सटीक समाचार, नई दिल्ली। नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं के आंदोलन के बाद केंंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सोमवार को पेपर लीक पर बने कानून में संशोधन के लिए नया विधेयक (New Bill On Paper Leak) पेश किया। लोकसभा में भारी हंगामे के कारण इस संशोधन विधेयक पर चर्चा नहीं हो सकी। अब मंगलवार यानि आज को इस पर चर्चा के बाद इसके पारित किेए जाने की उम्मीद है। इस विधेयक में परीक्षा में नकल और पेपर लीक पर कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेश किया, आज चर्चा के बाद पास होने की उम्मीद
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों वीडियो संदेश जारी कर इस बारे में घोषणा की थी। लोकसभा में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस विधेयक को पेश किया। जंतर मंतर पर युवाओं के धरना के दौरान कॉकराेच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर आंदोलन समाप्त कराने में जेपी नड्डा के साथ डॉ. जितेंद्र सिंह की अहम भूमिका थी।
सोमवार को विपक्ष के हंगामे के कारण नहीं हो सकी चर्चा
विपक्ष के हंंगामे के कारण सदन में इस पर चर्चा नहीं हो सकी। बाद में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी दलों के नेताओं के साथ बैठक कर गतिरोध काे तोड़ने की पहल की। ऐसे मे मंगलवार को इस पर चर्चा होने का रास्ता निकलता दिखा। इस संशोधन विधेयक में परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं।
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केंद्र सरकार ने इस विधेयक द्वारा पेपर लीक पर 2024 में बनाए गए कानून में पांच अहम बदलाव का प्रस्ताव किया है। संंशोधित विधेयक में किए गए प्रावधान पर एक नजर-
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक-2026 में पेपर लीक और नकल के मामले में पांच से 10 साल कैद और 50 लाख रुपये के जुर्माने का प्राववान किया गया है। 2024 के कानून में इसके लिए तीन से पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक-2026 में पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले संगठित अपराध के मामले में सात से 10 साल तक की कैद और पांच करोड़ रुपये तक का जुर्माने का प्रावधान किया गया है। 2024 के कानून में इसके लिए पांच से सात वर्ष तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने की सजा तय की गई है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक-2026 में पेपर लीक व परीक्षा में गड़बड़ी के मामले की की जांच के लिए दो माह और सुनवाई के तीन महीने के अंदर की समय सीमा तय की गई है। ऐसे मामलों की सुनवाई फास्टट्रैक कोर्ट में होगी। 2024 के कानून में ऐसे मामलों की जांच और सुनवाई के लिए कोई समय सीमा नहीं तय है। ऐसे मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होने की व्यवस्था है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक-2026 में परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के मामलों की जांच स्पेशल टास्कफोर्स के गठन का प्रस्ताव किया गया है। दूसरी ओर, 2024 में बने कानून में ऐसे मामलों की जांच केंंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा कराने की व्यवस्था है।
- प्रस्तावित संशोधन विधेयक-2026 में परीक्षाओं में पेपर लीक और गड़बड़ी के मामलाें में दोषी पाए गए निजी एजेंसियों को आठ साल तक के लिए ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान किया गया है। 2024 के कानून में ऐसी निजी एजेंसियों को चार साल तक के लिए ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है।
इसके साथ ही एक -दो दिन पहले केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा व्यवस्थाओं में सुधार के लिए नंदन नीलकेणि की अध्यक्षता में छह सदस्यीय विशेष टास्कफोर्स का गठन किया गया है।
यह है टास्कफोर्स –
- नंदन नीलेकणि (टेक्नालॉजी विशेषज्ञ)- चेयरमैन।
- एस. सोमनाथ (इसरो के पूर्व चेयरमैन)।
- वी. कामकोटी (निदेशक, आईआईटी मद्रास)।
- तपन डेका (पूर्व आईबी निदेशक)।
- अनीता करवाल (पूर्व शिक्षा सचिव)।
- अमृतलाल मीणा (लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ)।
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