सटीक समाचार, पानीपत। Jain Religion: जिले में विभिन्न स्थानाें पर जैन स्थानकों में आत्मा शुद्धि, संयम और साधना का आठ-दिवसीय महापर्व पर्यूषण बड़े जप-तप, श्रद्धा व भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह 8 सितंबर को शुरू हुआ था और 15 सितंबर तक चलेगा। महापर्व में भगवान महावीर पर कलाकारों द्वारा नृत्य नाटिका और अन्य प्रस्तुतियां दी जाती हैं।
मतलोडा, समालखा, पानीपत गांधी मंडी व अग्रवाल मंडी और राजखेड़ी जैन स्थानकाें में कार्यक्रम
यह महापर्व मतलोडा, समालखा, पानीपत की गांधी मंडी व अग्रवाल मंडी तथा राजाखेड़ी में जैन स्थानकों में मनाया जा रहा है। इन स्थानाकों में विविध कार्यकम आयोजित होते हैं। इसके साथ ही प्रतिदिन अंतगड़सूत्र व कल्पसूत्र की वाचना की जाती है।

अंतगड़ सूत्र में 90 महापुरुषों का वर्णन, 24 तीर्थंकराें की जीवन चरित्र
बता दें कि अंतगड़सूत्र में भगवान अरिष्टनेमी व भगवान महावीर के धर्म-शासन काल के 90 ऐसे महापुरुषों का वर्णन है जिन्होंने उसी भव में दीक्षा लेकर और उत्कृष्ट संयम पालकर अपनी आत्मा का कल्याण कर लिया। इन महापुरुणों में अधिकतर राजघरानों से थे। इसी तरह कल्पसूत्र में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के जीवन चरित्र व उनकी जीवनियां हैं। इसमें जैन साधु साध्वियां जी महाराजों की आचार संहिता का भी वर्णन है।

अभ्रिहधारी डा. राजेश मुनि महाराज के महाध्यान से शुरू होता है आरंभ
गांधी मंडी में दिन का प्रारंभ अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि जी महाराज के महाध्यान से होता है। इसके बाद वह सबको मंगल पाठ करवाते हैं। यहां अंतगड़सूत्र की वाचना परम सेवाभावी राजेंद्र मुनि जी महाराज करते हैं।
इसका मूल पाठ प्राकृत भाषा में है। इस सूत्र की हिंदी में व्याख्या एवं कल्पसूत्र की विवेचना अभिग्रहधारी डॉ. राजेश मुनि करते हैं। महासाध्वी समता जी महाराज एवं साध्वी भविका जी महाराज भजन आदि के माध्यम से इस कार्य में सहयोग करते हैं।

कलाकारों ने काव्य नाटिका प्रस्तुत की
इस समय ऐसा लगता है कि जिले के जैन स्थानकों में भगवान महावीर का धर्म शासन चल रहा है। कार्यक्रम में छह प्रतिभाशाली कलाकारों ने जन्मोत्सव को एक काव्य नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया। इनमें मोनिका जैन, मन्नू जैन, अक्षिता जैन, आराध्या जैन, वश परिशु जैन व समक्ष जैन ने अपने अभिनय से सबका दिल जीत लिया।

नाटिका से नवकार मंत्र के महात्म्य को साकार किया
कुछ अन्य कलाकारों ने नवकार मंत्र का महात्म्य बताने के लिए एक सुंदर नाटिका प्रस्तुत की। इसमें खास बात यह है कि इसके सभी छह पात्र पुतथला वाले सुशील जैन के परिवार से हैं। ये हैं मंजू जैन, अक्षिता जैन, रिद्धि जैन, अवनी जैन, आराध्या जैन व परिशु जैन।
भगवान अरष्टिनेमी एवं राजुल मती के मार्मिक संवाद की प्रस्तुति
दो कलाकारों नेहा जैन एवं साक्षी जैन ने भगवान अरिष्टनेमी एवं राजुल मती के बीच मार्मिक संवाद प्रस्तुत किया। प्रसंग यह था कि जब राजकुमार अरिष्टनेमी विवाह के लिए जा रहे थे तो रास्ते में उन्हें पशुओं का करुण क्रंदन सुनाई दिया। उन्हें पता चला कि उनके बारातियों के भोजन के लिए उन्हें बाड़े में रखा गया है।

इससे वह करुणा से भर गए और बाड़े में बांधे गए सभी पशुओं को मुक्त करा दिया। इसके बाद वह वैराग्य की ओर मुड़ गए और मुनि बन गए। इस संवाद में राजकुमारी राजुलमती स्वयं को त्यागे जाने का कारण पूछती हैं और अंततः वह भी संसार से विरक्त होकर साध्वी बन जाती हैं।
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ये लोग विशेष रूप से रहे मौजूद
इस अवसर पर भगत महावीर जैन, डॉ. एपी जैन, जगदीश जैन, डॉ. ईश्वर जैन, रामनिवास जैन, ओम प्रकाश जैन, राजेंद्र जैन, वीरेंद्र जैन, कालू जैन, सुशील जैन, आशा जैन, किरण जैन, सुलोचना जैन, सरोज जैन सहित आदि भारी संख्या में श्रद्धालु जन मौजूद रहे।


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