नमिता झा (सटीक समाचार), मुंबई। Sawan 2026 special New Story : देश में भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंग हैं। इनमें पहले ज्योतिर्लिंग सोमनाथ की शोभा अरब सागर से उठती ऊंची तरंंगों से निराली दृष्टिगोचर होती है। यहां शिव की कृपा बरसती है और श्रद्धालुओं को इसकी स्वत: अनुभूति होती है। मान्यता है कि सोमनाथ में सच्चे मन व श्रद्धा से पूजा व दर्शन करने से जन्म जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और रोगों से मुक्ति मिलती है।
सोमनाथ मंदिर पर कई बार हुए आक्रमण
विदेशी आक्रमणकारिणों ने इस मंदिर पर कई बार हमले किए और लूटपाट की, लेकिन इसकी भव्यता और वैभव कभी कम न हुई। 10वीं सदी से 18वीं सदी तक इस मंदिर पर कई विदेशी आक्रामणकारियों ने हमले किए। महमूद गजवनी ने 1026 में यहां हमला कर भारी लूटपाट की थी।
आक्रमणों से मंदिर को हुए नुकसान के कारण इसका कई बार पुनर्निर्माण हुआ। यह अरब सागर के किनारे गुजरात के वेरावल बंदगाह के पास प्रभास पाटन में स्थिति है। समुद्र किनारे होने से मंदिर की शोभा देखते ही बनती है।
सोमनाथ से जुड़ी पौराणिक कथा क्या है?
- धार्मिक कथाओं के अनुसार, दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्ति के लिए चंद्रदेव ने वेरावल के प्रभास क्षेत्र में प्रथम शिवलिंग की स्थापना की और भगवान शंकर की कठोर तपस्या की। कथा के अनुसार, दक्ष प्रजापति ने अपनी 27 पुत्रियों का विवाह चंंद्रदेव से कर दिया था। दक्ष की 27 पुत्रियाें काे 27 नक्षत्रों का प्रतीक माना जाता है। चंद्रदेव अपनी पत्नियों में सबसे ज्यादा प्रेम रोहिणी से करते थे। चंद्रदेव की अन्य 26 पत्नियों ने अपने पिता दक्ष प्रजापति से इसकी शिकायत की।
- पौराणिक कथा के अनुसार, दक्ष इससे बेहद नाराज़ हुए और चंद्रमा को क्षय होने का शाप दे दिया। चंद्रदेव का तेज ख़त्म होने लगा। इस पर चंद्रदेव ने ब्रह्मा जी के सुझााव पर प्रभास क्षेत्र में भगवान शंकर की कठिन तपस्या की। शिव प्रसन्न हुए। शिवजी ने चंद्रदेव को श्राप से राहत प्रदान की और कहा कि दक्ष के शाप को पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता लेकिन कृष्ण पक्ष में तुम्हारी आभा कम होती जाएगी और शुक्ल पक्ष में तुम्हारी ज्योति बढ़ती जाएगी।
मंदिर के निर्माण को लेकर क्या मान्यताएं हैं?
- इस मंदिर के निर्माण को लेकर कई पौराणिक मान्यताएं और कथाएं हैं। इनके अनुसार, चंद्रदेव ने सोने का मंदिर बनवाया। बाद में रावण ने चांदी का मंदिर बनवाया। फिर भगवान श्री कृष्ण ने चंदन की लकड़ी से मंदिर बनवाया। बाद में गुजरात के सोलंकी राजा भीमदेव ने यहां पत्थर का मंदिर बनवाया।
वर्तमान मंदिर का कब निर्माण हुआ?
