सटीक समाचार, नई दिल्ली।
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों (लोकसभा सदस्यों) ने केंद्र में सत्ताधारी एनडीए को समर्थन देने का फैसला किया है। लोकसभा में टीएमसी (TMC) की मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके समेत 20 सांसदों ने एनडीए को अपना समर्थन देने का पत्र लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा है। ऐसे में टीएमसी के संसदीय दल में विभाजन दिख रहा है।
लोकसभा में टीएमसी के 28 सांसद हैं, टीएमसी की मुख्य सचेतक हैं काकोली घोष दस्तीदार
बता दें कि लोकसभा में टीएमसी (TMC) के 28 सांसद हैं। टीएमसी के राज्यसभा में 12 सदस्य हैं। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 विधायकों में से 54 ने अपना अलग गुट बना लिया था। काकोली घोष ने कहा है कि मेरे सहित टीएमसी (TMC) के 20 सांसदों ने एनडीए को समर्थन देने के फैसला किया है और इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेज दिया गया है। यह फैसला इन सभी सांंसदों के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
टीएमसी के 14 सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ बैठक
काकोली घोष दस्तीदार का कहना है कि यह फैसला जनादेश को देखते हुए लिया गया है। हमने पश्चिम बंगाल की जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है। हमारा मानना है कि भविष्य की राजनीतिक दिशा एनडीए के अनुरूप होना चाहिए। बता दें के टीएमसी के 14 सांसदों ने सोमवार दोपहर केंद्रीय मंत्री और पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी भूपेंद्र यादव के साथ बैठक की। इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
लगातार बढ़ रही है टीएमसी की अंदरुनी कलह
बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में कलह थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 80 विधायकों में से 58 ने बागी रुख अपनाते हुए अपना अलग गुट बना लिया। विधानसभा ने उनके गुट के नेता ऋतब्रत को नेता विपक्ष का दर्जा भी दे दिया।
कई वरिष्ठ नेता छोड़ चुके हैं टीएमसी
इसके बाद संसदीय दल में विभाजन की नौबत आ गई है। 20 सांसदों के बागी तेवर ने ममता बनर्जी की राजनीतिक परेशानी और बढ़ा दी है। पार्टी में अंदरूनी संकट लगातार बढ़ रहा है। कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है। पिछले दिनों ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में कुछ ही विधायक और सांसद पहुंचे थे। कई वरिष्ठ नेता भी नदारद रहे थे। सबसे अहम बात यह है कि पार्टी में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के साथ-साथ खुद ममता के विरोध में भी आवाजें उठ रही हैं।

