सटीक समाचार, चंडीगढ़। Haryana Assembly New Update: हरियाणा विधानसभा के मॉनसून सत्र की गुरुवार को भारी हंंगामे के साथ शुरूआत हुई। कांग्रेस विधायकों को पोस्टर के साथ अंदर आने से रोक दिया गया। वे पूर्व सीएम और नेता विपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में प्रदर्शन करते हुए गेट तक पहुंचे थे। कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि उनको अंदर आने नहीं दिया जा रहा था और उनके साथ धक्कामुक्की हुई। हुड्डा ने भी अपने साथ मिसबिहेव और धक्कामुक्की किए जाने की बात कही। सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी गई है।
सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी
सदन में पिछले दिनों दिवंगत हुए लोगों और हस्तियों को श्रद्धांजलि देने व शोक प्रस्ताव पढ़े जाने के बाद हंंगामा शुरू हो गया। कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने कहा कि विधानसभा के बाहर कांग्रेस विधायकों को धक्के मारे गए। भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने स्पीकर से कहा, ‘ हमारे साथ मिसबिहेव हुआ। आपने धक्के मारने के लिए बदमाश भेजे थे क्या? इस पर स्पीकर ने कहा कि नियम- कायदे देखना मेरा काम है। मुझे जानकारी लेनी पड़ेगी।
पांच विधायकों को छोड़कर कांग्रेस के सभी विधायक काले कपड़े पहनकर विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने हंगामा करना शुरू कर दिया। सदन पहले 20 मिनट और फिर 12.30 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सीएम नायब सिंह सैनी बोले- प्रदेश की जनता इनके कारनामे देख रही है
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष के लोग काले कपड़े पहनकर आए हैं। उनकी मर्जी है जो पहन कर आएं, लेकिन प्रदेश के लोग उनके काले कारनामे नहीं भूले हैं। लोग इनके कारनामे देख रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस शासन के मामलों को भी उठाया।

इन आठ कांग्रेस विधायकों को किया गया ‘नेम’
बाद में कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक वेल में आ गए। विधानसभा स्पीकर ने आठ कांग्रेस विधायकों को नेम कर दिनभर की कार्यवाही से सस्पेंड कर दिया। ये विधायक हैं- इंदुराज नरवाल, देवेंद्र हंस, शकुंतला खटक, आदित्य सुरजेवाला, विकास सहारण, जस्सी पेटवाड़ , गोकुल सेतिया और बलराम दांगी। स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने कांग्रेस विधायक आफताब अहमद को भी चेतावनी दी।
कांग्रेस विधायक प्रदर्शन करते हुए विधानसभा गेट तक
इससे पहले कांग्रेस के विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में नारे लगाते हुए विधानसभा तक मार्च किया। उन्होंंने मॉनसून सत्र के पहले दिन काले कपड़े पहनकर राम मंदिर चढ़ावा चोरी और नीट आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर पर विद्यार्थियों पर कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने विधायकों को रोकने के लिए जगह-जगह बैरिकेटिंग की और कांग्रेस का आरोप है कि इस दौरान बल प्रयोग भी किया गया। इससे कई विधायकों को चोटें आईं।

ऐसा लग रहा था, जैसे सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे थे: हुड्डा
पत्रकारों से बातचीत में पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सरकार की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि चाहे जंतर-मंतर हो या विधानसभा मार्च, देश के हर नागरिक और जनप्रतिनिधि को अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। उनके साथ किसी भी तरह का बलप्रयोग संविधान और लोकतंत्र विरोधी है। जिस तरह पुलिस मुझे और विधायकों को धक्के मार रही थी, ऐसा लग रहा था कि सरकार ने पुलिस की वर्दी में गुंडे भेज रखे थे।
उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक और चढ़ावा चोरी, दोनों ऐसे मुद्दा हैं, जिनसे भाजपा सरकार लगातार आंख चुराती रही। लेकिन जब विपक्ष ने आवाज उठाई और जनता आंदोलनरत हुई तो सरकार ने जांच व कार्रवाई की खानापूर्ती की। लेकिन, उसपर भी कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस की मांग है कि चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। क्योंकि ये मामला भगवान राम के प्रति आस्था रखने वाले जन-जन को परेशान करने वाला है।
उन्होंने कहा कि सरकार को बताना चाहिए कि जांच शुरू करने में देरी क्यों हुई? आरोप जून 2026 के शुरू में सार्वजनिक हुए, 13 जून को एसआईटी बनी। प्रारंभिक रिपोर्ट 23 जून को आई, लेकिन FIR 25 जून को दर्ज हुई। आरोप सामने आने के बाद, कार्रवाई में देरी क्यों हुई? क्या इससे सबूत नष्ट होने या प्रभावित होने का जोखिम था?
उन्होंंने कहा कि सवाल ये भी है कि बड़े नामों को क्लीन चिट कैसे मिली? क्या सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त है? क्या निचले स्तर के कर्मचारी इतने हाईटेक और कई लेयर की सिक्युरिटी में करोड़ों की चोरी कर सकते हैं?
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर कहा कि सरकार ने जिस तरह पैलेट गन से घायल हुए बच्चे की FIR तक लिखने से मना कर दिया था, उसी से सरकार की क्रूर मंशा स्पष्ट हो गई थी। लेकिन, जब राहुल गांधी ने इसका विरोध किया और थाने में धरना दिया, तब सरकार ने मजबूरी में FIR दर्ज की। हरियाणा कांग्रेस भी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी और बीजेपी की जवाबदेही तय करेगी।
उन्होंंने कहा कि हरियाणा पेपर लीक का गढ़ बन चुका है। हरियाणा में 30 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं। इनमें प्रमुख हैं — HCS (2023), CET (2023), SI भर्ती (मार्च 2022), डेंटल सर्जन (दिसंबर 2021), PGI रोहतक परीक्षा (2025), पुलिस कांस्टेबल भर्ती (अगस्त 2021), ग्राम सचिव भर्ती (12 जनवरी 2021), क्लर्क भर्ती (दिसंबर 2016), बिजली विभाग क्लर्क भर्ती, एक्साइज इंस्पेक्टर (दिसंबर 2016), एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर (जुलाई 2017), कंडक्टर भर्ती (सितंबर 2017), ITI इंस्ट्रक्टर भर्ती, आबकारी इंस्पेक्टर, नायब तहसीलदार भर्ती, PTI भर्ती, HTET (नवंबर 2015), केंद्रीय विद्यालय संगठन प्राइमरी टीचर (अक्टूबर 2015), असिस्टेंट प्रोफेसर कॉलेज भर्ती घोटाला (फरवरी 2017), B-फार्मेसी पेपर लीक घोटाला (जुलाई 2017), HBSE बोर्ड 10वीं-12वीं पेपर लीक (2025), HTET 2026 (जिसमें बिना सील के पेपर बांटे गए और लीक की आशंका जताई गई) आदि।


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