Private School Fees: पंजाब में प्राइवेट स्‍कूलों पर मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर लगी रोक, तीन साल में अधिक ली गई फीस करनी होगी वापस

Private School Fees: पंजाब में प्राइवेट स्‍कूलों पर मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने पर लगी रोक, तीन साल में अधिक ली गई फीस करनी होगी वापस
Published: 3 Jun, 2026 at 09:50 PM

सटीक समाचार, चंडीगढ़।

Private School Fees : पंजाब में प्राइवेट स्कूल अब मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। राज्‍य की भगवंत मान सरकार ने निजी स्‍कूलों की मनामनी पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। इससे राज्‍य के लाखों परिवारों को राहत मिली है। स्‍कूलों की फीस को लेकर भगवंत मान सरकार ने एक व्यापक नियामक ढांचे की घोषणा की है। इसके तहत वार्षिक फीस वृद्धि पर पांच फीसदी की सीमा लगाई गई है, यानि स्‍कूल फीस में पांच प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान वार्षिक सीमा का उल्लंघन किया है, उनको वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करनी होगी। इनका पालन नहीं करने पर जुर्मानों के प्रावधान के अलावा अंततः स्कूल की मान्यता तक रद्द की जा सकती है।

नए नियम में ट्यूशन फीस के साथ सभी खर्च और फंड इसमें शामिल होंंगे

इसको लेकर पंजाब सरकार अध्‍यादेश जारी करेगी और बाद में प्रस्‍तावित कानून को पंजाब विधानसभा के आगामी सत्र में पेश किया जाएगा और यह पंजाब के सभी प्राइवेट स्कूलों पर लागू होगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि पांच फीसदी की यह सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही नहीं, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले सभी अनिवार्य खर्चों और फंडों पर भी लागू होगी। इससे उन सभी रास्तों को बंद कर दिया जाएगा, जिनका उपयोग संस्थान अक्सर माता-पिता पर अतिरिक्त खर्चों का बोझ डालने के लिए करते हैं।

भगवंत मान बोले – नया कानून शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बहाल करेगा

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने दावा किया कि नया कानून शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही बहाल करेगा, माता-पिता को लूट-खसूट से बचाएगा और स्कूल फीस को लेकर बच्चों व परिवारों की होने वाली मानसिक परेशानी को हमेशा के लिए खत्म कर देगा।

अपने ‘एक्स’ पेज पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिखा, ‘अमृतसर में हुई दुखद घटना के बाद मुझे पिछले 24 घंटों के दौरान प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ाने के संबंध में माता-पिता के सैकड़ों फोन आए हैं। हमारे बच्चों के भविष्य और माता-पिता को हो रही भारी परेशानी को ध्यान में रखते हुए आपकी सरकार ने बहुत ही महत्वपूर्ण और सख्त फैसला लिया है।’

पिछले तीन साल में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने वालों को अतरिक्‍त राशि करनी होगी वापस

मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, ‘पंजाब के किसी भी प्राइवेट स्कूल को अब अपनी वार्षिक फीस में पांच फीसदी से अधिक वृद्धि करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसके अलावा, जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों में फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उन्हें माता-पिता से वसूली गई अतिरिक्त राशि तुरंत वापस करनी होगी। इस फैसले को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए हम जल्द ही अध्यादेश लाएंगे। पांच फीसदी की सीमा सिर्फ ट्यूशन फीस पर ही लागू नहीं होगी, बल्कि स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले अन्य सभी अनिवार्य फंडों और खर्चों को भी कवर करेगी।’

यह देश में अपने तर‍ह का सबसे सख्‍त नियम होगा: भगवंत मान

भगवंत मान ने कहा, ‘यह देश में अपने तरह का सबसे सख्त नियम होगा और किसी भी स्कूल को कोई छूट नहीं दी जाएगी। पंजाब में शिक्षा के नाम पर माता-पिता और विद्यार्थियों की लूट-खसूट अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’

पत्रकारों से बातचीत में भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्राइवेट अनएडेड (गैर-सहायता प्राप्त) स्कूलों का फीस ढांचा इस वक्त ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ के अधीन आता है। इसमें 2019 में संशोधन किया गया था, लेकिन पिछली सरकारें इस कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने में नाकाम रहीं, जिसके कारण स्कूलों को माता-पिता पर फीस बढ़ोतरी का बोझ डालने की खुल्लम-खुल्ला इजाजत मिली।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने वार्षिक फीस वृद्धि पर पांच फीसदी की सीमा लगाने का फैसला किया है ताकि कोई भी स्कूल इस सीमा से अधिक फीस ना बढ़ा सके। हम इस संबंध में अध्यादेश लाएंगे। जिन स्कूलों ने पिछले तीन सालों के दौरान फीस में 15 फीसदी से अधिक बढ़ोतरी की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 2016 के मूल एक्ट में स्पष्ट तौर पर यह शर्त रखी गई थी कि फीसों में बढ़ोतरी पिछले साल की फीस के 8 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए, लेकिन पिछली सरकार द्वारा किए गए संशोधनों के जरिए इस व्यवस्था को कमजोर कर दिया गया था।

नियम का उल्‍लंघन करने वाले स्‍कूलों पर जुर्माना भी तय किया

उन्‍होंने कहा कि कानून का उल्लंघन करने वाले स्कूलों को चरणबद्ध जुर्माना प्रणाली का सामना करना पड़ेगा। पहले उल्लंघन के लिए जुर्माना प्राइमरी स्कूलों के लिए 30,000 रुपये से लेकर सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए एक लाख रुपये तक हो सकता है। बार-बार उल्लंघन करने पर अधिक जुर्माना लगेगा, जो 60,000 से लेकर दो लाख रुपये तक होगा। तीसरे उल्लंघन के मामले में अधिकारी आर्थिक जुर्माना लगाने के अलावा स्कूल की मान्यता या एफिलिएशन रद्द कर सकते हैं। रेगुलेटरी बॉडी के पास माता-पिता से वसूली गई अतिरिक्त फीस वापस करने के आदेश देने की शक्ति भी है।

प्राइवेट स्‍कूलों के वित्‍तीय ऑडिट पर विचार

इसके साथ ही, पंजाब सरकार प्राइवेट स्कूलों के वित्तीय ऑडिट (खातों की जांच) के लिए प्रणालियों पर भी विचार कर रही है। विचाराधीन प्रस्ताव में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की एक कमेटी बनाना शामिल है। य‍ह कमेटी पिछले तीन से पांच वर्ष के स्कूलों के वित्तीय रिकॉर्डों की समीक्षा करेगी। इसमें फीस की वसूली, खर्चे, तनख्वाहें, बुनियादी ढांचे का निवेश, रिजर्व फंड और संबंधित पक्षों के लेन-देन शामिल हैं। ऐसे ऑडिट यह निर्धारित करने में मदद करेंगे कि क्या फीस बढ़ोतरी सचमुच जायज थी और क्या वसूले गए फंडों का उपयोग शिक्षा के उद्देश्यों के लिए किया गया था।

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