- देश स्वतंत्र हुआ तो सरदार वल्लभ भाई पटेल की पहल पर वर्तमान मंदिर के भव्य स्वरूप का निर्माण कराया गया। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने सन् 1951 में 11 मई को नवनिर्मित मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की थी।
- इसके बाद 19 अप्रैल 1995 में तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने पूर्णत:पुनर्निमित मंदिर को राष्ट्र को समर्पित किया।
मंदिर की विशेषताएं
- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग काे महामेरू प्रसाद वास्तुकला यानि चालुक्य शैली में बनाया गया है।
- मंदिर का भव्य शिखर 155 फीट है।
- ऊपर शिखर पर लगे कलश का भार करीब 10 टन है। इस पर लगे ध्वजदंड की लंबाई लगभग 27 फीट है।
- साेमनाथ मंदिर के समुद्र वाले हिस्से की तरफ एक स्तंभ है। इसे वाण स्तंभ (Arrow Pillar) कहते हैं। इसकी अद्भूत बात है। इस स्तंभ पर दक्षिणी ध्रुव यानि अंटार्कटिका (Antarctica) की ओर संकेत करता एक तीर बना है। कहा जाता है कि इस जगह से अंटार्कटिका तक समुद्र में कई द्वीप या भूभाग नहीं है।
- सोमनाथ मंदिर के निकट कपिला, सरस्वती और हिरण नदियों का संगम है। इसमें श्रद्धालु स्नान करते हैं।
- मंदिर के निकट वल्लभघाट सूर्यास्त स्थल है। शाम में मंदिर परिसर में ‘जय सोमनाथ’ लाईट एंड साउंड शो होता है।
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सोमनाथ के निकट के अन्य दर्शनीय स्थल कौन से हैं?
- भल्का तीर्थ। मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान कृष्ण के पैर में शिकारी का तीर लगा था और उन्होंने अपनी मानव लीला का अंत किया था।
- अहिल्याबाई मंदिर। इसे पुराना सोमनाथ मंदिर भी कहते हैं। कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब के डर से सोमनाथ मंदिर में पूजा बंंद हो गई थी। इसे देखते हुए इंदौर की उस समय की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने मुख्य मंदिर के ठीक बगल में एक गुप्त भूमिगत सोमनाथ मंदिर बनावाया, जिससे महादेव की पूजा निर्विघ्न होती रहे।
- गीता मंदिर। त्रिवेणी तट पर बना गीता मंदिर अद्भूत है। इसके स्तंभों पर श्रीमद्भागवत गीता के 18 अध्याय खुदे हुए हैं।
सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर कैसे पहुंचें ?
- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर रेल, सड़क और हवाई यात्रा तीनों माध्यम से पहुंंच सकते हैं।
- सोमनाथ मंदिर वेरावल रेलवे स्टेशन से करीब 7 किलोमीटर दूर है। ट्रेन से वेरावल स्टेशन पहुंचें और वहां से बस, टैक्सी आदि से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
- सड़क मार्ग से भी यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। सोमनाथ राजकोट से करीब 190 किलोमीटर, द्वारका से लगभग 230 किलोममीटर और अहमदाबाद से करीब 400 किलोमीटर की दूरी पर है।
- हवाई यात्रा के लिए साेमनाथ मंदिर से सबसे नजदीकी दीव एयरपोर्ट है। इस एयरपोर्ट से साेमनाथ मंदिर की दूरी करीब 85 किलोमीटर है। यहां से मंदिर तक टैक्सी आदि से जा सकते हैं। इसके अलावा पोरबंदर एयरपोर्ट करीब 130 किलोमीटर और राजकोट एयरपोर्ट करीब 200 किलोमीटर दूर है।
(अस्वीकरण: इस लेख में दी गई जानकारी लोक मान्यताओं और पौराणिक श्रुतियों व कथाओं पर आधारित है। इससे sateeksamachar.com और लेखक व पोस्टकर्ता की किसी तरह की सहमति या असमहमति नहीं है। यह लेख सिर्फ लोगों को इस मंदिर व तीर्थस्थल के बारे में जानकारी देने के लिए लिखा और पोस्ट किया गया है।)

