माती लग रही है। अभी दो-तीन दिन पहले अमित शाह पंजाब आए थे तो उन्होंने आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पर हमले किए थे, लेकिन शिअद के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा था। इसके बाद सुखबीर के बयान के बाद पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा-शिअद गठबंधन की चर्चाओं को फिर बल मिला है।
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पंजाब में शिअद-भाजपा तीन बार बना चुकी हैं गठबंधन में सरकार
बता दें कि पंजाब में फरवरी, 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा और शिरोमणि अकाली दल तीन बार पंजाब में गठबंधन सरकारें चला चुकी हैं। इससे पहले अकाली दल ने दो बार जनसंघ के साथ मिलकर सरकारें बनाई और एक बार जनता पार्टी के साथ गठबंधन की सरकार बनाई थी। किसान आंदोलन के दौरान 2020 में दोनों दलों का गठबंधन टूट गया।
शिरोमणि अकाली दल ने पंजाब में कब गठबंधन की सरकारें बनाईं
| किस पार्टी से | कब से कब तक | मुख्यमंत्री कौन बने थे |
| भारतीय जनसंघ | 1967 में मार्च से नवंबर तक | जस्टिस गुरनाम सिंह (शिअद) |
| भारतीय जनसंघ | 1969 से 1971 तक | जस्टिस गुरनाम सिंह और प्रकाश सिंह बादल (शिअद) |
| जनता पार्टी | 20 जून, 1977 से 17 फरवरी, 1980 तक | प्रकाश सिंह बादल (शिअद) |
| भारतीय जनता पार्टी | 12 फरवरी, 1997 से 26 फरवरी, 2002 तक | प्रकाश सिंह बादल (शिअद) |
| भारतीय जनता पार्टी | 2 मार्च, 2007 से 14 मार्च, 2017 तक | प्रकाश सिंह बादल (शिअद) |
| भारतीय जनता पार्टी | 14 मार्च, 2012 से 16 मार्च, 2017 तक | प्रकाश सिंह बादल (शिअद) |
ज्ञापन में ये मुख्य मांगें की गई हैं-
सुखबीर बादल द्वारा शिअद के प्रतिनिधिमंडल के साथ राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया को सौंपे ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें की हैंं। सुखबीर ने कहा कि शिअद प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को पंजाब में बेकाबू नशे के कारोबार पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाने की मांग की। उन्होंने आप सरकार पर नशा तस्कराें और इसका कारोबार कर रहे लोगों को संरक्षण देने का आरोप भी लगाया।
| – पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को तुरंत बर्खास्त किया जाए। |
| – नशीले पदार्थों के कारोबार को संरक्षण देने वाले मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। |
| – नशा विरोधी मुहिम चला रहे भाई परिवंदर सिंह की हत्या के बाद उनकी पत्नी बीबी मनप्रीत कौर को श्रेणी-1 की नौकरी दी जाए। इसके साथ ही मानवीय आधार पर उनको दो करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। |
| – सीबीआई जांच का दायरा बढ़ाया जाए। इसमें तूर बंजारा (दिरबा) के गुलजार सिंह का मामला शामिल किया जाए, जिन्होंने ने मरणासन्न हालत में दिए अपने बयान में मंत्री हरपाल चीमा का नाम लिया था। इसके साथ ही सीबीआई जांच के दायरे में श्री हरगाबिंदपुर साहिब के बिक्रमजीत सिंह का मामला भी शामिल किया जाए, जिनकी नशीले पदार्थों के कारोबार का विराेध करने पर हत्या कर दी गई थी। |

